MP के छतरपुर में मंदिर के नाम पर गेहूं की मांग से शुरू हुआ विवाद: दलित परिवार पर जानलेवा हमला महिलाओं समेत कई घायल

महाराजगंज सिविल लाइन थाना क्षेत्र का मामला, 1 क्विंटल गेहूं की मांग को लेकर बढ़ा विवाद, आजाद समाज पार्टी ने की सख्त कार्रवाई की मांग
मारपीट
मारपीटसांकेतिक चित्र
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भोपाल। मध्यप्रदेश की छतरपुर जिले के महाराजगंज सिविल लाइन थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां मंदिर के नाम पर गेहूं की मांग को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि यह हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि पटेल समाज के कुछ लोगों ने दलित अहिरवार समाज के गरीब परिवारों से जबरन एक क्विंटल गेहूं देने की मांग की। जब पीड़ित परिवारों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए केवल 50 किलो गेहूं देने की बात कही, तो इस बात को लेकर विवाद गहरा गया और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि अहिरवार समाज के लोगों ने साफ तौर पर कहा था कि उनकी क्षमता एक क्विंटल गेहूं देने की नहीं है और वे केवल 50 किलो ही दे सकते हैं। इसके बावजूद आरोपियों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और एक क्विंटल गेहूं देने का दबाव बनाते रहे। जब पीड़ित परिवार अपनी बात पर अड़े रहे, तो आरोप है कि पटेल समाज के लोगों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए उन पर डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में महिलाएं और पुरुष दोनों गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। घटना में जिन लोगों पर हमला करने का आरोप है, उनमें श्याम पटेल, रामस्वरूप पटेल, भगवतदयाल पटेल और राजा भैया पटेल के नाम सामने आए हैं।

वहीं पीड़ित पक्ष में कूरा अहिरवार, छिद्दी अहिरवार, सोहन अहिरवार, वीरू अहिरवार, गिरिजा अहिरवार और कविता अहिरवार शामिल हैं। बताया जा रहा है कि घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

पीड़ितों के अनुसार, मंदिर के नाम पर गेहूं की मांग को लेकर जब उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए केवल 50 किलो देने की बात कही, तो आरोपी पक्ष अभद्रता पर उतर आया। पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों ने जबरन एक क्विंटल गेहूं देने का दबाव बनाया और मना करने पर उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज शुरू कर दी। माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता गया और बात विवाद से आगे बढ़ने लगी।

बातचीत में पीड़ितों ने बताया, कि जब उन्होंने इस अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज का विरोध किया, तो आरोपी पक्ष ने मारपीट शुरू कर दी। डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला किया गया, जिसमें परिवार के कई सदस्य घायल हो गए। पीड़ितों के मुताबिक, हमले में महिलाओं को भी निशाना बनाया गया और उन्हें भी चोटें आईं। घटना के बाद से पूरा परिवार भय के माहौल में है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आजाद समाज पार्टी के नेता सुनील अस्तेय ने इस मामले पर एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि मंदिर आस्था का केंद्र होता है, लेकिन उसके नाम पर गरीब दलित किसान परिवार से जबरन अनाज मांगना और मना करने पर पूरे परिवार, खासकर महिलाओं पर हमला करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सामान्य मारपीट की घटना नहीं है, बल्कि यह कमजोर वर्गों को डराने और दबाने की मानसिकता को दर्शाता है।

द मूकनायक से बातचीत में एएसपी नेता सुनील अस्तेय ने कहा कि धर्म के नाम पर इस तरह की अवैध वसूली और दबंगई किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए, घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए और सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में आस्था के नाम पर गुंडागर्दी नहीं चलने दी जाएगी और कानून को सर्वोपरि रखना होगा।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की बात कही जा रही है।

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