इंदौर दलित उत्पीड़न मामलाः पुलिस की लापरवाही उजागर, आलाधिकारियों पर होगी कार्रवाई

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के जांच दल की प्रारम्भिक जांच में पुलिस की भूमिका मिली संदिग्ध, तीन पुलिसकर्मियों पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
इंदौर दलित उत्पीड़न मामलाः पुलिस की लापरवाही उजागर, आलाधिकारियों पर होगी कार्रवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के देपालपुर में दलित परिवार के सदस्यों से मारपीट और एक हत्या के मामले में पुलिस पर लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की टीम ने जिला प्रशासन को पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका के जांच करने के निर्देश दिए है। आयोग ने आरोपियों सहित पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों पर भी जांच कर कार्यवाही को अमल में लाने की लिखित अनुशंसा की है। हालांकि आयोग की टीम के इंदौर पहुँचने से पहले ही टीआई समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।

इंदौर के देपालपुर में जमीनी विवाद के चलते सवर्ण आरोपियों ने दलित किसान परिवार से मारपीट की थी, जिसमें पांच लोग गंभीर घायल हुए थे। परिवार के एक सदस्य की मौत हो गई थी। इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, हैदराबाद की टीम इंदौर पहुँचीं थी। आयोग के टीम के इंदौर आने से पहले देहात पुलिस अधीक्षक ने मामले में देपालपुर टीआई समेत तीन लोगों को सस्पेंड कर दिया था। थाने के पुलिसकर्मियों पर आरोप था, कि उन्होंने शिकायत के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई करने में लापवाही बरती और घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बजाय जांच के नाम पर गांव में रोके रखा।

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आयोग की टीम ने पीडि़त और घायलों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनी। आयोग की प्रारंभिक जांच में पुलिस द्वारा की लापरवाही सामने आईं है। हालांकि लापरवाही को ढकने के लिए पुलिस ने पहले ही गौतमपुरा थाने के एएसआई गोपाल गिरवाल और हवलदार अजय कुमारिया को सस्पेंड कर दिया था। बाद में टीआई अरुण सोलंकी को भी निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया था।

आयोग की टीम ने घटना स्थल सहित पीडि़त परिवार और घायलों से मुलाकात की थी। आयोग के सदस्य सुभाष पारधी के साथ पुलिस अधीक्षक भी मौजूद थे। सुभाष पारधी ने पीडि़त परिवार से मुलाकात कर उनकी पीड़ा को सुना। द मूकनायक से बातचीत करते पारधी ने बताया कि मौके पर जांच करने पहुँची आयोग की टीम को पुलिस द्वारा लापरवाही करने की जानकारी मिली है। हमने उसी समय पुलिस अधीक्षक को जांच कर प्रतिवेदन आयोग को भेजने के निर्देश दिए थे। फिलहाल हमें रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच प्रतिवेदन के बाद आयोग कार्रवाई करेगा। इस मामले में यदि प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार की लापरवाही सामने आती है तो उस पर कार्यवाही की जाएगी।

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क्या है पूरा मामला

इंदौर जिले के गौतमपुरा क्षेत्र के देपालपुर के काकवां गांव में मायाराम का परिवार रहता है। मायाराम अनुसूचित जाति समाज के व्यक्ति व खेती किसानी करते है। पुलिस को की गई शिकायत के मुताबिक घटना गुरुवार 16 मार्च 2023 की है। परिवार के सभी सदस्य सुबह साढ़े 10 बजे कांकवा गांव में अपने खेत गेहूं की फसल काटने गए थे। इस दौरान दोपहर करीब साढ़े 12 बजे पवन पिता मांगीलाल, उसकी पत्नी नन्नीबाई, बेटे जितेंद्र, धर्मेंद्र, नागूसिंह, बाबू पिता मांगीलाल, उसकी पत्नी धनीबाई, बेटा तूफान और बहू रेखाबाई पति तूफान आए और सरिये और डंडे से मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में मायाराम, शांतिलाल, मेहरबान, संगीताबाई, संजूबाई, रेशमबाई, हुकुमलाल, सुरेश, मायाबाई घायल हो गए। सुरेश ने फोन लगाकर 108 एम्बुलेंस बुलवाई और घायलों को देपालपुर पहुंचाया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद 7 घायलों को इंदौर रेफर कर दिया गया। वहीं मारपीट में मायाराम को सिर, दोनों पैर, दोनों हाथों पर गंभीर चोटें आई थीं, जिसके वजह से उपचार के दौरान 17 मार्च 2023 की दोपहर मायाराम बागरी (60) की मौत हो गई और उनके दो बेटे व बहू घायल हो गए। बागरी को प्रशासनिक अफसरों ने ही कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कब्जा दिलवाया था। वे उसी खेत पर फसल काटने गए थे और 40-50 लोगों ने हमला कर दिया। मामले में पुलिस ने भी लेटलतीफी की और सूचना के बाद आधा घंटा देरी से पहुंची।

जानिए क्या है जमीन से जुड़ा पूरा विवाद

जानकारी के अनुसार ग्राम कांकवा की जमीन को लेकर 1961 से विवाद चल रहा है। फरियादी पक्ष को 2002 में इन जमीनों के पट्टे बांटे गए थे। बाद में पट्टाधारी और कब्जाधारी के बीच विवाद हुआ और मामला कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने पट्टेधारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट के आदेश पर 22 फरवरी, 2023 को पट्टेधारियों को कब्जा दिलाया गया। कब्जा लेते वक्त फसल खड़ी थी। इसी फसल को काटने पट्टेधारी पहुंचे और मारपीट शुरू हो गई।

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