मध्य प्रदेश: सिंचाई क्षमता बढ़ी मगर किसानों की आय में नहीं हुई वृद्धि, जानिए क्या हैं कारण?

भाजपा सरकार ने कहा था कि किसानों की आय दो गुनी होगी, वर्ष 2003 में 7.5 लाख हेक्टेयर से अब 47 लाख हेक्टेयर तक हुई सिंचित क्षमता पर इस अनुपात नहीं बढ़ी किसानों की आय।
खेत.
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भोपाल। "किसानों का सम्मान व सशक्तिकरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। हमने पिछले दस वर्षों में सॉइल हेल्थ कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई, फसल बीमा, आसानी से बीज की उपलब्धता जैसी विभिन्न नीतियों एवं पीएम किसान सम्मान योजना के अंतर्गत सीधे उनके खातों में वित्तीय सहायता प्रदान करके किसानों को सशक्त बनाया है। हमने एमएसपी में भी लगातार वृद्धि की है। हम आगे भी अपने किसान परिवारों की आय को बढ़ाने के लिए काम करेंगे।"

भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र के पृष्ट क्रमांक 21 पर किसानों से किया जा रहा यह वादा उल्लेखित है। भाजपा ने किसानों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूर्व के चुनावी घोषणा पत्रों की तरह इस बार भी किसानों के लिए खास काम करने के वादे किए गए है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र को 'भाजपा का संकल्प और मोदी की गारंटी' के नाम से विमोचित किया गया है।

भाजपा का यह दावा है कि उनकी सरकार में किसानों की आय दोगुनी होगी। इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा के घोषणा पत्र के पृष्ठ क्रमांक 21 से 23 तक 19 वादे किसानों से किए गए हैं। परंतु मध्य प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ने के बावजूद भी उस अनुपात किसानों की आय नहीं बढ़ सकी है।

2003 में राज्य की सिंचाई क्षमता 7.5 लाख हेक्टेयर थी, जो अब 47 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसे 2025 तक 65 लाख हेक्टेयर और अगले पांच वर्ष में एक करोड़ हेक्टेयर तक करने का सरकार का लक्ष्य है। सिंचाई क्षमता बढ़ने के साथ ही कृषि उत्पादन भी बढ़ा, मगर किसानों की आय उस अनुपात में नहीं बढ़ी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मार्च में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले कैबिनेट में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई निर्णय लिए। कृषि उपकरण, बिजली में आदि के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है। इसके बाद भी कुछ कमियां जिससे किसानों की आय नहीं बढ़ रही है।

भारतीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के किसानों की औसत आय 2018-19 में आठ हजार 339 रुपये प्रतिमाह आकलित की गई जो कि 2015-16 में 9740 थी। किसानों की आय के मामले में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में 26वें नंबर पर रहा है।

द मूकनायक से बातचीत करते हुए दतिया के किसान सोनू सिंह ने बताया कि संसाधन से मेहनत कम तो हो रही है और फसल की पैदावार भी बढ़ रही है। लेकिन लागत के मुताबिक भाव नहीं मिल रहा है इसलिए आय उतनी नहीं हैं। खाद, ट्रैक्टर और फसल को रोग से बचाने के लिए छिड़काव करने वाली दवाइयां महंगी हो रही है।

द मूकनायक प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए भारतीय किसान संघ के मध्यभारत प्रान्त प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि सरकार ने किसानों की आय को बढ़ाने के लिए अभी तक कोई बड़ी योजना नहीं बनाई है। सिंचित भूमि का रकबा बढ़ा है, लेकिन किसान को फसल पैदा करने में उपयोग हो रहे खाद, दवाइयां और मशीनरी यह सब महंगा हुआ है, इस कारण किसान की आय में वृद्धि नहीं हो रही है। सरकार इसके लिए कोई योजना बनाएं जिससे फसल की लागत कम हो सके इससे निश्चित ही किसान की आय बढ़ेगी।

47 लाख हेक्टेयर हुई सिंचित भूमि

एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में किसानों की संख्या एक करोड़ तीन लाख है। वहीं कृषि के लिए योग्य भूमि 151.91 लाख हेक्टेयर है। जबकि वर्तमान में सिंचित भूमि का रकबा - 47 लाख हेक्टेयर है। यह रकबा लगातार बढ़ रहा है, मगर किसानों की आय नहीं बढ़ रही है।

कर्ज में डूब रहे किसान!

आय में बढ़ोत्तरी नहीं बढ़ने से किसानों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश में लाखों किसान पहले ही किसान क्रेडिट कार्ड से पैसा लेकर खेती की लागत में लगा चुके हैं। लेकिन फायदा नहीं मिलने के कारण बैंक का ऋण नहीं चुका पाए, और डिफॉल्टर हो गए। जिनमें सैकड़ों किसान ऐसे है जिनपर बैंक से खेती के लिए गए ऋण से ज्यादा तो ब्याज हो गया है।प्रदेश में प्रति किसान परिवार औसत 74 हजार रुपये का कर्ज है।

अन्य राज्यों में स्थति

.सबसे अच्छी स्थिति में मेघालय था, जहां किसानों की मासिक आय 29 हजार 348 रुपये रही। हरियाणा की 22841 रुपये, केरल की 17,915 रुपये, उत्तराखंड की 13,552, कर्नाटक की 13,441 रुपये, गुजरात की 12,631 रुपये रही। आय कम होने के कारण किसान अपना मूल काम छोड़ दूसरे पेशे में या रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर है। किसानों की आय में बढोत्तरी नहीं होने के कारण किसान मजदूरी करने पलायन तक कर जा रहा है।

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