नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर किसानों का गुस्सा अब फिर से सड़कों पर उतरने वाला है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले देश भर के विभिन्न किसान संगठन आगामी 23 अक्टूबर को दिल्ली की ओर कूच करेंगे। इस बड़े विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना है। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के अध्यक्ष और एसकेएम के वरिष्ठ नेता अशोक धवले ने शुक्रवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मांग के समर्थन में देश के सभी जिला, तालुक और ब्लॉक मुख्यालयों पर एक साथ धरने और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगी रोक के सवाल पर किसान नेता धवले ने बेबाक अंदाज में कहा कि अन्नदाता अब इससे भी बड़े संघर्षों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने एसआईआर के खिलाफ होने वाले इस आंदोलन को अब तक के सबसे बड़े जन-संघर्षों में से एक बताया। प्रशासन की ओर से किसी भी तरह के दमन से बेखौफ होने का दावा करते हुए उन्होंने चुनौती दी कि अधिकारी जो चाहे कर के देख लें, किसान डरने वाले नहीं हैं। इस विशाल आंदोलन में केवल किसान ही नहीं, बल्कि छात्र, युवा, महिलाएं, नागरिक समाज के संगठन और ट्रेड यूनियन के सदस्य भी कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
इसी बीच किसान नेताओं ने अखिल भारतीय किसान सभा के आगामी 36वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आधिकारिक लोगो भी जारी किया। यह अहम सम्मेलन 15 से 18 नवंबर के बीच तेलंगाना के नलगोंडा में आयोजित किया जाएगा।
एआईकेएस के महासचिव विजू कृष्णन और अशोक धवले ने बताया कि नलगोंडा को इसके ऐतिहासिक महत्व के कारण चुना गया है, क्योंकि यह जगह ऐतिहासिक तेलंगाना सशस्त्र किसान संघर्ष का प्रमुख केंद्र रही है। एआईकेएस ने अपने गौरवशाली सफर के 90 साल पूरे कर लिए हैं और 1.58 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ यह वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा किसान संगठन बन चुका है।
इस संगठन का इतिहास साम्राज्यवाद और सामंतवाद के खिलाफ कड़े प्रतिरोध का रहा है। तेलंगाना, तेभागा, वारली आदिवासी, पुन्नाप्रा वायलार और सुरमा घाटी जैसे ऐतिहासिक संघर्षों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, एआईकेएस आज भी नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के खिलाफ अपनी जुझारू लड़ाई लड़ रहा है। किसान नेताओं ने बताया कि इस सम्मेलन को संबोधित करने के लिए अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी एकजुटता के प्रतीक के रूप में आमंत्रित किया गया है।
अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 नवंबर से और भी उग्र प्रदर्शन करने का फैसला किया है। एआईकेएस की बैठक किसानों पर हो रहे इन हमलों के खिलाफ सभी संगठनों को एक मजबूत मंच प्रदान करेगी।
नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का सीधा मकसद हमारे किसानों को भारी सब्सिडी वाली कॉर्पोरेट कृषि के सामने खड़ा करना है। बिना किसी आयात शुल्क के विदेशी उत्पादों के भारत में आने से किसानों, डेयरी उत्पादकों, बागवानी करने वालों और मछुआरों को भारी नुकसान होगा। यह नीतियां भारतीय कृषि और ग्रामीण गरीबों की आजीविका के लिए एक मौत की घंटी साबित होंगी।
सम्मेलन के लोगो की बात करें तो इसे केरल के कोझिकोड निवासी अश्वथ माधवन द्वारा डिजाइन किया गया है। पूरे भारत से आए कई रचनात्मक प्रस्तावों में से इस डिजाइन को अंतिम रूप से चुना गया। विजू कृष्णन ने बताया कि यह लोगो 1936 से लेकर अब तक के निरंतर संघर्षों की कहानी बयां करता है।
इसमें नलगोंडा की धरती को सींचने वाले नागार्जुन सागर बांध की पृष्ठभूमि में मार्च करते हुए किसानों को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यह चित्र तेलंगाना किसान संघर्ष से लेकर हालिया किसान लॉन्ग मार्च और भविष्य की लड़ाइयों तक, हर बड़े आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता है।
इस बार के नलगोंडा सम्मेलन का मुख्य नारा किसानों और खेती-किसानी को बचाने की इसी जद्दोजहद पर केंद्रित है। सम्मेलन का उद्घोष होगा, "किसानों और कृषि पर कॉर्पोरेट हमलों का विरोध करें; जनता का विकल्प बनाने के लिए एकजुट हों।" इसी बुलंद इरादे के साथ किसान आंदोलन को एक नई दिशा देने की पूरी तैयारी की जा रही है।
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