
भोपाल। मध्यप्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और किसानों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की "किसान क्रांति पदयात्रा" लगातार आगे बढ़ रही है। आंदोलन के दूसरे दिन मंगलवार को यह पदयात्रा बरखेड़ा से आगे भोपाल की ओर रवाना होगी। किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। किसानों का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) का शांतिपूर्ण घेराव करना है, ताकि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने।
नर्मदा पुल पर प्रशासन से पहली बड़ी भिड़ंत, बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े किसान
सोमवार को पदयात्रा के दौरान नर्मदापुरम जिले की सीमा पर नर्मदा ब्रिज के पास प्रशासन और किसानों के बीच पहला बड़ा टकराव देखने को मिला। प्रशासन ने किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए थे। हालांकि किसानों ने इन बैरिकेडों को हटाते हुए आगे बढ़ने का फैसला किया। आंदोलनकारियों का कहना था कि वे अपनी लोकतांत्रिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से राजधानी जा रहे हैं और उन्हें रोका जाना उचित नहीं है। बैरिकेड हटाने के बाद पदयात्रा आगे बढ़ी और प्रशासन लगातार उनके साथ चलता रहा।
बुधनी क्षेत्र में एक के बाद एक पांच बैरिकेड हटाए
नर्मदा पुल पार करने के बाद भी किसानों का संघर्ष जारी रहा। बुधनी क्षेत्र में प्रशासन ने अलग-अलग स्थानों पर पांच बैरिकेड लगाकर यात्रा रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने हर बैरिकेड पार करते हुए अपना मार्च जारी रखा। आंदोलनकारी गड़रिया नाला पार कर औबेदुल्लागंज-बैतूल फोरलेन मार्ग से होते हुए बरखेड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने रात में विश्राम किया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में किसान नारेबाजी करते रहे और सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की अपील करते रहे।
सुबह से शाम तक पुलिस और किसानों के बीच तनावपूर्ण स्थिति
सोमवार सुबह करीब 9 बजे से लेकर शाम लगभग 7:30 बजे तक प्रशासन और किसानों के बीच लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। यात्रा में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्ग किसान भी शामिल रहे, जिनमें 70 वर्ष तक की उम्र के लोग भी पैदल चलते नजर आए। प्रशासन ने पहले गांव से नर्मदापुरम शहर में प्रवेश रोकने की कोशिश की। इसके बाद सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात कर किसानों को रोकने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद किसान संगठित होकर लगातार आगे बढ़ते रहे और किसी भी स्तर पर यात्रा रोकने को तैयार नहीं हुए।
गुरुद्वारा बंद कराने का लगाया आरोप, बरखेड़ा में बितानी पड़ी रात
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिन पदयात्रा के दौरान औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में रात्रि विश्राम की योजना बनाई गई थी, लेकिन नर्मदापुरम में यात्रा देर तक चलने के कारण कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। सोलंकी का आरोप है कि रायसेन जिला प्रशासन ने गुरुद्वारे को बंद करवा दिया, जिससे किसानों को वहां ठहरने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद किसानों को बरखेड़ा में वैकल्पिक व्यवस्था कर रात बितानी पड़ी। हालांकि प्रशासन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मूंग खरीदी और खाद वितरण बना आंदोलन का मुख्य मुद्दा
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि प्रदेश के अनेक जिलों में किसानों को मूंग की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और सरकार द्वारा घोषित खरीदी व्यवस्था में कई किसानों की उपज शामिल नहीं हो रही है। किसानों की मांग है कि प्रदेश में उत्पादित मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज औने-पौने दाम पर निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। इसके साथ ही खाद वितरण व्यवस्था में सुधार, समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने और किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान की भी मांग की जा रही है।
भोपाल पहुंचकर सीएम हाउस घेरने का ऐलान
संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लेती। किसान नेताओं ने कहा है कि उनकी पदयात्रा का अगला पड़ाव भोपाल है, जहां मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन अपनी मांगों को लेकर किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसान संगठनों का दावा है कि जैसे-जैसे यात्रा राजधानी के करीब पहुंचेगी, वैसे-वैसे प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिक संख्या में किसान इस आंदोलन से जुड़ेंगे।
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