"7 पीढ़ियों में सबसे ज्यादा शिक्षित था हमारा रतन, AIIMS प्रशासन ने...": Rajkot में दलित MBBS छात्र के सुसाइड से परिवार ही नहीं, पूरे गाँव में मातम!

रतन के बैग से 17 पन्नों का नोट मिला जिसमें लिखा था कि जनवरी से पांच सहपाठी उसे पीटते, अपमानित करते रहे। एक महिला मित्र का भी जिक्र था, जिसके संदेह में यह सब हुआ।
 रतन ने जाने से पहले 17 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें पांच सहपाठियों पर लगातार शारीरिक पिटाई, मानसिक यातना और अपमान का आरोप लगाया। 15 मार्च को सभीआरोपी छात्र गिरफ्तार किए गए।
रतन ने जाने से पहले 17 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें पांच सहपाठियों पर लगातार शारीरिक पिटाई, मानसिक यातना और अपमान का आरोप लगाया। 15 मार्च को सभीआरोपी छात्र गिरफ्तार किए गए।ग्राफिक- आसिफ निसार/ द मूकनायक
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जैसलमेर/राजकोट- राजस्थान के थार रेगिस्तान में जैसलमेर के छोटे से गांव फलसूंद में सन्नाटा छाया हुआ है। 26 साल का रतन मेघवाल, एक मेधावी दलित छात्र, जो AIIMS राजकोट में अंतिम वर्ष MBBS इंटर्न था, 14 मार्च की सुबह ट्रेन के सामने कूदकर हमेशा के लिए चला गया। उसकी मौत ने न सिर्फ परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है।

रतन ने जाने से पहले 17 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें पांच सहपाठियों पर लगातार शारीरिक पिटाई, मानसिक यातना और अपमान का आरोप लगाया। लेकिन सबसे दर्दनाक बात– रतन ने परिवार को कभी पूरी बात नहीं शेयर की। चाचा मांगीलाल चौहान की आंखों में आंसू छलक आए जब उन्होंने ' द मूकनायक' से कहा, "7 पीढ़ियों में हमारा रतन सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था, 15-20 परिवारों में पहला डॉक्टर... हमने उस पर इतनी उम्मीदें लगाई थीं... लेकिन AIIMS प्रशासन ने उसकी शिकायत सुनी नहीं। अगर थोड़ा ध्यान दिया होता, तो शायद आज वह जिंदा होता।"

क्या है पूरा घटनाक्रम

14 मार्च की सुबह करीब 4-5 बजे रतन राजकोट AIIMS के पास जामनगर रोड पर घंटेश्वर 25 वारिया के रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के सामने कूद गए। शव घटनास्थल पर मिला। बैग में लैपटॉप, मोबाइल, मेडिकल फाइल्स, आईडी कार्ड और 17 पन्नों का नोट मिला, जिसमें हिंदी-अंग्रेजी में लिखा था कि जनवरी से पांच सहपाठी उसे पीटते, अपमानित करते रहे। एक महिला मित्र का भी जिक्र था, जिसके संदेह में यह सब हुआ। पुलिस ने पिता मोहनलाल की शिकायत पर BNS धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया।

पुलिस ने शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की। 15 मार्च को सभी आरोपी गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तीन प्रणव पालीवाल , अस्मित शर्मा, युवराज चौधरी राजस्थान के हैं जबकि निर्विघ्नम यादव (हरियाणा) और आयुष यादव भरूच, गुजरात के हैं।

ये सभी अंतिम वर्ष MBBS छात्र हैं। रविवार को कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट ने उनकी परीक्षा जेल से देने की अर्जी मंजूर की, जिसके बाद 16 मार्च को सख्त पुलिस सुरक्षा में परीक्षा केंद्र ले जाया गया। जांच SC-ST सेल को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जातिगत भेदभाव का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन SC-ST एक्ट लगाया गया क्योंकि पीड़ित दलित था।

पिता पर टूटा दुखों का पहाड़, FIR में बताई पूरी बात

रतन के पिता मोहनलाल ने बताया कि 14 मार्च को सुबह करीब 6:30 बजे कॉल आया तो एक पुलिसवाले ने बात की और कहा कि आपके बेटे रतन कुमार ने राजकोट में रेलवे ट्रैक से नीचे आकर सुसाइड कर लिया है। मेघवाल ने बताया, "राजकोट जाने पर पुलिस ने मुझे सुसाइड नोट की एक कॉपी दिखाई है जिसमें हिंदी और इंग्लिश में पेन से मेरे बेटे रतन कुमार की हैंडराइटिंग में लिखा था। यह टेक्स्ट कुल 17 पेज का है। मैंने यह सुसाइड नोट पढ़ा है जिसमें उसने बताया कि उसके साथ पढ़ने वाली एक लड़की से रिलेशनशिप होने के शक में, उसके साथ पढ़ने वाले लोग उसे प्रताड़ित कर रहे थे और इससे पहले जनवरी में उन्होंने मेरे बेटे को पीटा भी था। इस सुसाइड नोट में लिखा है कि इस नोट को रतन का मरने से पहले का बयान माना जाए। उसे 27 जनवरी को फिजिकल और मेंटल टॉर्चर का शिकार होना पड़ा। रतन ने लिखा कि अपनी मौत के लिए वह खुद जिम्मेदार है। उसने पांच लड़कों के नाम भी पत्र में लिखे जो लोग उसके साथ पढ़ते थे और वे मेरे बेटे को मरने के लिए मजबूर कर रहे हैं।" मोहनलाल मेघवाल ने गांधीग्राम पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 108, 3(5) और अत्याचार अधिनियम के तहत सभी पांच आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

परिवार के साथ डेढ़ माह रहा, जिद करके राजकोट लौटा था रतन

रतन के चाचा मांगीलाल ने बताया कि रतन बचपन से ही टॉपर रहे। जैसलमेर में स्कूलिंग के बाद सीकर में NEET कोचिंग ली। पहली बार NEET क्लियर कर वेटरनरी कोर्स मिला, लेकिन परिवार ने नहीं भेजा। दूसरी बार फिरोजपुर में एडमिशन, तीसरी बार AIIMS राजकोट में MBBS। चाचा बताते हैं, "पहले तीन साल तो सब ठीक था, खुशी-खुशी पढ़ाई करता रहा। लेकिन बाद में परेशानी शुरू हुई। एक लड़की से दोस्ती थी, प्रेम प्रसंग नहीं था लेकिन उसी को लेकर कुछ तनाव हुआ, पांच सहपाठियों ने उसे कमरे नंबर 203 में बुलाकर पीटा, वीडियो बनाया और चुप रहने की धमकी दी।" मंगीलाल की आवाज भर्राई, "काश रतन ने हमें बताया होता... हम मदद कर पाते। वह क्या-क्या सह रहा होगा, सोचकर रातों की नींद उड़ जाती है।" रतन तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। छोटा भाई पिता की घड़ी की दुकान संभालता है, बीच का एक भाई RAS परीक्षा पास कर चुका है। पूरा मोहल्ला सदमे में डूबा है। "हमारा रतन... हमारा सपना... चला गया," चाचा रो पड़े।

रतन ने 27 जनवरी 2026 को उसी जगह ट्रेन के सामने कूदने की कोशिश की, लेकिन गाँव वालों ने देख लिया जिससे वह बच गया, उसके बाद काउंसलिंग हुई, मनोचिकित्सकीय दवाएं दी गईं। करीब डेढ़ महीने जैसलमेर में परिवार के साथ रहा।

चाचा कहते हैं पूरे परिवार ने कहा, "कोर्स छोड़ दो, घर पर रहो।" लेकिन रतन ने जिद की – "इंटर्नशिप पूरी करनी है, डॉक्टर बनना है।" परिवार मान गया, लेकिन अन्त दुखद हुआ। वापस लौटने के बाद उसने फिर ट्रेन के सामने कूद कर जान दे दी । मांगीलाल कहते हैं, "गुजरात प्रशासन ने हमारा पूरा सपोर्ट किया, पुलिस से पूरी मदद मिली लेकिन एम्स प्रशासन का रवैया बहुत निराशाजनक रहा, हमारी बात भी नहीं सुनी, जब रतन ने इनको पहली बार शिकायत दी थी उसी वक्त कारवाई की गई होती तो आज हमारा रतन जीवित होता....ख़ैर अब हमारी एक ही मांग है- दोषियों को सख्त सजा मिले, जो रतन के साथ हुआ आगे कभी किसी और बच्चे के साथ ना हो इसके लिए सख्त कदम उठाये जाए।" मांगीलाल ने रतन के साथ हुई घटना में किसी भी प्रकार के जाति आधारित हिंसा या उत्पीडन से इनकार किया और यह भी कहा कि यह जाति की वजह से किया गया टॉर्चर नहीं बल्कि आपसी रंजिश या किसी प्रकार की नाराज़गी से किया गया टार्चर था।"

 रतन ने जाने से पहले 17 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें पांच सहपाठियों पर लगातार शारीरिक पिटाई, मानसिक यातना और अपमान का आरोप लगाया। 15 मार्च को सभीआरोपी छात्र गिरफ्तार किए गए।
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