
उत्तर प्रदेश: मेरठ के कमिश्नरी पार्क में अनशन पर बैठे दलित वकील रवि गौतम को पुलिस ने शुक्रवार तड़के धरना स्थल से हटा दिया। रवि ने गुरुवार को ही अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी। वह आठ जुलाई को हुई हिंसा के मामले में पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय को बर्खास्त करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने इस कार्रवाई के पीछे वकील की बिगड़ती सेहत का हवाला दिया है।
रवि गौतम पिछले 20 अगस्त से इसी पार्क में धरने पर बैठे थे। उनका आरोप है कि पूर्व एसएसपी पांडेय ने एक पुलिस वैन के अंदर उनके साथ बुरी तरह मारपीट की थी। हालांकि, पुलिस द्वारा धरना स्थल से हटाए जाने के बाद गौतम का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वह दावा करते नजर आ रहे हैं कि उनकी तबीयत बिल्कुल ठीक थी। उनका यह बयान पुलिस के खराब स्वास्थ्य वाले दावे पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करता है।
इस पूरी कार्रवाई को लेकर सिविल लाइंस के सीओ विश्व ज्योति राय ने बताया कि रवि गौतम की बाकायदा मेडिकल जांच कराई गई थी। रिपोर्ट में उनके स्वास्थ्य में काफी गिरावट देखने को मिली थी। इसके बाद तय मानकों (एसओपी) का पालन करते हुए उन्हें बेहतर देखभाल के लिए गाजियाबाद के एक उच्च चिकित्सा केंद्र में भेज दिया गया। उधर, शुक्रवार सुबह तक पुलिस प्रशासन ने धरना स्थल पर लगे टेंट को भी पूरी तरह से हटा दिया।
इससे पहले गुरुवार दोपहर जब गौतम ने अपनी भूख हड़ताल की घोषणा की थी, तो भारतीय किसान यूनियन (अंबेडकर गुट) के कई कार्यकर्ता एकजुटता दिखाते हुए कमिश्नरी पार्क पहुंच गए थे। अपने अनशन के दौरान गौतम ने सरकार और प्रशासन पर उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने भाजपा से जुड़े दलित नेताओं से अपील की कि वे समुदाय को प्रभावित करने वाले इन अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी आवाज बुलंद करें।
यह पूरा विवाद मई महीने में हुई एक छात्र की मौत से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस ने छात्र की मौत के मामले में बेहद दोषपूर्ण जांच की। इसी को लेकर आठ जुलाई को दलित समुदाय का प्रदर्शन हुआ, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर एसएसपी पांडेय को पुलिस वैन के अंदर गौतम की पिटाई करते हुए देखा गया था।
इस घटना के बाद एक सपा पदाधिकारी और उनके दलित सहयोगी ने भी पुलिस की बर्बरता के गंभीर आरोप लगाए थे। मामले के तूल पकड़ने पर तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय को लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था।
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