दलित महिलाओं पर जातिसूचक टिप्पणी मामले में NCSC का मेरठ DM-SSP को नोटिस, 15 दिन में रिपोर्ट तलब

शिकायत में बताया गया कि 6 अगस्त को मोहकमपुर एवं शिवपुरम क्षेत्र के चार युवकों द्वारा हाईवे पर बाइक से स्टंट करते हुए अनुसूचित जाति समाज की महिलाओं के खिलाफ जातिसूचक शब्दों एवं आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
दलित समाज की महिलाओं के खिलाफ जातिसूचक एवं अश्लील/आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने संज्ञान लिया है।
दलित समाज की महिलाओं के खिलाफ जातिसूचक एवं अश्लील/आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने संज्ञान लिया है।
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मेरठ- थाना टीपी नगर क्षेत्र में अनुसूचित जाति समाज की महिलाओं के खिलाफ जातिसूचक एवं अश्लील/आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए मेरठ के जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

यह शिकायत मयंक वर्मा, जिला युवा अध्यक्ष, एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि 6 अगस्त को मोहकमपुर एवं शिवपुरम क्षेत्र के चार युवकों द्वारा हाईवे पर बाइक से स्टंट करते हुए अनुसूचित जाति समाज की महिलाओं के खिलाफ जातिसूचक शब्दों एवं आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का भी उल्लेख किया गया।

शिकायत के अनुसार, थाना टीपी नगर में FIR संख्या 0423/2026 दर्ज की गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a), 352 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 लगाई गईं, जबकि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएं नहीं लगाई गईं।

शिकायतकर्ता ने आयोग को यह भी बताया कि थाना प्रभारी की रविकांत से बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जिसमें मामले में एससी/एसटी एक्ट नहीं लगाए जाने की बात कही गई है। शिकायत में वायरल वीडियो एवं कॉल रिकॉर्डिंग को जांच में शामिल करने तथा थाना प्रभारी एवं विवेचक की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई थी।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने नोटिस के माध्यम से मेरठ के जिलाधिकारी एवं एसएसपी से घटना की तारीख, अपराध संख्या, पीड़ित एवं अभियुक्तों का विवरण, एफआईआर में लगाई गई धाराएं, गिरफ्तारी की स्थिति, आरोप-पत्र/अंतिम रिपोर्ट तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण नियमों के तहत की गई कार्रवाई सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने यह भी कहा है कि निर्धारित समय में रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जा सकता है।

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