
तमिलनाडु: इरोड जिले से जातिगत भेदभाव का एक बेहद अमानवीय और शर्मनाक मामला सामने आया है। पेरुंदुरई के पास स्थित मडथुपलायम पंचायत के पेरुमबाली गांव में एक 90 वर्षीय बुजुर्ग के अंतिम संस्कार को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया। सार्वजनिक श्मशान घाट के उपयोग को लेकर हुए इस विरोध के बीच, अनुसूचित जाति (SC) के दो लोगों को कथित तौर पर पिछड़ा वर्ग (BC) के सदस्यों के पैरों में गिरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पेरुमबाली गांव में अनुसूचित जाति के 100 से अधिक लोग निवास करते हैं। इन ग्रामीणों को लंबे समय से अपने परिजनों के शवों को स्थानीय श्मशान में दफनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। मनबढ़ जातियों के भारी विरोध के कारण उन्हें अक्सर शवों को करीब पांच किलोमीटर दूर थिंगलूर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। हालांकि, एक हालिया सर्वेक्षण के बाद पेरुंदुरई के तहसीलदार ने इस श्मशान घाट को सभी समुदायों के लिए सार्वजनिक घोषित कर दिया था।
बीते 5 अक्टूबर को अनुसूचित जाति के 90 वर्षीय बुजुर्ग चेन्नी का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। जब उनके समुदाय के लोग बुजुर्ग के शव को दफनाने के लिए सार्वजनिक श्मशान घाट ले गए, तो उन्हें पिछड़ा वर्ग के लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, जिसने जल्द ही एक तीखी बहस का रूप ले लिया।
जिला पुलिस के अनुसार, यह अंतिम संस्कार राजस्व विभाग और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न कराया गया। दोनों समुदायों के बीच हुई इस बहस के दौरान, अनुसूचित जाति के लोगों को कथित तौर पर धमकाया गया। उन्हें कड़ी चेतावनी दी गई कि भविष्य में वे मनबढ़ समुदाय के लोगों के पास किसी भी प्रकार के काम के लिए न आएं। काम न देने की इस धमकी के तुरंत बाद, एससी समुदाय के दो लोगों ने विवश होकर बीसी समुदाय के लोगों के पैर पकड़ लिए।
इस पूरी घटना पर पुलिस ने अब सख्त कानूनी कदम उठाया है। 8 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) की रात थिंगलूर पुलिस स्टेशन में पेरुंदुरई राजस्व निरीक्षक द्वारा दी गई एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। इस अमानवीय कृत्य के संबंध में दो लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सख्त धाराएं लगाई गई हैं और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दलित समुदाय के लोगों के साथ हुए इस सार्वजनिक अपमान को साफ देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद से लोगों में भारी आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पश्चिमी क्षेत्र के राज्य समन्वयक पी. ईश्वरन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक श्मशान घाट का उपयोग करने से रोकना एससी समुदाय के लोगों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने काम न देने की धमकी को जातिगत उत्पीड़न का सबसे क्रूर रूप बताया है।
ईश्वरन ने कहा कि दलितों की आर्थिक लाचारी और मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें अन्य समुदाय के पैरों में गिरने के लिए मजबूर करना बेहद निंदनीय कृत्य है। बसपा नेता ने मौके पर मौजूद पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अंतिम संस्कार का विरोध करने वालों के साथ-साथ उन अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है, जो इस अपमान को रोकने में पूरी तरह विफल रहे।
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