धर्मशाला: दलित छात्रा की मौत पर डीसी ऑफिस के बाहर उग्र प्रदर्शन, पिता के छलके आंसू, बोले- 'सिर्फ इंसाफ चाहिए'

15 दिन का अल्टीमेटम: फॉरेंसिक सबूतों के अभाव में अब मेडिकल बोर्ड करेगा जांच, पिता बोले- 'सिर्फ इंसाफ चाहिए'
Dharamsala Dalit Student Death Case
धर्मशाला दलित छात्रा मौत मामले में न्याय की मांग तेज। संगठनों ने प्रशासन को दिया 15 दिन का वक्त, वरना होगा बड़ा आंदोलन। क्या रैगिंग और प्रताड़ना बनी मौत की वजह?Pic- tribuneindia.com
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धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 19 वर्षीय दलित छात्रा की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को विभिन्न दलित संगठनों ने मृतका के माता-पिता के साथ मिलकर उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। ये सभी 26 दिसंबर को हुई छात्रा की मौत के मामले में जल्द से जल्द न्याय की मांग कर रहे थे।

गौरलतब है कि पीड़ा झेलने वाली छात्रा धर्मशाला के गवर्नमेंट कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। उसकी मौत के बाद लगातार रैगिंग के साथ-साथ गंभीर शारीरिक, यौन और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पिता का दर्द: 'बस हमारी बेटी को न्याय मिले'

प्रदर्शन के दौरान माहौल उस वक्त गमगीन हो गया जब मृतका के पिता, विक्रम कुमार मीडिया से रूबरू हुए। अपनी बात रखते हुए वे अपने आंसू नहीं रोक पाए और रुंधे गले से कहा, "हमारी बेटी को इंसाफ मिले... बस मुझे यही कहना है।" उन्होंने दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने के लिए सभी लोगों और संगठनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब उन्हें सिर्फ अपनी बेटी के लिए न्याय का इंतजार है।

प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम

प्रदर्शन में शामिल महर्षि वाल्मीकि गुरु रविदास महासभा और बाबा दीप सिंह कालीपुल सेवा संगठन (ऊना) के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर 15 दिनों के भीतर उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होंगे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे पंजाब-हिमाचल प्रदेश सीमा को बंद करने और धर्मशाला शहर में चक्का जाम (सड़क नाकाबंदी) करने जैसे कदम भी उठा सकते हैं।

पुलिस और प्रशासन की मंशा पर सवाल

महर्षि वाल्मीकि गुरु रविदास महासभा के अध्यक्ष अमित वाल्मीकि ने जांच की धीमी गति पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन इंसाफ अभी भी कोसों दूर है। प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "अगर सरकार और प्रशासन गंभीर होते, तो एक दिन में न्याय मिल सकता था।"

वाल्मीकि ने संदेह जताया कि आखिर प्रशासन और पुलिस पर किस तरह का दबाव है जो मामले को इतनी सुस्ती से हैंडल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का प्रदर्शन में शामिल होना यह बताता है कि वे जांच की प्रगति से कितने निराश हैं।

वहीं, बाबा दीप सिंह कालीपुल सेवा संगठन, ऊना के कार्यकर्ता बलवंत सिंह ने कांगड़ा के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, "आज यह एक छात्रा के साथ हुआ है, कल किसी और के साथ हो सकता है। अगर समझौतों का दबाव बनाया गया, तो अपराध नहीं रुकेंगे।"

फॉरेंसिक सबूतों का अभाव और मेडिकल बोर्ड का गठन

फिलहाल, पुलिस, यूजीसी (UGC), राज्य शिक्षा विभाग, अनुसूचित जाति आयोग और महिला आयोग सहित कई एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। पुलिस मृतका के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों को बारीकी से खंगाल रही है, ताकि रैगिंग या हमले से जुड़ा कोई सुराग मिल सके।

हालांकि, जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अहम फॉरेंसिक सबूतों का न होना है। छात्रा का पोस्टमार्टम न होना और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिए जाने के कारण जांचकर्ताओं को डीएनए नमूने और महत्वपूर्ण चिकित्सा इनपुट नहीं मिल पाए हैं।

इस कमी को पूरा करने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा के अधिकारियों ने 5 सदस्यों का एक मेडिकल बोर्ड गठित किया है। यह बोर्ड उन अस्पतालों के रिकॉर्ड की जांच करेगा जहां छात्रा का मृत्यु से पहले इलाज चला था। कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक (SP) अशोक रतन ने बताया कि बोर्ड एक साक्ष्य-आधारित रिपोर्ट सौंपेगा, जिससे मौत की सही वजह और परिस्थितियों का पता लगाने में मदद मिलेगी।

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