
कोच्चि- केरल हाईकोर्ट ने दलित डेंटल छात्र आत्महत्या मामले में आरोपी डॉ. एम. कोदंडा राम की गिरफ्तारी और उसके बाद हुई रिहाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने 22 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को हिरासत से बचाने के लिए पुलिस के शीर्ष अधिकारियों की भी भूमिका हो सकती है। अदालत ने कहा कि जिस तरीके से गिरफ्तारी की गई, उससे "बड़ी साजिश" की आशंका उत्पन्न होती है।
अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया गया, लेकिन जांच अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण आरोपी को रिहा कर दिया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15ए(3) के तहत पीड़ित पक्ष को प्रत्येक न्यायिक कार्यवाही में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। पीड़ित पक्ष द्वारा दायर याचिकाओं में जांच अधिकारी पर गिरफ्तारी की अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि डीएसपी पद पर कार्यरत जांच अधिकारी को यह जानकारी न हो कि गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत में पेश करने से पहले उसे गिरफ्तारी के आधार बताना कानूनन आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने जांच दल बदलकर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी। अदालत ने कहा कि यह तथ्य भी उसके संदेह को और मजबूत करता है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तार करने वाले जांच अधिकारी को 24 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उन्हें आरोपी को विशेष अदालत में पेश करते समय प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां साथ लाने तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुरूप गिरफ्तारी से संबंधित सभी वैधानिक औपचारिकताओं के पालन के बारे में शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया गया है। साथ ही, जांच की निगरानी करने वाले क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक को भी उसी दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने थलास्सेरी स्थित विशेष अदालत के न्यायाधीश को भी निर्देश दिया है कि आरोपी को पेश किए जाने के दिन जांच अधिकारी द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज, उस दिन पारित आदेश की प्रति तथा विस्तृत रिपोर्ट 24 जुलाई तक हाईकोर्ट को भेजी जाए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया जाए कि क्या Asokan K.A. बनाम State of Kerala [2026 (2) KHC 521] मामले में हाईकोर्ट द्वारा जारी उन निर्देशों का पालन किया गया था, जिनके अनुसार मजिस्ट्रेट या विशेष न्यायाधीश को रिमांड पर विचार करने से पहले यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि जांच अधिकारी ने गिरफ्तारी संबंधी सभी वैधानिक औपचारिकताओं का पालन किया है। विशेष न्यायाधीश को यह भी बताने का निर्देश दिया गया है कि क्या उनके आदेश में पुलिस को आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करने संबंधी कोई निर्देश या शर्त दर्ज की गई थी।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP), क्राइम ब्रांच के स्तर से भी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश लोक अभियोजक को दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की गई है, जब जांच अधिकारी और क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
इस मामले में सुनवाई की जानकारी मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
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