
बिहार: नालंदा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ परसा मिडिल स्कूल में मंगलवार 18 अगस्त, को मिड-डे मील खाने के बाद कम से कम 34 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इनमें 17 लड़के और 17 लड़कियां शामिल हैं। आरोप है कि बच्चों के खाने में गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया गया था।
बीमार पड़ने वाले सभी बच्चों को तुरंत नालंदा के बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह रही कि बुधवार को सभी बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस गंभीर लापरवाही को लेकर पुलिस ने एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर ली है।
नालंदा के सिविल सर्जन जय प्रकाश सिंह ने इस घटना को फूड पॉइजनिंग का मामला बताया है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि सभी बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति अब पूरी तरह से स्थिर है और वे जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।
नूरसराय थाने के एसएचओ (SHO) अरविन कुमार ने बताया कि स्कूल के हेडमास्टर की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 286 (जहरीले पदार्थ से जुड़ा लापरवाही भरा आचरण), 109 (1) (हत्या का प्रयास) और 123 (अपराध के इरादे से जहर देकर चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज की गई है।
नूरसराय थाना क्षेत्र के इस स्कूल में खाना खाने के तुरंत बाद बच्चों को गले में जलन और पेट में तेज दर्द की शिकायत होने लगी थी। इससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में भर्ती बच्चों में से एक, प्रीति कुमारी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्हें चावल के साथ आलू-सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी। उसने बताया कि खाना खाने के बाद उसमें से डिटर्जेंट जैसी महक आ रही थी। प्रीति के अनुसार, खाने में नमक की जगह सर्फ का इस्तेमाल किया गया था, जिससे पेट में दर्द शुरू हुआ और कई छात्र बेहोश भी हो गए।
एक अन्य बीमार छात्रा चांदनी कुमारी के पिता राजवीर कुमार ने अस्पताल का खौफनाक मंजर बयां किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें बच्चों के बीमार होने की खबर मिली और वे अस्पताल पहुंचे, तो वहां कई बच्चे उल्टियां कर रहे थे और कुछ तो बेहोश होकर गिर पड़े थे।
इस गंभीर घटना के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) हेमचंद्र ने स्कूल के हेडमास्टर शैलेंद्र कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, स्कूल की रसोई में काम करने वाले तीनों रसोइयों को भी नौकरी से निकाल दिया गया है।
हेडमास्टर शैलेंद्र कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा था कि खाने में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर गलती से परोसा गया था। उनका कहना था कि कुछ बच्चों ने और नमक मांगा था, जिसके बाद एक महिला रसोइया ने भूलवश डिटर्जेंट दे दिया। उन्होंने यह भी बताया कि मिड-डे मील एक एनजीओ द्वारा सप्लाई किया जाता है।
हालांकि, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बच्चों और उनके परिवारों के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें खाने में डिटर्जेंट मिलने की बात कही गई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच चल रही है।
डीईओ हेमचंद्र ने जोर देकर कहा कि बच्चों के बीमार होने की असली वजह अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस स्कूल में मिड-डे मील की आपूर्ति नगरनौसा के रामघाट स्थित एकता शक्ति फाउंडेशन के केंद्रीकृत किचन से होती है। यह किचन रोजाना 206 स्कूलों के करीब 23,000 बच्चों को भोजन मुहैया कराता है। इनमें चंडी ब्लॉक के 123, नगरनौसा के 76 और नूरसराय के 7 स्कूल शामिल हैं।
एकता शक्ति फाउंडेशन के एक अधिकारी ने डिटर्जेंट वाले दावे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खाने में सर्फ मिलने की शिकायत केवल एक ही स्कूल से क्यों आई। उनका तर्क था कि अगर सच में खाने में डिटर्जेंट मिलाया गया होता, तो अन्य स्कूलों के बच्चे बीमार क्यों नहीं पड़े।
इस घटना के विरोध में बुधवार को गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल परिसर में जमकर प्रदर्शन किया। डर के मारे बच्चों ने भी दोबारा मिड-डे मील खाने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि वे फिर से बीमार नहीं पड़ना चाहते हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए नालंदा के विधायक और ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने अस्पताल जाकर बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और अधिकारियों को सर्वोत्तम इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मंत्री श्रवण कुमार ने आश्वासन दिया कि मिड-डे मील परोसने में कहां चूक हुई, इसका पता लगाने के लिए गहन जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अभिभावकों से न घबराने की अपील की है। इसके साथ ही मंत्री ने अधिकारियों को जिले भर के स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था का औचक निरीक्षण करने और रसोइयों को साफ-सफाई व स्वच्छता का प्रशिक्षण देने के भी सख्त निर्देश दिए हैं।
बिहार में मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों के बीमार पड़ने का यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कम से कम छह घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल ही में 7 मई को सहरसा जिले के बलुआहा गांव के एक सरकारी स्कूल में 150 छात्र बीमार हो गए थे। तब यह आरोप सामने आया था कि बच्चों की पतली दाल में सांप का एक मरा हुआ बच्चा मिला था।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।
यहां सब्सक्राइब करें