Rajasthan: शिक्षकों ने मांगी गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति; ‘हमें पढ़ाने दो’ आंदोलन की शुरुआत

18 मई को शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में विशाल रैली, 20 अप्रैल को कलेक्टर को ज्ञापन देने का निर्णय
शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहता है लेकिन उसे जनगणना, पशुगणना, विभिन्न सर्वेक्षणों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है और इन्हीं कार्यों के चलते सरकारी स्कूलों का नामांकन तेजी से गिरा है।
शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहता है लेकिन उसे जनगणना, पशुगणना, विभिन्न सर्वेक्षणों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है और इन्हीं कार्यों के चलते सरकारी स्कूलों का नामांकन तेजी से गिरा है।एआई निर्मित सांकेतिक चित्र
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बांसवाड़ा: राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम घाटोल इकाई) ने ‘हमें पढ़ाने दो’ आंदोलन की शुरुआत करते हुए सरकार से गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, ग्रीष्मावकाश में संशोधन और स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। यह निर्णय उपखण्ड मुख्यालय पर प्रदेश मंत्री नानूराम डामोर एवं जिला मंत्री महिपाल भुता की अगुवाई में हुई बैठक में लिया गया।

बैठक में शामिल वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान की भीषण गर्मी और भौगोलिक परिस्थितियों में महिला कर्मियों को जनगणना में ड्यूटी देना पूर्णतया अव्यावहारिक और न्यायोचित नहीं है।

शिक्षक संगठन ने सरकार से मांगें पूरी न करने पर आंदोलन के आगामी चरणों की घोषणा की:

20 अप्रैल: यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो जिला स्तर पर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।

ग्रीष्मावकाश में संशोधन की मांग: सरकार से अव्यावहारिक निर्णय वापस लेने और शिविरा पंचांग में तुरंत संशोधन कर 16 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश रखने की मांग की गई। साथ ही, संस्था प्रधान के अधिकार को पहले की तरह 2 दिन करने की मांग भी की गई।

18 मई – विशाल शिक्षक रैली: सरकार ने मांगें पूरी नहीं कीं, तो शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में विरोध प्रदर्शन और विशाल शिक्षक रैली निकाली जाएगी। सभी शिक्षक लामबंद होकर बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।

अध्ययनों और शिक्षक संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, विशेष रूप से जनजाति बहुल क्षेत्रों में गिरता स्कूल नामांकन यह दर्शाता है कि आदिवासी बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे हैं, क्योंकि सरकारी स्कूल ही गरीब परिवारों के लिए शिक्षा का एकमात्र स्रोत हैं जबकि निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन करने में ये परिवार असमर्थ हैं, और शिक्षकों का गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझा रहना इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

वरिष्ठ नेता श्रीपाल जैन ने कहा, “शिक्षकों का सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना राष्ट्रवादी पार्टी और सरकार के लिए शर्म की बात है।”

प्रदेश मंत्री नानूराम डामोर ने राजस्थान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहता है। उसे जनगणना, पशुगणना, विभिन्न सर्वेक्षणों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाना आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं कार्यों के चलते सरकारी स्कूलों का नामांकन तेजी से गिरा है। देवीलाल खराड़ी ने कहा कि राज्य सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। चुनाव के समय घोषणा पत्र में स्थानांतरण नीति लागू करने का वादा किया गया था, लेकिन वर्तमान में नीति की जगह ‘डिजायर पद्धति’ अपनाई जा रही है और शिक्षकों को बंधुआ मजदूर बना दिया गया है।

उप शाखा अध्यक्ष बदन लाल डामोर ने कहा कि जल्द ही ‘हमें पढ़ाने दो’ आंदोलन गांव-गांव पहुंचेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि जनगणना और बीएलओ के कार्य बेरोजगार युवाओं को भत्ता या मानदेय के आधार पर दे सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रीष्मकालीन अवकाश में एकल महिला शिक्षकों की ड्यूटी निरस्त नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहता है लेकिन उसे जनगणना, पशुगणना, विभिन्न सर्वेक्षणों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है और इन्हीं कार्यों के चलते सरकारी स्कूलों का नामांकन तेजी से गिरा है।
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शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहता है लेकिन उसे जनगणना, पशुगणना, विभिन्न सर्वेक्षणों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है और इन्हीं कार्यों के चलते सरकारी स्कूलों का नामांकन तेजी से गिरा है।
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