
नई दिल्ली: झारखंड के गढ़वा जिले में स्कूल प्रशासन की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां खरौंधी प्रखंड में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में छत पर रखे ओवरहेड प्लास्टिक टैंक का पानी पीने से 100 से अधिक छात्राएं अचानक बीमार पड़ गईं। इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए हॉस्टल की वार्डन, एक पूर्णकालिक शिक्षिका और एक रसोइए को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह पूरी घटना शुक्रवार की है। इस आवासीय विद्यालय में कुल 300 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, पानी पीने के कुछ ही देर बाद करीब 100 छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद अफरा-तफरी के बीच उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया।
शनिवार को गढ़वा के उपायुक्त (डीसी) ने जानकारी दी कि छह छात्राओं को अभी भी चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है और उनकी स्थिति पूरी तरह से स्थिर है। बाकी सभी छात्राओं को प्राथमिक इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पानी पीने के बाद छात्राओं ने मुख्य रूप से पेट दर्द, उल्टी, चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत की थी। घटना के बाद खरौंधी प्रखंड प्रमुख आभा रानी ने स्कूल और अस्पताल का दौरा किया और प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि छात्राएं काफी समय से खराब भोजन और पीने के पानी की उचित व्यवस्था न होने की लगातार शिकायत कर रही थीं। दिन की भीषण गर्मी के बीच जब उन्हें साफ पानी नहीं मिला, तो कई लड़कियां मजबूरी में छत पर रखे प्लास्टिक टैंक का गर्म पानी पीने को विवश हो गईं।
प्रखंड प्रमुख ने यह भी दावा किया कि मुहर्रम के त्योहार के कारण पूरे दिन बिजली की आपूर्ति ठप थी, जिस वजह से छात्राओं को पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो सका। जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि हॉस्टल में आरओ (RO) सिस्टम तो मौजूद था, लेकिन उसे केवल वार्डन के कमरे में लगाया गया था और छात्राओं को इसका इस्तेमाल करने की सख्त मनाही थी। इसके अलावा, स्कूल परिसर और रसोईघर में भारी गंदगी पाई गई और बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन भी नहीं दिया जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जिला स्तरीय जांच बैठाई गई, जिसमें प्रथम दृष्टया स्कूल प्रबंधन की भारी लापरवाही की पुष्टि हुई है। गढ़वा के उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने बताया कि शुरुआती जांच के आधार पर वार्डन, शिक्षिका और रसोइए को उनके कर्तव्यों से मुक्त करने का निर्देश दे दिया गया है। इसके साथ ही, स्कूल में मौजूद खाद्य सामग्री और पानी दोनों के सैंपल आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।
इस घोर लापरवाही को लेकर प्रशासन ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को भी आड़े हाथों लिया है। डीसी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनका वेतन अगले आदेश तक के लिए रोक दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से जवाब मांगा है कि जब स्कूल का नियमित निरीक्षण किया जाता है, तो आवासीय विद्यालय में चल रही इन भारी कमियों और अव्यवस्थाओं को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा जा सका।
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