जयपुर। राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय पर कथित अम्बेडकर पार्क में गौतम बुद्ध की प्रतिमा लगाने के बाद बवाल हो गया। ब्राह्मण समाज ने पार्क पर अपना अधिकार जताते हुए गौतम बुद्ध की प्रतिमा को हटा कर भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना करने और पार्क का नामकरण भगवान परशुराम के नाम पर करने की मांग कर डाली। इतना ही नहीं ब्राह्मण समाज ने रैली निकाल कर गौतम बुद्ध की प्रतिमा नहीं हटाने पर आंदोलन की चेतावनी तक दे डाली।
उधर ब्राह्मण समाज के विरोध के बाद अनुसूचित जाति के लोग भी गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। ऐसे में जिला मुख्यालय पर तनाव के साथ ही दो समाजों में टकराव की स्थिति बन गई है।
स्थिति को भांपते हुए जिला कलक्टर सुरेश कुमार ओला और पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अगरवाला की सूझबूझ से टकराव को टाल कर पार्क में यथा स्थिति बनाये रखने के लिए पार्क और भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा को पुलिस सुरक्षा में ले लिया गया। बीते तीन दिनों से पार्क में पुलिस टीम 24 घण्टे डेरा डाले हुए है।
दलित समाज से जुड़े लोगों ने 11 जून को सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय पर अन्वेषण भवन के सामने त्रिकोणीय पार्क में भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर दी।
दलित समाज का दावा है कि यह पार्क वर्षों से अम्बेडकर पार्क के नाम से ही जाना जाता है। दलित समाज के लोग लम्बे समय से इसी पार्क में अम्बेडकर जयंती व अन्य महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि के कार्यक्रम करता आ रहा है। सामाजिक बैठक भी इसी पार्क में होती रही है। इस पार्क में नियमानुसार भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई है।
जबकि ब्राह्मण समाज का दावा है कि पुलिस लाइन चौराहे पर बने पार्क का नाम भगवान परशुराम के नाम से रखने और भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना के लिए नगर परिषद साधारण सभा में 5 मार्च 2022 को प्रस्ताव लिया जा चुका है। ऐसे में यहां गौतम बुद्ध की प्रतिमा लगाना गलत है। पार्षद जिनेन्द्र शर्मा ने भी यह बात कही है कि साधारण सभा में यह प्रस्ताव लिया गया है। प्रस्ताव की कॉपी हमारे पास है।
पूर्व छात्र नेता और बालीनाथ फाउंडेशन जिला अध्यक्ष धारा सिंह बैरवा ने द मूकनायक को बताया कि अन्वेषण भवन के सामने त्रिकोणीय पार्क को अम्बेडकर पार्क बनाने और इस पार्क में भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को नगर पालिका सवाईमाधोपुर ने 1994 में ही मंजूरी दे दी थी।
बैरवा ने कहा आप 30 साल पहले अन्वेषण भवन के सामने वाले पार्क में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापना के लिए साधारण सभा में सर्वसम्मति से मंजूरी दे चुके हो। फिर 2022 में नगर परिषद साधारण सभा में प्रस्ताव लिखवा कर जानबूझ कर विवाद खड़ा करना चाहते हो।
उन्होंने कहा 5 मार्च 2022 को नगर परिषद की साधारण सभा में समाज के पार्षदों ने भगवान परशुराम के नाम से पार्क का नाम कर मूर्ति स्थापना का प्रस्ताव लिखवाया है। प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है। हालांकि बैरवा के इस आरोप की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। प्रस्ताव पारित हुआ था या नहीं।
सामाजिक कार्यकर्ता धारा सिंह बैरवा ने द मूकनायक को बताया कि नगर पालिका सवाईमाधोपुर के अधिशाषी अधिकारी ने गत 27 जनवरी को जिला कलक्टर सवाईमाधोपुर को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कलक्टर को लिखा था कि नगर पालिका सवाईमाधोपुर की साधरण सभा में 10 जनवरी 1994 को निर्णय लिया जा चुका है कि अन्वेषण भवन के सामने दौसा रोड के तिराहे पर अम्बेडकर की मूर्ति लगाने की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसका व्यय वाल्मीकि महिला शिक्षा समिति स्वयं वहन करेगी।
5 मार्च 2022 को नगरपरिषद की साधारण सभा में अन्वेषण भवन के सामने वाले पार्क का नाम भगवान परशुराम के नाम पर कर भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना के प्रस्ताव के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के छात्र प्रतिनिधि अनिल गुणसारिया ने अनुसूचित जाति आयोग राजस्थान में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि "अन्वेषण भवन के सामने वाले पार्क में 1994 में नगरपालिका डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा की मंजूरी दे चुकी है। इसके बावजूद मार्च 2022 में नगर परिषद की साधारण सभा में पुनः भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना का प्रस्ताव पेश किया गया है, इसे रुकवाया जाए."
छात्र नेता गुणसारिया की शिकायत पर 8 सितम्बर 2022 को राजस्थान अनुसूचित जाति आयोग अध्यक्ष मदनलाल बैरवा ने जिला कलक्टर सवाईमाधोपुर को एक पत्र लिख कर पुलिस लाइन के सामने स्थित पार्क का नाम बदलने के नगर परिषद के प्रस्ताव को निरस्त करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद एससी आयोग के पत्र का हवाला देकर अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. सूरज सिंह नेगी ने नगरपरिषद आयुक्त को 20 सितम्बर 2022 को एक पत्र लिख कर निर्देशित किया कि पुलिस लाइन चौराहे पर अम्बेडकर पार्क के नाम को बदलने के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए। हालांकि यह पत्र कही न कही फाइलों में दफन कर दिए गए।
इस संबंध में द मूकनायक ने जिला कलक्टर सुरेश कुमार ओला, नगर परिषद आयुक्त होती लाल मीणा से भी बात करने का प्रयास किया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया।
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