
उत्तर प्रदेश: मैनपुरी में एक विशेष पोक्सो (POCSO) अदालत ने गुरुवार को एक 26 वर्षीय युवक को सख्त सजा सुनाई है। साल 2023 में आठ साल की एक मासूम दलित बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में दोषी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी गई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
पुलिस की जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने पीड़ित बच्ची को कुछ तस्वीरें दिखाई थीं। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर मासूम ने अपने साथ दरिंदगी करने वाले को सटीक रूप से पहचान लिया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
अतिरिक्त जिला सरकारी वकील शैलेंद्री राजपूत के अनुसार, पीड़िता के पिता ने मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि उनके ही इलाके का एक व्यक्ति 8 जुलाई 2023 को दोपहर करीब 2 बजे उनकी बेटी को एक नवनिर्मित खाली मकान में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ हैवानियत की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने काफी चालाकी दिखाई थी। उसने अपनी पहचान छिपाने और हुलिया बदलने के मकसद से अपनी पूरी दाढ़ी और मूंछ मुंडवा ली थी। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी से वह बच नहीं सका और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 376-एबी (12 साल से कम उम्र के बच्चे से बलात्कार) के साथ-साथ पोक्सो और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) जाहेंद्र पाल सिंह की अदालत में हुई। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही और पेश किए गए अन्य तमाम सबूतों पर गंभीरता से गौर करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने CrPC 357 के तहत पीड़िता की मां के लिए मुआवजे की सिफारिश करते हुए आदेश दिया कि दोषी अपने जीवन की अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहेगा।
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