MP सीधी में आंबेडकर जयंती पर बवाल! दलित महिला से मारपीट और जातिसूचक गालियों का आरोप, पुलिस पर गंभीर सवाल, जानिए क्या है मामला?

आमलिया थाना क्षेत्र में पानकली साकेत ने पुलिस आरक्षक सहित अन्य पर लगाए गंभीर आरोप; SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग तेज, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
MP सीधी में आंबेडकर जयंती पर बवाल! दलित महिला से मारपीट और जातिसूचक गालियों का आरोप, पुलिस पर गंभीर सवाल, जानिए क्या है मामला?
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भोपाल। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में 14 अप्रैल 2026 को आंबेडकर जयंती के अवसर पर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आमलिया थाना क्षेत्र की निवासी पानकली साकेत नामक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि जब वह आंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम और रैली के सिलसिले में दोपहर लगभग 2:30 बजे थाने के बाहर पहुंची, उसी दौरान एक पुलिस आरक्षक अभिषेक और तीन अन्य व्यक्तियों ने, जो कथित रूप से सिविल ड्रेस में थे, उसे घेर लिया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

पीड़िता के अनुसार यह हमला अचानक और बिना किसी उकसावे के किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। महिला का कहना है कि उसके सिर, हाथ, पैरों और पीठ पर गहरी चोटें आई हैं, जिनके निशान अब भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या पुलिस आम नागरिकों, खासकर दलित समुदाय की महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल हो रही है।

महिला का आरोप पुलिस कर्मियों ने की मारपीट
महिला का आरोप पुलिस कर्मियों ने की मारपीट

जातिसूचक गालियों का भी आरोप

पानकली साकेत ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उसे जातिसूचक गालियां दी गईं, जो न केवल सामाजिक रूप से अपमानजनक है बल्कि कानूनन एक गंभीर अपराध भी है। यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह मामला सीधे तौर पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज किया जा सकता है।

अस्पताल में भी नहीं मिला समुचित इलाज

घटना के बाद पीड़िता इलाज के लिए अस्पताल पहुंची, लेकिन उसने आरोप लगाया कि वहां भी उसे उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। दर्द और चोटों से परेशान महिला को मजबूरी में मेडिकल स्टोर से दवा लेकर घर लौटना पड़ा। उसने बताया कि घटना के बाद से उसे लगातार सिरदर्द, चक्कर और उल्टियों की समस्या हो रही है, जिससे उसकी स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं की इस कथित लापरवाही ने भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल में प्राथमिक उपचार तक नहीं मिलता, तो यह पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

पुलिस अधीक्षक से शिकायत

पानकली साकेत ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी है। अपने शिकायती पत्र में उसने न केवल अपनी आपबीती बताई है, बल्कि यह भी आरोप लगाया है कि इस घटना का उद्देश्य आंबेडकर जयंती की रैली को रोकना था।

पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि उस दिन केवल उसके साथ ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों के साथ भी मारपीट की गई थी, जो अब इलाज के लिए भटक रहे हैं। शिकायत में सौरभ शुक्ला नामक एक अन्य व्यक्ति का नाम भी आरोपी के रूप में सामने आया है, जबकि एक अन्य आरोपी की पहचान अभी अज्ञात बताई गई है। महिला ने अपने आवेदन के साथ चोटों के फोटोग्राफ्स भी संलग्न किए हैं, ताकि मामले की गंभीरता को स्पष्ट किया जा सके।

एसपी से की शिकायत
एसपी से की शिकायत

सोशल मीडिया पर मामला गरमाया

यह मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। आजाद समाज पार्टी के नेता सुनील अस्तेय ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को टैग करते हुए पूछा कि क्या इसी तरह “लाडली बहना” जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित किया जा रहा है।

मामले को उठाने वाले लोगों का दावा है कि उन्होंने पीड़िता से वीडियो कॉल पर बातचीत की, जिसमें उसने पूरी घटना का विस्तृत विवरण दिया और न्याय की गुहार लगाई। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सीधी पहुंचकर आंदोलन करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

आजाद समाज पार्टी के नेता सुनील अस्तेय ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि सीधी की यह घटना बेहद गंभीर और शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पुलिस ही लोगों के साथ मारपीट करेगी और जातिसूचक गालियां देगी, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा।

उन्होंने कहा कि दलित महिला के साथ जो हुआ, वह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं बल्कि पूरे समाज के सम्मान पर हमला है। उन्होंने मांग की कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत सख्त कार्रवाई हो और पीड़िता को न्याय दिया जाए।

सुनील अस्तेय ने यह भी चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी सीधी पहुंचकर आंदोलन करेगी और इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएगी।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

अब तक इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। ऐसे संवेदनशील मामले में प्रशासन की चुप्पी लोगों के अविश्वास को और बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोपी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।

सामाजिक न्याय के प्रतीक दिन पर घटना ने बढ़ाई चिंता

आंबेडकर जयंती का दिन भारत में समानता, न्याय और संवैधानिक अधिकारों के सम्मान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर इस तरह की घटना का सामने आना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह समाज में व्याप्त असमानताओं और चुनौतियों को भी उजागर करता है।

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