उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछाते हुए एक बड़ा दांव चला है। राज्य में एक मजबूत दलित और पिछड़ा वर्ग (OBC) सोशल गठबंधन तैयार करने के मकसद से अविनाश पांडे की जगह प्रमुख दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। पदभार संभालते ही गौतम ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। 'द मूकनायक' के साथ हुई एक विशेष बातचीत में उन्होंने तमाम राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी रणनीति साझा की और सत्तारूढ़ दल पर तीखा प्रहार किया।
राजेंद्र पाल गौतम ने मौजूदा सत्ता को देश के लोकतंत्र और संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि यह सरकार लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है और पुलिस को 'हत्यारा' बना दिया गया है। गौतम के अनुसार, जिनका देश की न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है, वे केवल गरीबों, मुस्लिमों, दलितों और पिछड़ों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस अब गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक एक कैडर आधारित मजबूत संगठन बनाएगी और इस दमनकारी सत्ता को उखाड़ फेंकेगी।
क्षेत्रीय दलों के भविष्य पर एक बड़ा दावा करते हुए गौतम ने कहा कि अब क्षेत्रीय पार्टियों का दौर पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का डर दिखाकर छोटी पार्टियों को या तो खत्म कर दिया गया है या वे खुद सत्ता पक्ष के साथ मिल गई हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि मौजूदा दौर में भाजपा को अगर कोई हरा सकता है, तो वह केवल कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बहुजन समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय की हिस्सेदारी के लिए लगातार सड़क से संसद तक लड़ रहे हैं।
आगामी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में गठबंधन की स्थिति पर भी गौतम ने अपना रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया। समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन में 403 में से 200 से अधिक सीटों की मांग के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस तरह परिवार में बच्चों को बराबर का सम्मान और हिस्सा मिलता है, उसी तरह आजादी की लड़ाई लड़ने वाली कांग्रेस भी गठबंधन में बराबर की हिस्सेदारी की हकदार है।
दलित राजनीति के पुरोधा मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने के राहुल गांधी के वादे का समर्थन करते हुए गौतम ने बहुजन समाज को एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर, महात्मा गांधी और कांशीराम साहब जैसे महापुरुष किसी एक पार्टी की जागीर नहीं हैं। उनका यह बयान इस बात का सीधा संकेत है कि कांग्रेस अब बहुजन समाज पार्टी के एकाधिकार को चुनौती देते हुए दलित वोटर्स को पूरी तरह से अपने पाले में लाने की तैयारी कर चुकी है।
राज्य में दलितों पर हो रहे अत्याचारों, विशेषकर हाथरस जैसे गंभीर मामलों पर गौतम ने अपनी स्पष्ट कार्ययोजना सामने रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब केवल पीड़ित परिवारों को ढांढस नहीं बंधाएगी, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर मजबूती से कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी। स्वयं एक वकील होने के नाते उन्होंने बताया कि इसके लिए वकीलों की एक विशेष लीगल टीम तैयार की गई है, जो एट्रोसिटी और मानवाधिकार के मामलों को देखेगी और सरकार की नाक में दम कर देगी।
केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI) के संभावित दुरुपयोग और अपनी गिरफ्तारी के सवाल पर इस नए प्रभारी ने गजब की निडरता का परिचय दिया। गौतम ने बेखौफ अंदाज में कहा कि वे किसी भी जांच एजेंसी से या झूठे मुकदमों से नहीं डरते। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और डॉ. अंबेडकर के महान बलिदानों को याद करते हुए कहा कि वे जेल जाने या यहां तक कि अपनी जान देने के लिए भी तैयार हैं। उनका यह स्पष्ट उद्घोष, "ना डरेंगे, ना झुकेंगे, ना बिकेंगे, हम लड़ेंगे और जीतेंगे", उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नए और बेहद आक्रामक तेवर को प्रमाणित करता है।
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