
नई दिल्ली/ मुंबई / चेन्नई/बेंगलुरु/ हैदराबाद / जयपुर – वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया (ईरान-इजराइल संघर्ष) में उभरे तनाव ने भारत की कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और शिक्षा संस्थानों को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सिलेंडरों की नई बुकिंग और वितरण पर रोक लगा दी है। नतीजा? देश के प्रमुख शहरों में होटल-रेस्तरां, हॉस्टल संकट में फंस गए हैं, मेन्यू कट हो रहे हैं, ऑपरेशन बंद हो रहे हैं, कर्मचारी घर लौट रहे हैं और आम जनता पर असर पड़ रहा है। प्रमुख शहरों की स्थिति देखिए, जहां संकट अब 'चेतावनी' से 'वास्तविकता' बन चुका है:
दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके। इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' लागू कर दिया।
राजस्थान में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडरों की नई बुकिंग रोक दी है। जयपुर से जोधपुर, उदयपुर तक होटल, रेस्तरां, ढाबे और सड़क किनारे वेंडर संकट में हैं। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान ने चेतावनी दी कि शादी का सीजन और पर्यटकों की भीड़ के बीच यह 'बड़ी मार' है। कई जगह बुधवार से होटल-रेस्तरां संचालकों ने कर्मचारियों को घर भेज दिया। कुछ फैक्ट्रियां भी उत्पादन रोक रही हैं या बंद हो रही हैं। उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि वैश्विक प्रभाव है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी पर कमर्शियल सेक्टर चुप्पी साधे हुए है।
चेन्नई होटल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अर्जेंट पत्र लिखकर तमिलनाडु की स्थिति को "गंभीर" बताया है। अध्यक्ष एम. रवि ने बताया कि व्यावसायिक वितरकों ने सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है और कहा है कि उनके पास स्टॉक बिल्कुल नहीं है। एसोसिएशन का तर्क है कि खाद्य उद्योग को आवश्यक वस्तु माना जाना चाहिए, क्योंकि यह आईटी पार्कों, छात्र छात्रावासों को सहारा देता है और अस्पतालों को भोजन उपलब्ध कराता है। आपूर्ति तुरंत बहाल न होने पर राज्य भर के हजारों रेस्तरां पूरी तरह बंद होने की कगार पर हैं।
मुंबई में AHAR एसोसिएशन के अनुसार 20% होटल-रेस्तरां बंद हो चुके हैं और यह आंकड़ा 50-60% तक पहुंचने का खतरा है। बेंगलुरु में 10 मार्च से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं, कामर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति अचानक बंद होने से बेंगलुरु में होटल और रेस्टोरेंट बंद रहेंगे।
संकट सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पुणे जैसे औद्योगिक शहरों की छोटी फैक्ट्रियों की कमर तोड़ दी है। पिंपरी-चिंचवड़ में ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, फैब्रिकेशन और पेंटिंग यूनिटों को एलपीजी न मिलने से उत्पादन ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप बेलसरे ने बताया, "रेस्टोरेंट की तरह फैक्ट्रियां कुछ दिन बंद नहीं रह सकतीं। हमारे पास ओईएम के ऑर्डर हैं, डेडलाइन मिस हुई तो कारोबार चला जाएगा।" कुछ यूनिटों ने महंगे विकल्प प्लाज्मा कटिंग जैसे तरीके अपनाए हैं तो कई फैक्ट्रियों ने कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना शुरू कर दिया है
बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने चिंता जताई है कि अगर हालात सामान्य नहीं हुए तो आम जनता, छात्र, चिकित्सा कर्मी और अन्य जो लोग इस पर निर्भर हैं, उन्हें भोजन के लिए मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। एडवांस्ड बेकिंग कॉन्सेप्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर हारून सैत ने कथित LPG संकट पर कहा, "हम सिर्फ़ कॉफ़ी बना सकते हैं और कुछ नहीं, स्थिति बहुत खराब है।"
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पत्र लिखा है जिसमे बेंगलुरु में कमर्शियल LPG सप्लाई में रुकावट के बारे में तुरंत दखल देने की रिक्वेस्ट की है। पत्र में बताया गया कि शहर के कई होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने बताया है कि वे कमर्शियल LPG सिलेंडर नहीं खरीद पा रहे हैं, और कई जगहें चिंता जता रही हैं कि अगर जल्द ही सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उन्हें कुछ समय के लिए अपना काम बंद करना पड़ सकता है।
बेंगलुरु में छोटे रेस्टोरेंट, मेस फैसिलिटी और केटरिंग यूनिट का एक बड़ा इकोसिस्टम है जो हर दिन लाखों लोगों को सर्विस देता है। राज्य की कमर्शियल LPG की डिमांड को ट्रेडिशनली तीन OMCS-IOCL (लगभग 500-550 MT हर दिन), HPCL (लगभग 300 MT हर दिन) और BPCL (लगभग 230 MT हर दिन) से सप्लाई के ज़रिए सपोर्ट किया जाता रहा है और इस सप्लाई में अचानक रुकावट से अब बेंगलुरु में होटल, केटरिंग की जगहों और दूसरे कमर्शियल यूज़र्स पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। उनके काम में किसी भी रुकावट का शहर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। यह दिक्कत बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स को भी प्रभावित करती है जो अपने घरों से दूर रहते हैं और रेगुलर खाने के लिए होटल और मेस फैसिलिटी पर डिपेंड रहते हैं। इसके अलावा वेडिंग हॉल, हॉस्टल और इवेंट वेन्यू जो खाना बनाने के लिए कमर्शियल LPG पर डिपेंड करते हैं, उन्हें भी सोशल और कम्युनिटी इवेंट्स के मद्देनजर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। सिद्दारमैया ने पत्र में लिखा कि बेंगलुरु जैसे मेट्रोपॉलिटन शहर में कमर्शियल LPG पर निर्भरता के लेवल को देखते हुए होटल, रेस्टोरेंट, चूल्हे, कम्युनिटी हॉल और किसी भी दूसरी प्योर कमर्शियल जगहों को पर्याप्त कमर्शियल LPG सप्लाई की मांग की है।
हैदराबाद स्थित आईटी कॉरिडोर हॉस्टल एसोसिएशन, जिसके अंतर्गत माधापुर, गाचीबौली और कोंडापुर के अधिकांश हॉस्टल और पीजी सुविधाएं आती हैं, ने अपने मेनू में कटौती की है। नाश्ते में डोसा, पूरी, चपाती और इस तरह के अन्य व्यंजन नहीं मिलेंगे। केवल बुनियादी भोजन - चावल और साधारण व्यंजन ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इन हॉस्टलों और पीजी में कई कार्यरत आईटी पेशेवर, आईटी में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार और अन्य राज्यों से नौकरी की तलाश में या प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए शहर आए छात्र रहते हैं।
हैदराबाद में सीएनजी की आपूर्ति लगभग 50 प्रतिशत कम हो गई है। यहाँ सीएनजी की दैनिक खपत लगभग 2.1 लाख किलोग्राम है। हैदराबाद में लगभग 70 सीएनजी स्टेशन हैं और शहर की सड़कों पर 1 लाख सीएनजी वाहन चल रहे हैं। आपूर्ति आधी हो जाने से, कई सीएनजी वाहन उपयोगकर्ताओं को जल्द ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एलपीजी संकट से हो रही तकलीफों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि " सिलेंडर पर सरकार के मुँह क्यों सिले हैं? कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत दरअसल अपने घरों से दूर रह रहे विद्यार्थियों, कामगारों, पेशेवरों, नौकरीपेशा लोगों व श्रमिकों-मज़दूरों के लिए भोजन की भी समस्या है। इसके अतिरिक्त क्लाउड किचन व फूड सप्लाई करनेवाले स्टार्टअप, सप्लाई चेन, ट्रेवल तक के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। सरकार हर तरह की गैस की आपूर्ति के बारे में स्पष्ट सूचना दे जिससे जनता समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर सके। सरकार की गलत नीतियों का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते?"
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