
भोपाल। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के चंदला थाना परिसर में एक 22 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। नाहरपुर निवासी राम विशाल अहिरवार ने कथित तौर पर अपनी पत्नी के सामने थाने में ही जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर पुलिस उसे अस्पताल ले जाने के लिए रवाना हुई, लेकिन रास्ते में पत्नी की गोद में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली, थानों में सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए छतरपुर के पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चंदला थाना प्रभारी संदीप दीक्षित को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, राम विशाल अहिरवार का अपनी पत्नी लीला से लंबे समय से विवाद चल रहा था। दो वर्ष पहले बिथौरा गांव में दोनों की शादी हुई थी और उनका तीन महीने का एक बच्चा भी है। पारिवारिक कलह के चलते पत्नी मायके चली गई थी, जिसके बाद सुलह कराने के उद्देश्य से पुलिस ने दोनों पक्षों को चंदला थाने बुलाया था। शुक्रवार को दोनों परिवार थाने पहुंचे और बातचीत के दौरान अचानक राम विशाल की तबीयत बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उसे उल्टियां शुरू हो गईं और पुलिस की तलाशी में उसकी जेब से किसी दवा जैसी वस्तु मिली, जिसे जहर माना जा रहा है। हालांकि, उसने जहर कब और कैसे खाया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
घटना के बाद पुलिस ने युवक को तत्काल अस्पताल ले जाने की कोशिश की। पहले चंदला अस्पताल और फिर जिला अस्पताल छतरपुर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पत्नी लीला के अनुसार, रास्ते भर राम विशाल पानी मांगता रहा, लेकिन उसे पानी नहीं दिया गया। उसने बताया कि पति उसकी गोद में लेटे थे और लगातार तड़प रहे थे। इस बीच उसे खुद भी चक्कर आने लगे और बाद की स्थिति उसे याद नहीं है। इस बयान ने पुलिस की संवेदनशीलता और प्राथमिक चिकित्सा के सवाल को और गहरा कर दिया है।
पुलिस पर पीटने के आरोप
मृतक की मां मुलिया अहिरवार ने इस पूरे मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि थाने के अंदर उनके बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने पट्टे से उसे पीटा और थाने से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। जब उन्होंने बेटे को बचाने की कोशिश की, तो उन्हें वहां से भगा दिया गया। मां का आरोप है कि पुलिस ने ही उनके बेटे को पीट-पीटकर मार डाला और अब जहर खाने की कहानी बनाकर सच्चाई छिपाई जा रही है।
मां ने यह भी कहा कि अगर समय रहते बेटे को पानी दिया जाता और उल्टी करवाई जाती, तो उसकी जान बच सकती थी। इस पर लवकुशनगर के एसडीओपी नवीन दुबे ने परिजनों को समझाते हुए कहा कि जहर के मामलों में पानी देना चिकित्सकीय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता, इसलिए ऐसा नहीं किया गया। हालांकि, इस तर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या मौके पर सही मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया या नहीं।
पत्नी ने कहा,- "विशाल को शराब की लत थी"
पत्नी लीला ने भी अपने बयान में पति के व्यवहार को लेकर कई बातें कहीं। उसने बताया कि राम विशाल शराब के नशे में अक्सर मारपीट करता था और परिवार की जमीन-जायदाद भी बेच चुका था। इसी कारण वह मायके चली गई थी और पिछले दो महीने से दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही थी। पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर वह सुलह के लिए थाने पहुंची थी, लेकिन वहां यह दुखद घटना घट गई। लीला ने स्पष्ट कहा कि उसे नहीं पता कि उसके पति ने जहर कब खाया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग हरकत में आ गया है। एसपी अगम जैन ने प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया है और मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, एएसपी आदित्य पटले, एसडीओपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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