
नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 11वीं और 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने के लिए एक नई टीम का गठन किया है। इस 20 सदस्यीय पैनल में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों के साथ-साथ स्कूल के शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। इस नई टीम के कम से कम चार सदस्यों का अतीत या वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े संगठनों से नाता रहा है। इन दोनों में से पहली किताब नवंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।
इस महत्वपूर्ण पैनल में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), इग्नू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पांडिचेरी विश्वविद्यालय और उत्कल विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों के अलावा एनसीईआरटी के अपने फैकल्टी सदस्य भी शामिल हैं। यह एक बेहद व्यापक टीम है, जिसे एक नए और सुव्यवस्थित दृष्टिकोण के साथ किताबों को आकार देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस समिति में जिन चार सदस्यों के आरएसएस-बीजेपी से जुड़े होने की जानकारी है, उनमें जेएनयू की प्रोफेसर और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की पूर्व राष्ट्रीय सचिव वंदना मिश्रा का नाम प्रमुख है। उनके अलावा शिक्षाविद यदुनाथ देशपांडे भी इसका हिस्सा हैं, जो एबीवीपी में संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं और पेशेवर तौर पर खुद को बीजेपी का राजनीतिक सलाहकार बता चुके हैं।
इनके साथ ही पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी के प्रशांत दिवेकर और जेएनयू के शिक्षाविद रवि रमेशचंद्र शुक्ला भी पैनल में मौजूद हैं। शुक्ला उस पत्रिका के संपादकीय बोर्ड से जुड़े रहे हैं, जिसका प्रकाशन रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी से संबंधित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप द्वारा किया जाता है।
हालांकि, इस समिति का दायरा काफी बड़ा है और इसमें कई अन्य प्रमुख शिक्षाविदों को भी जगह दी गई है। इनमें जेएनयू से प्रकाश कांडपाल, एनएलयू दिल्ली से निधि गुप्ता, चाणक्य विश्वविद्यालय से चेतन सिंघई, दिल्ली विश्वविद्यालय से सुकंशिका वत्स और इग्नू से सतीश कुमार जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी का शैक्षणिक अनुभव नई किताबों की रूपरेखा को संतुलित और ज्ञानवर्धक बनाने में मदद करेगा।
इस ‘टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम’ (TDT) का नेतृत्व राजनीतिक विश्लेषक, शिक्षाविद और निट्टे (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के उपाध्यक्ष संदीप शास्त्री कर रहे हैं। इस समिति को 11वीं कक्षा की किताब को 30 नवंबर, 2026 तक और 12वीं कक्षा की किताब को 30 जुलाई, 2027 तक अंतिम रूप देने का कड़ा लक्ष्य दिया गया है।
एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि टीम के पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य पाठ्यपुस्तकों की तैयारी को और अधिक मजबूत तथा सुव्यवस्थित करना है। अंतिम पठन-पाठन सामग्री को अंततः एनसीईआरटी द्वारा ही अनुमोदित, प्रकाशित और वितरित किया जाएगा।
बीती 14 अगस्त की अधिसूचना के अनुसार, यह टीम ‘नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन, 2023’ के दिशा-निर्देशों के तहत काम करेगी। साथ ही इसे सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण शिक्षा और शिक्षाशास्त्र से जुड़े विशेषज्ञ समूहों से मार्गदर्शन भी लेना होगा। इन किताबों को सांस्कृतिक जुड़ाव, समावेशीकरण, शैक्षिक प्रौद्योगिकी, मूल्यांकन और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों के आधार पर बारीकी से परखा जाएगा, ताकि छात्रों को प्रामाणिक और समग्र शिक्षा मिल सके।
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