दलित मजदूर की मौत मामले पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट, सीबीआई जांच की उठी मांग

संगरूर में नशे के मुद्दे पर मंत्री हरपाल सिंह चीमा से भिड़ने वाले मजदूर की आत्महत्या मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सख्त, सीबीआई जांच की मांग ने पकड़ा जोर।
Dalit labourer suicide, Gulzar Singh
पंजाब में 'चिट्टे' पर मंत्री से सवाल करने वाले दलित मजदूर की आत्महत्या पर हाईकोर्ट ने सरकार से रिपोर्ट तलब की है। सीबीआई जांच की उठी मांग.
Published on

नई दिल्ली: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दलित मजदूर गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले में बुधवार को पंजाब सरकार से एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर तय करते हुए राज्य सरकार को जांच की पूरी जानकारी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही खंडपीठ ने निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा स्थिति और तथ्यों के आधार पर राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को इस मामले में कैसे फंसाया जा सकता है।

अदालत का यह निर्देश शिरोमणि अकाली दल के अनुसूचित जाति विंग के मुख्य प्रवक्ता द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान आया है। याचिकाकर्ता ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की है।

वर्तमान में इस मामले की एफआईआर संगरूर जिले के दिड़बा पुलिस स्टेशन में दर्ज है। यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें गांव के सरपंच समेत पांच स्थानीय लोगों को नामजद किया गया है।

याचिका के अनुसार, यह पूरा विवाद 6 सितंबर को शुरू हुआ था जब वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा विकास कार्यों का शिलान्यास करने संगरूर के तूरबंजारा गांव पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम के दौरान गुलजार सिंह ने अपने बेटे की नशे की लत का दर्द बयां करते हुए मंत्री से इलाके में फैल रहे 'चिट्टे' (सिंथेटिक ड्रग्स) को लेकर सीधे सवाल पूछे थे।

आरोप है कि इसी घटना के बाद उसी शाम पुलिसकर्मी गुलजार सिंह के घर पहुंचे और उनसे पूछताछ की। इसके बाद पंचायत सदस्यों ने उन्हें डराया-धमकाया और उनके साथ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

कथित तौर पर 7 सितंबर को पंचायत ने गुलजार सिंह को तलब किया और उन पर मंत्री से बिना शर्त माफी मांगने का भारी दबाव बनाया गया। इस अपमान और दबाव से आहत होकर उन्होंने जहर खा लिया। अगले दिन, 8 सितंबर को लुधियाना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

उनके परिवार का गंभीर आरोप है कि प्रशासन ने बिना उनकी सहमति लिए ही जल्दबाजी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार और याचिकाकर्ता का दावा है कि गुलजार सिंह ने अपने वीडियो-रिकॉर्डेड 'डाइंग डिक्लेरेशन' (मृत्यु पूर्व बयान) में अपनी मौत के लिए मंत्री चीमा और गांव के सरपंच को जिम्मेदार ठहराया था।

इस घटना ने पूरे पंजाब में एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल एकजुट होकर लगातार मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

विरोध दर्ज कराने के लिए हाल ही में कांग्रेस नेताओं ने चंडीगढ़ में मंत्री के आवास की ओर एक बड़ा रोष मार्च निकाला था, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों (वाटर कैनन) का इस्तेमाल करना पड़ा। इस बीच, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने भी संगरूर का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया है।

Dalit labourer suicide, Gulzar Singh
पत्रकार सत्यम वर्मा की रासुका के तहत हिरासत पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, केंद्र और यूपी सरकार को थमाया नोटिस
Dalit labourer suicide, Gulzar Singh
गुंडा एक्ट बना 'उत्पीड़न का हथियार': इलाहाबाद हाईकोर्ट की नौकरशाही को कड़ी चेतावनी, अपनी जेब से भरना होगा हर्जाना
Dalit labourer suicide, Gulzar Singh
मेडिकल इमरजेंसी में समलैंगिक और लिव-इन पार्टनर ले सकेंगे अहम फैसले, NMC का दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com