
हनमकोंडा: तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग (TSHRC) ने हनमकोंडा जिले की एक कॉलोनी में रहने वाले दलित परिवारों के बिजली और पानी के कनेक्शन तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह कड़ा कदम उन 300 से अधिक निवासियों की शिकायत के बाद उठाया है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके घरों के कनेक्शन गैरकानूनी तरीके से काट दिए गए हैं और उन्हें जातिगत भेदभाव का शिकार होना पड़ रहा है।
यह विवाद हनमकोंडा के चेराबांडा राजू नगर का है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पड़ोस की सोसायटियों के लोगों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर उन्हें घर खाली करने (बेदखली) के नोटिस थमा दिए गए।
हालांकि, इस इलाके के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने वाले ग्रेटर वारंगल नगर निगम (GWMC) के अधिकारियों ने जातिगत भेदभाव के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन का तर्क है कि बिजली-पानी की यह कटौती पूरी तरह से कानूनी है क्योंकि लंबे समय से बकाया बिलों का भुगतान नहीं किया गया था। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि जिन लोगों ने कथित तौर पर जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है, उन्हें ही बेदखली के नोटिस जारी किए गए हैं।
निवासियों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए, जस्टिस शमीम अख्तर की अध्यक्षता वाले तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में अंतरिम सिफारिशें जारी की हैं।
आयोग ने अपने निर्देश में कहा, "शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि घर के वैध पट्टे (house-site pattas) होने के बावजूद उनके पीने के पानी का कनेक्शन काटा गया, तोड़फोड़ की धमकी दी गई और जातिगत भेदभाव किया गया। यह समानता और सम्मान के साथ जीवन जीने के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।"
इसे देखते हुए आयोग ने जिला कलेक्टर, ग्रेटर वारंगल नगर निगम और टीजी-एनपीडीसीएल (TG-NPDCL) को तुरंत पानी और बिजली आपूर्ति बहाल करने तथा जबरन बेदखल करने जैसी कार्रवाई से बचने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा, TSHRC ने, वारंगल के पुलिस आयुक्त (CP) को जातिगत धमकियों को रोकने और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी है। तेलंगाना के मुख्य सचिव और डीजीपी (DGP) को इस पूरे मामले में निर्देशों के पालन की निगरानी करने को कहा है।
संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर ली गई है और मामले की अगली अनुपालन समीक्षा (Compliance review) के लिए 9 मार्च, 2026 की तारीख तय की गई है।
इस मुद्दे पर अब सियासत भी गरमा गई है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के एमएलसी डॉ. दासोजू श्रवण ने ग्रेटर वारंगल नगर निगम पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन उन दलित परिवारों के घर तोड़ने की कोशिश कर रहा है जो पिछले 60-70 वर्षों से चेराबांडा राजू नगर में बसे हुए हैं।
कांग्रेस सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए डॉ. श्रवण ने कहा, "मौजूदा सरकार हाशिए पर रहने वाले समुदायों को निशाना बना रही है। पहले उन्होंने प्रस्तावित फार्मा सिटी के लिए जमीन छीनने के मकसद से लगाचर्ला (Lagacharla) में आदिवासियों पर हमला किया, जिसे स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर नाकाम कर दिया। अब वे विकास, प्रोजेक्ट्स और मॉडल सड़कों के नाम पर वारंगल में दलितों के घरों को जबरन तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वह भी बिना किसी पूर्व नोटिस या उचित कानूनी प्रक्रिया के। यह 'बुलडोजर राज' का जीता-जागता उदाहरण है।"
डॉ. श्रवण ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पीने के पानी की कमी के कारण छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या यही जनता का शासन है? क्या यही 'जय संविधान' है? क्या यही 'जय भीम' है?"
उन्होंने जोर देकर कहा कि बस्तियां खाली कराने के लिए पानी बंद कर देना लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है।
इन सब के बीच, ग्रेटर वारंगल नगर निगम के एक अधिकारी ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा, "जिन घरों पर कार्रवाई की गई है, उन्होंने कई वर्षों से अपने बकाये का निपटारा नहीं किया है। उन्हें कई बार नोटिस देकर सूचित किया जा चुका है कि यह क्षेत्र सड़क चौड़ीकरण आदि के लिए प्रस्तावित है, इसलिए उन्हें जमीन के मालिकाना हक के कानूनी दस्तावेज पेश करने होंगे। लेकिन उन्होंने इसका विरोध ही किया है। इस पूरी कार्रवाई में कोई जातिगत भेदभाव नहीं है; हमने सिर्फ उन लोगों को नोटिस दिए हैं जिन्होंने अवैध रूप से जमीन पर कब्जा किया है।"
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