
भोपाल। मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों की बढ़ती परेशानियों के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर गंभीर मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और वे आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं। सिंघार ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को सुधारने की मांग की है, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में विस्तार से बताया कि प्रदेश में गेहूं खरीदी की तिथि अब तक तीन बार बदली जा चुकी है, जिससे किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था और बारदान (बोरी) की भारी कमी के कारण खरीदी प्रक्रिया बाधित हो रही है। इस वजह से किसान अपनी फसल को लंबे समय तक रोककर रखने को मजबूर हैं या फिर कम कीमत पर बेचने के लिए विवश हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है, जो कि सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़ा करता है।
उमंग सिंघार ने इस समस्या के आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि किसानों की आय प्रभावित होने से उनकी ऋण चुकाने की क्षमता कमजोर हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के 64 लाख से अधिक खाते संचालित हैं, जिन पर करीब 86,995 करोड़ रुपये का बकाया ऋण है। ऐसे में यदि किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिला तो वे डिफॉल्टर घोषित होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।
विपक्ष का आरोप- सरकार नहीं कर रही कार्रवाई
उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे पहले भी 24 मार्च 2026 को सरकार को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सिंघार ने इसे सरकार की उदासीनता बताते हुए कहा कि किसानों के मुद्दों पर इस तरह की अनदेखी उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की ऋण अदायगी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए और प्रभावित किसानों को डिफॉल्टर घोषित न किया जाए।
साथ ही, उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को जल्द से जल्द सुचारू रूप से पूरा किया जाए और बारदान की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की बाधा न हो। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर प्रदेश की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
अंत में उमंग सिंघार ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि किसानों के हित में इस विषय पर संवेदनशील और त्वरित निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका और भविष्य से जुड़ा सवाल है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
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