
नई दिल्ली: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने 10 मार्च को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए चलाई जा रही राष्ट्रीय फेलोशिप योजनाओं के बारे में अहम जानकारी साझा की है। यह योजनाएं उच्च शिक्षा में शोध कर रहे छात्रों के लिए सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
देश में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा क्रमशः अनुसूचित जाति के शोधार्थियों के लिए 'राष्ट्रीय फेलोशिप योजना' (एनएफएससी) और अनुसूचित जनजाति के शोधार्थियों के लिए 'राष्ट्रीय फेलोशिप योजना' (एनएफएसटी) का संचालन किया जा रहा है। एनएफएससी योजना के तहत वे अनुसूचित जाति के छात्र पात्र हैं जिन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों या संस्थानों में प्रवेश लिया है और यूजीसी नेट जेआरएफ या संयुक्त यूजीसी-सीएसआईआर नेट परीक्षा पास की है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है।
वहीं, एनएफएसटी योजना के तहत अनुसूचित जनजाति के उन छात्रों को पात्र माना गया है जिन्होंने अपने स्नातकोत्तर में कम से कम 55 प्रतिशत अंक हासिल किए हों, यूजीसी-नेट या संयुक्त यूजीसी-सीएसआईआर नेट परीक्षा उत्तीर्ण की हो और योजना के दायरे में आने वाले संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया हो। एसटी छात्रों के लिए इस योजना में अधिकतम आयु सीमा 36 वर्ष निर्धारित की गई है।
इन दोनों ही योजनाओं के अंतर्गत छात्रवृत्ति या फेलोशिप के लिए अलग-अलग श्रेणियां नहीं बनाई गई हैं। हालांकि, एनएफएससी योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष कुल 2000 स्लॉट निर्धारित किए गए हैं, जिनमें से 1500 स्लॉट ह्यूमैनिटीज (यूजीसी नेट के लिए) और 500 स्लॉट विज्ञान संकाय (संयुक्त यूजीसी-सीएसआईआर नेट के लिए) आरक्षित रखे गए हैं।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पीएचडी शोधार्थियों तक इस छात्रवृत्ति की पहुंच, जागरूकता और समय पर इसका वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। इन उपायों में एक समर्पित ऑनलाइन 'छात्रवृत्ति और फेलोशिप प्रबंधन पोर्टल' (एसएफएमपी) के जरिए योजनाओं का कार्यान्वयन शामिल है।
इसके अलावा, पात्र आवेदकों के आधार-सीडेड बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से फेलोशिप का वितरण किया जा रहा है। सत्यापन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ व्यापक जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए विभाग, एनएसएफडीसी और यूजीसी की वेबसाइटों तथा आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से सूचना का प्रसार भी किया जा रहा है।
सरकार द्वारा स्कॉलरशिप और फेलोशिप मैनेजमेंट पोर्टल (एसएफएमपी) के आधार पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों (2022-23 से 2024-25) में देश भर के हजारों एससी और एसटी शोधार्थियों को इन योजनाओं के तहत कवर किया गया है।
उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022-23 के दौरान 462 एससी और 10 एसटी शोधार्थियों को लाभ मिला, जबकि 2024-25 में यह संख्या 776 एससी और 17 एसटी शोधार्थियों की रही। इसी तरह, महाराष्ट्र में 2022-23 में 102 एससी और 79 एसटी शोधार्थी लाभान्वित हुए, जो 2024-25 में क्रमशः 149 और 69 दर्ज किए गए। मध्य प्रदेश में 2022-23 में 59 एससी और 67 एसटी छात्रों को लाभ मिला, और 2024-25 में यह आंकड़ा 107 एससी और 36 एसटी रहा।
इन आंकड़ों के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि चूंकि एनएफएससी योजना के तहत फेलोशिप की अवधि 5 वर्ष तक है और एक शोधार्थी को कई वर्षों तक इसका लाभ मिलता है, इसलिए एक शोधार्थी को वर्ष के दौरान केवल एक बार ही गिना गया है, भले ही उसे कई बार भुगतान किया गया हो।
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