राजस्थान: दलित दूल्हों को सुरक्षा देगी पुलिस, आखिर क्यों जारी हुआ ऐसा ऑर्डर?

आपरेशन समानता के तहत पुलिस महकमे ने शुरू की तैयारी, दलित उत्पीड़न संभावित जिलों में विशेष निगरानी।
मई 2015 में, मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के नेग्रुन गांव में ऊंची जाति के हमले से बचने के लिए एक दलित दूल्हे को शादी में हेलमेट पहनना पड़ा।
मई 2015 में, मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के नेग्रुन गांव में ऊंची जाति के हमले से बचने के लिए एक दलित दूल्हे को शादी में हेलमेट पहनना पड़ा।File pic- IndiaTV

जयपुर। मलमास खत्म हो गया है. इसके साथ ही देशभर में शादी ब्याह का सिलसिला शुरू हो गया है. शादियों का सीजन शुरू होते ही राजस्थान पुलिस ने एक खास ऑर्डर जारी किया है. पुलिस को ऑर्डर दिया गया है कि वो पता करें कि उनके जिले में कहां-कहां दलितों की शादी हो रही है? इन शादियों की पहरेदारी करने की जिम्मेदारी पुलिस को दी गई है.

उल्लेखनीय है ऑपरेशन समानता के तहत राज्य पुलिस मुख्यालय ने एक सर्कुलर जारी कर सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को अपने क्षेत्रों में दलितों की बिंदौली को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी दी है.

दलितों की शादी पर पुलिस को खास वजह से नजर रखने का ऑर्डर दिया गया है. दरअसल पिछले दस साल में राजस्थान के अलग-अलग जगहों से दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारने के 138 मामले सामने आ चुके हैं. शादी में जब कोई दलित दूल्हा घोड़ी चढ़ता है तो ऊंची जाति के लोग उन्हें घोड़ी से उतार देते हैं. इस घटना का दोहराव इस बार ना हो, इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने ऑर्डर जारी किया है.

राजस्थान के राजसमंद जिले के अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक शिवलाल बैरवा ने आदेश को लेकर कहा, "यह एक रूटीन प्रक्रिया है. इसके तहत हम दलित उत्पीड़न संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां समझाइश का काम करते है."

बैरवा ने आगे कहा, "दक्षिणी राजस्थान में ऐसी घटनाएं कम ही देखने को मिलती है. इस तरीके के सर्वाधिक मामले पूर्वी राजस्थान के दौसा, भरतपुर, धौलपुर आदि जिलों से सामने आए है. इन जिलों में विशेष निगरानी की जा रही है."

राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधिकारीयों को आदेश दिया है कि वो पता करें कि इस खरमास के बाद कितने दलित परिवार के घर शादियां हो रही है? इसके साथ ही कांस्टेबल क्षेत्र के पंच, सरपंच, पार्षद, पुलिस मित्र से बातचीत कर इन शादियों पर खास नजर रखे. शादी में ये ध्यान रखा जाए कि किसी दूल्हे को दलित होने की वजह से घोड़ी से ना उतारा जाए.

होगी तुरंत कार्रवाई

ऑर्डर में कहा गया है कि अगर किसी जगह पर दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारे जाने का मामला सामने आएगा तो वहां तुरंत एक्शन लिया जाएगा. तुरंत दोषियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा और उसपर कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि पिछले दस साल में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं. अब खरमास खत्म होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इसपर सख्ती बरतते हुए पहले ही पुलिस को दलितों की शादी में निगरानी की जिम्मेदारी दे दी है।

क्यों चर्चा में है ऑपरेशन समानता?

5 अप्रैल, 2022 को राजस्थान के राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा ने बूंदी जिले में जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक में ‘ऑपरेशन समानता’ की तर्ज पर अनुसूचित जाति वर्ग के अन्य मामलों में अभियान स्तर पर कार्य किये जाने का निर्देश दिया था।

अभियान के मुख्य बिंदु

-24 जनवरी से शुरू हुआ ऑपरेशन समानता बूंदी पुलिस का नवाचार है, जिसे अब पूरे प्रदेश में क्रियान्वित किया जा रहा है।

-इसके तहत थानास्तर पर बीट कॉन्स्टेबलों को अपने क्षेत्र में ऐसे गाँवों को चिह्नित करना होता है, जहाँ अब तक दलित दूल्हे घोड़ी पर नहीं बैठे हों या घोड़ी पर बैठने पर अप्रिय घटना हुई हो या उन्हें घोड़ी से उतार दिया गया हो।

-चिह्नित करने के बाद ऐसे गाँवों में समानता समितियाँ बनाई जाती हैं ताकि घोड़ी पर दलित समाज के दूल्हे, दुल्हनों की बिंदौरियाँ बिना किसी विवाद और अप्रिय घटना के निकाली जा सकें।

-गौरतलब है कि संविधान के भाग 3 के तहत प्रदत्त समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) के बावजूद एससी/एसटी समुदायों के साथ अश्पृश्यता सहित विभिन्न प्रकार के भेदभाव किये जाते हैं। ऐसे में राजस्थान पुलिस का यह कदम अत्यंत सराहनीय है।

मई 2015 में, मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के नेग्रुन गांव में ऊंची जाति के हमले से बचने के लिए एक दलित दूल्हे को शादी में हेलमेट पहनना पड़ा।
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