
नई दिल्ली- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम 2005 के तहत दायर एक आवेदन में फैकल्टी पदों की श्रेणी-वार (जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी) जानकारी देने से बचने की कोशिश की है। आरटीआई आवेदक किरण कुमार गौड़ ने संस्थान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर इन श्रेणियों में कुल आवंटित, भरे गए तथा रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी मांगी थी, लेकिन फैकल्टी रिक्रूटमेंट सेल ने केवल कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले भरे गए और रिक्त पदों का सामान्य आंकड़ा देकर जवाब टाल दिया।
संस्थान ने 9 मार्च को जारी आरटीआई जवाब में स्पष्ट किया कि 31 दिसंबर 2025 तक कुल 1093 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 676 पद भरे हुए हैं तथा 417 पद रिक्त हैं। जवाब में कहा गया है कि आईआईटी दिल्ली फ्लेक्सी कैडर सिस्टम अपनाता है, इसलिए विभागवार या श्रेणी-वार रिक्तियों की अलग जानकारी उपलब्ध नहीं है। भरे गए पदों की कुल संख्या भी सिर्फ 676 बताई गई, लेकिन जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस या पीडब्ल्यूडी श्रेणियों में कितने पद भरे हैं या कितने रिक्त हैं, इसकी कोई ब्रेकडाउन नहीं दी गई।
इस जवाब को स्पष्ट रूप से टालमटोल वाला बताते हुए ऑल इंडिया ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईओबीसीएसए) ने कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि प्रश्न बिल्कुल स्पष्ट थे, लेकिन जवाब अस्पष्ट और अधूरा है। एआईओबीसीएसए ने इसे ब्राह्मणवादी रणनीति करार देते हुए सवाल उठाया कि आंकड़ों से कौन डर रहा है? संगठन ने मांग की है कि आईआईटी दिल्ली तुरंत स्पष्ट जानकारी दे कि संस्थान में कितने एससी, एसटी, ओबीसी तथा अन्य आरक्षित श्रेणियों के फैकल्टी सदस्य हैं।
यह मामला आरक्षण नीति के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है, क्योंकि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों की प्रतिनिधित्व न्यूनतम स्तर पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रेणी-वार आंकड़े छिपाना पारदर्शिता के खिलाफ है और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
संविधान द्वारा अपेक्षित प्रतिनिधित्व (ओबीसी-27%, एससी-15%, एसटी-7.5%) की तुलना में आईआईटी की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
आईआईटी पालाक्काड: कुल 161 फैकल्टी में जनरल के 121 (75.15%), ओबीसी 24 (14.9%), एससी 15 (9.31%) और एसटी सिर्फ 1 (0.62%)। प्रोफेसर पद पर एक भी एससी या एसटी नहीं है।
आईआईटी बीएचयू (वाराणसी): कुल 344 फैकल्टी में जनरल 79.36%, ओबीसी 11.63%, एससी 7.85% और एसटी मात्र 1.16%। 608 में से 260 पद रिक्त हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि किस श्रेणी के पद खाली हैं।
आईआईटी खड़गपुर: 775 फैकल्टी में जनरल का प्रतिनिधित्व 91.22% है, जबकि ओबीसी महज 5.55%, एससी 2.71% और एसटी 0.26% है। 1600 स्वीकृत पदों में से 825 रिक्त हैं, जिनकी श्रेणी नहीं बताई गई।
आईआईटी गांधीनगर: 135 फैकल्टी में जनरल 85.93%, ओबीसी 5.93%, एससी 5.91% और एसटी 2.96%। प्रोफेसर स्तर पर ओबीसी, एससी, एसटी का प्रतिनिधित्व शून्य है।
आईआईटी रोपड़: 177 फैकल्टी में जनरल 78.53%, ओबीसी 14.69%, एससी 5.65% और एसटी 1.69%
आईआईटी पटना: यह एकमात्र आईआईटी है जिसने श्रेणीवार स्वीकृत पदों की जानकारी दी। यहां कुल 390 पदों में से 228 भरे हैं। भरे पदों में ओबीसी 38.16%, एससी 21.49% और एसटी 12.72% हैं, जो अन्य आईआईटी के मुकाबले बेहतर है।
आईआईटी रुड़की: 939 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 533 फैकल्टी कार्यरत हैं। संस्थान ने श्रेणीवार कोई डेटा नहीं दिया।
आईआईटी तिरुपति: 114 फैकल्टी में जनरल 69.30%, ओबीसी 18.42%, एससी 8.77% और एसटी 2.63%
आईआईटी मंडी: 175 फैकल्टी में जनरल 81.14%, ओबीसी 11.43%, एससी 5.71% और एसटी 1.71%। प्रोफेसर स्तर पर ओबीसी, एससी और एसटी का प्रतिनिधित्व शून्य है।
आईआईटी भुवनेश्वर: 213 फैकल्टी में जनरल 80.28%, ओबीसी 13.15%, एससी 5.63% और एसटी महज 0.46%
आईआईटी जोधपुर: 244 फैकल्टी में जनरल 79.10%, ओबीसी 13.11%, एससी 6.15% और एसटी 0.82%
आईआईटी दिल्ली: 633 फैकल्टी में जनरल 88.94%, ओबीसी 7.11%, एससी 2.68% और एसटी 1.10%। 1093 स्वीकृत पदों में से 460 रिक्त हैं।
आईआईटी गोवा: 62 फैकल्टी में जनरल 67.74%, ओबीसी 19.35%, एससी 8.06% और एसटी 1.61%
आईआईटी इंदौर: यहां भी श्रेणीवार डेटा मिला। कुल 92 फैकल्टी में जनरल 50%, ओबीसी 32.61%, एससी 15.22% और एसटी 2.17%
आईआईटी गुवाहाटी: 454 फैकल्टी में जनरल 88.11%, ओबीसी 5.07%, एससी 4.84% और एसटी 1.98%
आईआईटी हैदराबाद: 322 फैकल्टी में जनरल 74.84%, ओबीसी 15.84%, एससी 8.07% और एसटी 0.93%
आईआईटी धारवाड़: 93 फैकल्टी में जनरल 72.04%, ओबीसी 17.20%, एससी 5.38% और एसटी 3.27%
आईआईटी कानपुर: 564 फैकल्टी में जनरल 87.41%, ओबीसी 7.80%, एससी 4.26% और एसटी 0.89%। प्रोफेसर पद पर ओबीसी केवल 3, जबकि एससी और एसटी शून्य हैं।
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