
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखा है। इस खत में उन्होंने आरोप लगाया है कि आदिवासी छात्रावासों के कड़े नियम छात्रों के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं और उनकी शिक्षा के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि अपनी मांगों को लेकर आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
सीएम फडणवीस को लिखे इस पत्र में राहुल गांधी ने बीते शनिवार को पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का विशेष रूप से जिक्र किया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया था। राहुल ने बताया कि महाराष्ट्र भर से आए छात्रों ने उन्हें छात्रावास के उन अमानवीय नियमों की जानकारी दी, जो उन्हें गरिमा विहीन करते हैं और उनकी पढ़ाई के अवसर छीन लेते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने महिला छात्रावासों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि लंबी छुट्टी के बाद हॉस्टल लौटने वाली छात्राओं को अपनी 'फिटनेस' साबित करने के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट और अन्य मेडिकल जांच से गुजरने के लिए मजबूर किया जाता है। इसे एक घोर अपमान करार देते हुए उन्होंने कहा कि यह नियम छात्राओं को तब तक दोषी मानता है जब तक कि वे खुद को निर्दोष न साबित कर दें। उन्होंने इसे इंसानियत और महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला बताया है।
इसके अलावा उन्होंने 30 वर्ष से अधिक उम्र के छात्रों को हॉस्टल में रहने की अनुमति न देने वाले नियम पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस नियम के कारण अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई छात्र बेघर हो जाते हैं। छात्रावासों की खस्ताहाल स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां सुरक्षा, भोजन, साफ-सफाई और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। हालात इतने खराब हैं कि सांप काटने जैसी घटनाओं के कारण छात्रों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है।
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि ये छात्र कोई खैरात नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से तुरंत इन छात्रों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने का आग्रह किया है। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में कुपोषण से होने वाली आदिवासी बच्चों की मौत और महाराष्ट्र में सांप काटने से जान गंवाने वाली छात्राओं के मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाने की मांग की है। पार्टी ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील भी की है।
आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख विक्रांत भूरिया ने भी दोनों राज्यों के छात्रावासों में सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग उठाई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भूरिया ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी समुदाय के 22 बच्चों की कुपोषण और उससे जुड़ी बीमारियों के कारण दर्दनाक मौत हो गई है।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घरों में दिया जाने वाला पौष्टिक भोजन पिछले छह महीने से बंद कर दिया गया है। इलाके में सबसे नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी 20 किलोमीटर दूर है और टीकाकरण का दायरा 80 प्रतिशत से भी नीचे गिर चुका है। भूरिया ने बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा में 2020 से 2025 तक आदिवासी बहुल ब्लॉकों में कुपोषण रोकने के बजट पर सवाल पूछा था।
सरकार का जवाब बेहद चिंताजनक था, जिसमें बताया गया कि कुपोषित बच्चों को हर दिन केवल 12 रुपये का पौष्टिक भोजन दिया जाता है। महाराष्ट्र का रुख करते हुए उन्होंने बताया कि गढ़चिरौली के एक आदिवासी छात्रावास में 70 से अधिक लड़कियों को एक ही कमरे में फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया गया। इसी लापरवाही की वजह से छह लड़कियों को सांप ने काट लिया, जिनमें से तीन की अस्पताल में इलाज के दौरान जान चली गई।
अपनी बात को खत्म करते हुए भूरिया ने नासिक में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आदिवासी छात्रावासों में बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर छात्र लगातार अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। भूरिया ने बालाघाट में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच और इसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।
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