चेन्नई: क्यों प्रदूषित कूवम नदी में उतरकर सफाईकर्मी बने अपनी ही जान के दुश्मन? एक महिला की मौत | क्या सो रही है स्टालिन सरकार?

श्रमिक नगर निगम के अधीन सीधे तौर पर अपनी नौकरियों को नियमित करने और बहाल करने की मांग कर रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन 159वें दिन भी जारी है, जिसमें अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 50 दिन भी शामिल हैं।
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) के तहत अनुबंध पर कार्यरत ये सफाई कर्मचारी जिनमे ज्यादातर दलित महिलाएं हैं, अगस्त 2025 से ही निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर हैं।
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) के तहत अनुबंध पर कार्यरत ये सफाई कर्मचारी जिनमे ज्यादातर दलित महिलाएं हैं, अगस्त 2025 से ही निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर हैं।x @NeelamSocial
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चेन्नई- तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सफाई कर्मचारियों ले लंबे समय से चल रहे आंदोलन ने सोमवार को नाटकीय मोड़ ले लिया, जब रॉयापुरम और तिरुविका नगर जोन के सैकड़ों सफाई कर्मचारी कूवम नदी में उतर गए। स्थायी नौकरी और निजी कंपनियों को सफाई कार्य सौंपने के खिलाफ यह प्रदर्शन उनका 158वां दिन था, जिसमें 50 दिनों तक अनशन भी शामिल रहा। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिसमें एक महिला कर्मचारी बेहोश हो गईं। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) के तहत अनुबंध पर कार्यरत ये सफाई कर्मचारी जिनमे ज्यादातर दलित महिलाएं हैं, अगस्त 2025 से ही निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर हैं। जीसीसी ने जोन 5 और 6 में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को निजी कंपनियों (जैसे रामकी) को सौंप दिया, जिससे करीब 2,000 कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ गईं। वे न्यूनतम वेतन (प्रति दिन 565-761 रुपये), लाभों की कमी और असुरक्षित कामकाजी स्थितियों का सामना कर रहे हैं।

कर्मचारी 16-सूत्री मांगों पर जोर दे रहे हैं जिसमें निजीकरण रद्द करना, स्थायी नियुक्ति और जीसीसी के सीधे अधीन बहाली शामिल है। दिसंबर में एक सहकर्मी की आत्महत्या के बाद आंदोलन और तेज हो गया, जब कर्मचारियों ने कब्रिस्तान में विरोध प्रदर्शन किया। जनवरी 2026 की शुरुआत में जीसीसी आयुक्त जे. कुमारगुरुबरण के आवास पर घेराव के प्रयास में 100 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। सरकार ने 2026 विधानसभा चुनाव तक तीन जोनों में निजीकरण रोक दिया है, लेकिन कर्मचारी इसे अपर्याप्त मानते हैं।

प्रदूषित कूवम नदी में डुबकी क्यों?

दलित अधिकार कार्यकर्ता शालिन मरिया लारेंस ने द मूकनायक को बताया कि पिछले कई महीनों से रिपन बिल्डिंग, अन्ना अरिवालयम और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के बावजूद कोई ठोस समाधान न मिलने पर कर्मचारियों ने यह चरम कदम उठाया। कूवम नदी में उतरकर उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, क्योंकि यह नदी चेन्नई की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है। शालिन ने बताया कि सोमवार को नदी में उतरने वाली एक महिला कर्मचारी की तबियत खराब होने पर उसे अस्पताल ले गया था जहां मध्य रात्री उसकी मौत हो गयी।

एक कर्मचारी ने कहा, "हम रोज कचरा उठाते हैं, लेकिन हमारी आवाज नहीं सुनाई देती। इस जहरीले पानी में उतरकर हम साबित करना चाहते हैं कि हमारी जिंदगी कितनी सस्ती है।" प्रदर्शन के दौरान इग्मोर के पास नदी में उतरे सैकड़ों कर्मचारियों को दमकल विभाग ने बचाया, लेकिन हिरासत में लेते हुए एक महिला बेहोश हो गईं, जिससे मौके पर हंगामा मच गया।

कूवम नदी (जिसे कोवम या तिरुवल्लिकेन्नी नदी भी कहा जाता है) तमिल शब्द 'कूपम' से नामित है, जिसका अर्थ 'कुआं' या 'गहरा गड्ढा' है। यह लगभग 72 किलोमीटर लंबी नदी है, जो तिरुवल्लुर जिले से निकलकर चेन्नई के शहरी इलाकों से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। ऐतिहासिक रूप से यह साफ-सुथरी और नौगम्य थी, जो रोमन साम्राज्य और दक्षिण भारत के बीच व्यापार का केंद्र थी। चोल काल में इसे 'कष्टबुध्योत्पथी' कहा जाता था, और प्राचीन मंदिरों के दस्तावेजों में इसके पवित्र जल का उल्लेख है। ब्रिटिश काल में 1872 से इसकी सफाई शुरू हुई, लेकिन स्वतंत्र भारत में यह प्रदूषण का शिकार हो गई।

वर्तमान में चेन्नई के 32 किलोमीटर शहरी खंड में यह अत्यधिक प्रदूषित है। इसमें चेन्नई का 30% असंसाधित सीवेज (55 मिलियन लीटर प्रतिदिन) और 127 सीवेज आउटफॉल बहते हैं, साथ ही औद्योगिक कचरा, भारी धातुएं (सीसा, जस्ता, कैडमियम) और कीटनाशक की अधिकता है। घुलित ऑक्सीजन शून्य है, मल कोलाइफॉर्म बैक्टीरिया अधिक, और कोई मछली नहीं बची (1950 में 49 प्रजातियां थीं)। नदी का मुहाना रेत की पट्टी से अवरुद्ध है, जो इसे बदबूदार गड्ढे में बदल देता है। अपस्ट्रीम 42 किलोमीटर हिस्सा अभी भी साफ है, लेकिन शहरी भाग में अतिक्रमण, झुग्गियां (3,500 अवैध झोपड़ियां) और दैनिक 7 टन कचरा डंपिंग समस्या बढ़ा रही है।

सोमवार सुबह इग्मोर के पास नदी में उतरते ही पुलिस ने हस्तक्षेप किया। सैकड़ों कर्मचारियों को वाहनों में भरकर ले जाया गया, लेकिन शाम तक सभी रिहा कर दिए गए। एक कर्मचारी को अस्पताल ले जाना पड़ा। यूनियनों (जैसे तमिलनाडु रूरल डेवलपमेंट वर्कर्स यूनियन) ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी न हुईं, तो आंदोलन और तेज होगा। नगर प्रशासन मंत्री के.एन. नेहरू से तत्काल हस्तक्षेप की मांग हो रही है।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) के तहत अनुबंध पर कार्यरत ये सफाई कर्मचारी जिनमे ज्यादातर दलित महिलाएं हैं, अगस्त 2025 से ही निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर हैं।
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