यूपी छात्रवृत्ति नियमों में बड़ा बदलाव: मैनेजमेंट कोटे और स्पॉट एडमिशन वाले छात्रों को अब नहीं मिलेगी स्कॉलरशिप

UP Scholarship New Rules: पारदर्शिता लाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, अब केवल काउंसलिंग और मेरिट से आए छात्रों को ही मिलेगी फीस प्रतिपूर्ति, जानिए क्या हैं नई शर्तें।
UP Scholarship Rules
यूपी स्कॉलरशिप के नियमों में बड़ा बदलाव! अब मैनेजमेंट कोटा और स्पॉट एडमिशन वाले छात्रों को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति। जानें सरकार की नई शर्तें और किसे होगा नुकसान।(Ai Image)
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति (Fee Reimbursement) की आस लगाए बैठे लाखों छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। प्रदेश सरकार ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति (Post-Matric Scholarship) योजना की पात्रता नियमों में बड़ा संशोधन किया है। नए नियमों के तहत, अब निजी शिक्षण संस्थानों में 'मैनेजमेंट कोटे' या 'स्पॉट एडमिशन' के जरिए दाखिला लेने वाले छात्र इस सरकारी योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे।

सरकार ने यह कदम प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और योग्य छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उठाया है।

क्या हैं नए नियम?

सरकार द्वारा जारी किए गए संशोधित नियम अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामान्य वर्ग (General Category) सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी संस्थानों में किसी भी तरह की "गैर-पारदर्शी" (Non-transparent) प्रक्रिया से प्रवेश लेने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति की रेस से बाहर रखा जाएगा।

पारदर्शिता ही अब एकमात्र रास्ता

संशोधित नियमावली के अनुसार, निजी शिक्षण संस्थानों में वोकेशनल या टेक्निकल कोर्सेज में पढ़ने वाले एससी और एसटी वर्ग के छात्रों को योजना का लाभ तभी मिलेगा, जब उनका प्रवेश पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ हो। इसके लिए संस्थानों को अब निम्नलिखित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा:

  • सार्वजनिक विज्ञापन: संस्थानों को आवेदन आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी करना होगा।

  • मेरिट लिस्ट: दाखिले के लिए एक रैंक लिस्ट तैयार करनी होगी और चयन सूची (Selection List) को प्रकाशित करना अनिवार्य होगा।

  • निर्धारित फीस: छात्रों से केवल वही फीस ली जा सकती है जो सक्षम प्राधिकारी या फीस नियामक समिति द्वारा अनुमोदित हो।

यही नियम सामान्य वर्ग के छात्रों पर भी लागू होंगे। उन्हें भी शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ तभी मिलेगा जब उनका प्रवेश पारदर्शी माध्यम से हुआ हो और उनसे केवल निर्धारित शुल्क ही वसूला गया हो।

अधिकारियों का क्या कहना है?

इस बदलाव के बारे में जानकारी देते हुए उप निदेशक (Deputy Director) आनंद कुमार सिंह ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा, "मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन या किसी अन्य गैर-पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश लेने वाले छात्र इस योजना के लाभ के लिए पात्र नहीं होंगे। इसी तरह, यदि कोई संस्थान निर्धारित राशि से अधिक शुल्क वसूलता है, तो भी कोई लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा।"

माना जा रहा है कि, इस फैसले का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो प्रवेश परीक्षाओं या काउंसलिंग प्रक्रिया से बचने के लिए सीधे मैनेजमेंट कोटे का सहारा लेते थे। सरकार के इस कदम से निजी कॉलेजों की मनमानी पर लगाम लगने और जरूरतमंद मेधावी छात्रों को उनका हक मिलने की उम्मीद है।

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