कर्नाटक: " बस और नहीं सहेंगे भेद-भाव! " बेंगलुरु में 500 दलित परिवार अपनाएंगे बौद्ध धर्म, यूँ बदल जाएगी जिन्दगी...

अनेकल तालुका में 2 जून को स्वैच्छिक धर्मांतरण करेंगे 3000 लोग, बाबा साहेब के बताये राह पर चलेंगे
वालंटियर्स घर घर संपर्क कर पत्रक का वितरण कर रहे हैं
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अनेकल : बैंगलोर जिले के अनेकल में 2 जून को करीब 500 दलित परिवार बौद्ध धर्म को अपनाएंगे। बीते दो दशकों में प्रदेश में बौद्ध अनुयायियों की घटती संख्या के बीच इस आयोजन की जानकारी होने से बाद दलित समुदायों में हर्ष की लहर है। कार्यक्रम का आयोजन अंबेडकरवादी संगठनों के साझे प्रयासों से किया जा रहा है। 

कार्यक्रम के कोर्डिनेटर आनंद चक्रवर्ती ने द मूकनायक को बताया इस भव्य समारोह में करीब 3000 लोग स्वेछा से हिन्दू धर्म का परित्याग कर बौद्ध धर्म अपनाएंगे. आयोजकों में विभिन्न अम्बेडकरवादी संगठन जैसे अंबेडकर स्कूल ऑफ थॉट, समता सैनिक दल, नीलम सांस्कृतिक केंद्र, भीमा बुक बैंक, फुले सिविल्स अकादमी, अंबेडकर स्टडी सर्किल आदि का सहयोग प्राप्त हो रहा है, ये संगठन कर्नाटक के विभिन्न जिलों और गाँवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं। 

आनंद ने बताया ये दलित सामजिक संस्थाए छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं और रोज़ाना ट्यूशन केयर और करियर मार्गदर्शन, महिलाओं, छात्रों, युवाओं, कार्यकर्ताओं आदि के लिए सामाजिक जागरूकता शिविर लगाते हैं. और दैनिक आधार पर गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।

आनंद ने बताया, " वर्तमान में बिगडती जाति व्यवस्था के दुष्चक्र से बाहर आने के लिए हमारे नेता बाबासाहेब द्वारा दिखाए गए मार्ग के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाने के उद्देश्य से सभी दलित संगठन एक साथ आए। इस मौके पर लगभग 500 परिवार स्वैच्छिक धर्मांतरण करेंगे और 3000 समर्थक बौद्ध धर्म के मूल्यों को अपनाने के इस यादगार क्षण में एक साथ शामिल हो रहे हैं।

कार्यक्रम का आयोजन सरजापुर शहर के डॉ बी आर अंबेडकर मैदान में होगा, आयोजन की तैयारिया व्यापक स्तर पर चल रही है. वालंटियर्स घर घर संपर्क कर पत्रक का वितरण कर रहे हैं

बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले परिवार बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाओं की पालना का संकल्प लेंगे.
बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले परिवार बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाओं की पालना का संकल्प लेंगे.

बाबा साहब ने त्यागा था हिन्दू धर्म

14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में दीक्षाभूमि पर, भक्तों की भीड़ के बीच, डॉ. अंबेडकर ने हिंदू धर्म का त्याग कर लगभग 600,000 अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था।

यह सामूहिक धर्मांतरण केवल एक धार्मिक समारोह नहीं था; यह पहचान के एक कट्टरपंथी दावे और सदियों से भारतीय समाज को त्रस्त करने वाली दमनकारी जाति व्यवस्था की अस्वीकृति का प्रतिनिधित्व करता था।

बौद्ध धर्म में अंबेडकर को न केवल एक आध्यात्मिक शरण मिली, बल्कि समानता, करुणा और सामाजिक न्याय में निहित एक दर्शन भी मिला। आनंद ने बताया कि 2 जून को कर्णाटक के सैकड़ों दलित परिवार बाबा साहेब के बताये मार्ग पर चलकर हिन्दू धर्म में व्याप्त जातिवाद, उंच नीच , भेदभाव की जजीरों से स्वय को आजाद करेंगे.

इस अवसर पर बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले परिवार बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाओं की पालना का संकल्प लेंगे जिनमें सभी के साथ समता, समानता, करुणा और बंधुत्व का व्यवहार, जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, नशे और आडंबरों दूर रहकर जीवन यापन करने को प्रधानता दी गई है.

धम्म दीक्षा ग्रहण करने के बाद नव-बौद्ध लोगों के जीवन में हिन्दू रीति रिवाजों, पर्व त्योहारों, आस्थाओं और कर्म कांडों के लिए कोई भी स्थान नहीं रहेगा।
धम्म दीक्षा ग्रहण करने के बाद नव-बौद्ध लोगों के जीवन में हिन्दू रीति रिवाजों, पर्व त्योहारों, आस्थाओं और कर्म कांडों के लिए कोई भी स्थान नहीं रहेगा।

बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को उत्पीड़ितों के सशक्तिकरण के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में देखा, जो उन्हें उनकी जाति या सामाजिक स्थिति के बावजूद आत्म-साक्षात्कार और सम्मान का मार्ग प्रदान करता है।

बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म में धर्मांतरण की गूंज पूरे देश में हुई, जिससे सामाजिक जागृति की लहर उठी और अनगिनत व्यक्तियों को अपनी स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करने और अपने अधिकारों का दावा करने के लिए प्रेरित किया। इसने भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित किया, जिसने पदानुक्रम और भेदभाव की गहरी धारणाओं को चुनौती दी।

धम्म दीक्षा ग्रहण करने के बाद नव-बौद्ध लोगों के जीवन में हिन्दू रीति रिवाजों, पर्व त्योहारों, आस्थाओं और कर्म कांडों के लिए कोई भी स्थान नहीं रहेगा। इनकी बस्ती में भजन कीर्तन की बजाय बुद्ध वंदना के स्वर सुनाई देंगे.

ये हैं बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाएं

नागपुर में दीक्षा भूमि में 15 अक्टूबर 1956 को डॉ आंबेडकर ने लाखों लोगों के साथ हिंदू धर्म त्याग दिया। उन्होंने इस मौके पर 22 प्रतिज्ञाएं कीं।

1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में आस्था नहीं रखूंगा और उनकी पूजा नहीं करूंगा।

2. मैं राम और कृष्ण में आस्था नहीं रखूंगा, जिन्हें भगवान का अवतार माना जाता है। मैं इनकी पूजा नहीं करूंगा।

3. ‘गौरी’, गणपति और हिंदू धर्म के दूसरे देवी-देवताओं में न तो आस्था रखूंगा और न ही इनकी पूजा करूंगा।

4. मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता।

5. मैं न तो यह मानता हूं और न ही मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे दुष्प्रचार मानता हूं।

6. मैं न तो श्राद्ध करूंगा और न ही पिंड दान दूंगा।

7. मैं कोई ऐसा काम नहीं करूंगा, जो बुद्ध के सिद्धांतों और उनकी शिक्षाओं के खिलाफ हो।

8. मैं ब्राह्मणों के जरिए कोई आयोजन नहीं कराऊंगा।

9. मैं इंसानों की समानता में विश्वास करूंगा।

10. मैं समानता लाने के लिए काम करूंगा।

11. मैं बुद्ध के बताए अष्टांग मार्ग पर चलूंगा।

12. मैं बुद्ध की बताई गई पारमिताओं का अनुसरण करूंगा।

13. मैं सभी जीवों के प्रति संवेदना और दया भाव रखूंगा। मैं उनकी रक्षा करूंगा।

14. मैं चोरी नहीं करूंगा।

15. मैं झूठ नहीं बोलूंगा।

16. मैं यौन अपराध नहीं करूंगा।

17. मैं शराब और दूसरी नशीली चीजों का सेवन नहीं करूंगा।

18. मैं अपने रोजाना के जीवन में अष्टांग मार्ग का अनुसरण करूंगा, सहानुभूति और दया भाव रखूंगा।

19. मैं हिंदू धर्म का त्याग कर रहा हूं जो मानवता के लिए नुकसानदेह है और मानवताके विकास और प्रगति में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर टिका है। मैं बौद्ध धर्म अपना रहा हूं।

20. मेरा पूर्ण विश्वास है कि बुद्ध का धम्म ही एकमात्र सच्चा धर्म है।

21. मैं मानता हूं कि मेरा पुनर्जन्म हो रहा है।

22. मैं इस बात की घोषणा करता हूं कि आज के बाद मैं अपना जीवन बुद्ध के सिद्धांतों, उनकी शिक्षाओं और उनके धम्म के अनुसार बिताऊंगा।

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