
नई दिल्ली: "मान्या के पिता और मेरे पिता काफी लंबे समय से दोस्त थे," यह कहते हुए विवेकानंद धोड्डमानी की आवाज कांप उठती है। 22 वर्षीय दलित युवक विवेकानंद के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर कैसे जाति की दीवार इतनी ऊंची हो गई कि एक पिता ने अपनी ही 20 वर्षीय गर्भवती बेटी की जान ले ली। इस दिल दहला देने वाली घटना को दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन सवाल अब भी वही है।
दोस्ती तक तो सब ठीक था, लेकिन जैसे ही विवेकानंद और मान्या ने शादी कर सामाजिक हदों को पार किया, हालात बदल गए। इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से अपनी नम आँखों के साथ विवेकानंद कहते हैं, "मैंने एक सपना देखा था कि शायद एक दिन मेरा बच्चा मान्या के पिता की गोद में खेलेगा। मुझे कभी गुमान नहीं था कि जाति का जहर एक पिता को इस कदर अंधा कर देगा कि वह अपनी बेटी का कातिल बन जाएगा।"
पूरे राज्य को झकझोर देने वाली घटना
कर्नाटक में जातिगत हिंसा या 'ऑनर किलिंग' की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन जिस बेरहमी से गर्भवती मान्या की हत्या की गई, उसने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। दलित संगठनों ने जहां इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है, वहीं लिंगायत समूहों ने भी इसकी कड़ी निंदा करते हुए 'पश्चाताप दिवस' (Repentance Day) मनाया।
फिलहाल, मान्या के पिता प्रकाशगौड़ा पाटिल और उनके रिश्तेदार वीरनगौड़ा पाटिल व अरुणगौड़ा पाटिल पुलिस की हिरासत में हैं। उन पर हत्या और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सरकार और प्रशासन की सख्ती
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 4 जनवरी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा की कि मामले की सुनवाई के लिए एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट और एक विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया जाएगा, ताकि पीड़ित को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार 'ऑनर किलिंग' जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए विशेष कानून लाने पर विचार करेगी।
धारवाड़ जिले के इनाम वीरापुर गांव में, जहां विवेकानंद और मान्या दोनों का घर है, प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है। धारवाड़ की एसपी गुंजन आर्य ने बताया कि पुलिस स्टेशन स्तर पर निगरानी के लिए आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। विवेकानंद और उनके परिवार को 24 घंटे सुरक्षा मुहैया कराई गई है। गांव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस ने ग्रामीणों के साथ बैठक की है और स्थानीय संतों की मदद भी ली जा रही है।
वह प्रेम कहानी जिसका अंत खौफनाक हुआ
बीए अंतिम वर्ष के छात्र विवेकानंद बताते हैं कि उनकी और मान्या की मुलाकात तीन साल पहले हुई थी, जब मान्या प्री-यूनिवर्सिटी में थी। हत्या के समय वह इंजीनियरिंग की छात्रा थी। इनाम वीरापुर एक छोटा सा गांव है, जहां करीब सौ घर हैं। यहाँ 60% आबादी लिंगायत समुदाय की है, जबकि 25% एसटी (तलवार समूह) हैं। दलित मदिगा समुदाय, जिससे विवेकानंद आते हैं, के केवल छह घर हैं।
एक ही गांव के होने के कारण वे एक-दूसरे को बचपन से जानते थे और उनके परिवारों में भी जान-पहचान थी। विवेकानंद ने बताया कि जब उन्होंने प्यार का इजहार किया, तो मान्या ने उसे स्वीकार कर लिया, लेकिन गांव में इसके चलते वे अक्सर नहीं मिल पाते थे।
भागकर शादी और पुलिस की लापरवाही
एक साल पहले जब मान्या के पिता को उनके रिश्ते की भनक लगी, तो पाबंदियां शुरू हो गईं। मान्या के परिवार वाले उसकी शादी कहीं और करना चाहते थे। प्रताड़ना से तंग आकर मान्या ने घर छोड़ने का फैसला किया। दोनों ने भागकर एक मंदिर में शादी की और उसे रजिस्टर भी करवाया। जब मान्या के पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, तो दोनों ने पुलिस के सामने पेश होकर अपनी मर्जी से शादी करने की बात कही।
विवेकानंद को याद है कि थाने में भी मान्या के पिता ने धमकी दी थी, लेकिन उन्हें लगा कि यह गुस्से में कही गई बात है और समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। मान्या की हत्या के बाद हुबली ग्रामीण पुलिस स्टेशन के दो कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया गया है। एसपी आर्य ने माना कि पुलिस की ओर से लापरवाही हुई थी और उन्हें हमले की आशंका को भांपना चाहिए था।
वह 'काली शाम' और अधूरा रह गया एग्जाम
शादी के बाद धमकियों के डर से यह जोड़ा हावेरी शहर में एक रिश्तेदार के घर रहने लगा था। विवेकानंद ने एक दुकान पर काम करना शुरू किया। वह बताते हैं कि वे उनके शादीशुदा जीवन के कुछ सबसे खुशी भरे दिन थे। मान्या बहुत खुश थी, लेकिन गर्भवती होने की खबर देने के बाद भी उसके मायके वालों का दिल नहीं पसीजा।
21 दिसंबर को, जब यह दिल दहला देने वाली घटना हुई, वे दोनों आधार कार्ड अपडेट कराने गांव आए थे। अस्पताल ने सलाह दी थी कि मान्या के रिकॉर्ड में पति का नाम जुड़ना चाहिए। इसके अलावा, विवेकानंद को अगले दिन धारवाड़ में रेलवे भर्ती बोर्ड की 'डी ग्रुप' की परीक्षा देनी थी।
शाम करीब 5 बजे, जब मान्या विवेकानंद के माता-पिता के घर पर थी, प्रकाशगौड़ा पाटिल और उनके रिश्तेदारों ने हमला बोल दिया। विवेकानंद उस वक्त वहां नहीं थे। जब वे लौटे, तो देखा कि हमलावर मान्या और उनके माता-पिता को मार रहे थे। विवेकानंद को वहां से खदेड़ दिया गया, लेकिन तब तक पिता ने अपनी बेटी की सांसें छीन ली थीं। इस हमले में विवेकानंद के माता-पिता भी घायल हुए और उन्हें दो दिन अस्पताल में रहना पड़ा।
विडंबना: जो परंपरा मानी, उसी ने जान ली
इस पूरे घटना में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विवेकानंद का परिवार लिंगायत परंपराओं का ही पालन करता है। विवेकानंद कहते हैं, "मुझे बचपन में लिंग दीक्षा दी गई थी। हम बसवन्ना (लिंगायत मान्यताओं के संस्थापक) के सिद्धांतों का पालन करते हैं और हमारे घर में मांसाहार भी नहीं बनता।" बावजूद इसके, जाति के अहंकार ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.