विश्व पुस्तक मेला: साहित्य के 'अक्षांश-देशांतर' से महिला क्रिकेट तक—राजकमल मंच पर 6 नई किताबों का भव्य लोकार्पण

विश्व पुस्तक मेला: कथाकार संजीव ने की आत्मकथा ‘अक्षांश-देशांतर’ की घोषणा, आलोचक वीरेंद्र यादव को श्रद्धांजलि और 6 नई किताबों का लोकार्पण
World Book Fair New Delhi, Rajkamal Prakashan
विश्व पुस्तक मेले में कथाकार संजीव ने किया अपनी आत्मकथा का ऐलान! जानिए राजकमल के मंच पर विमोचित हुईं चंदन पाण्डेय और वंदना मिश्र समेत 6 नई चर्चित किताबों के बारे में।
Published on

नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेले के सातवें दिन राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर आयोजित कार्यक्रम में चंदन पाण्डेय के कहानी-संग्रह ‘भूलना’, वंदना मिश्र की किताब ‘महिला क्रिकेट की कहानी’, सोनी पांडेय के उपन्यास ‘बंसवा फूले उजियार’, अरविन्द मोहन की दो किताबों―‘यह जो बिहार है’ और ‘हमर चम्पारण’, और कविता के कहानी-संग्रह ‘वो रेन लिली खिलने के दिन थे’ का लोकार्पण हुआ। साथ ही, ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार संजीव के समग्र साहित्य और रामस्वरूप किसान के कविता-संग्रह ‘फ़िज़ा के समन्दर में’ पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव और प्रोफ़ेसर राजेंद्र कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने इस अवसर पर कहा, हिन्दी भाषा के दो बड़े आलोचकों का इस तरह जाना बहुत दुखद है। उन्होंने कहा, प्रोफ़ेसर राजेंद्र कुमार अध्यापकों की उस पीढ़ी से आते हैं जिन्होंने पढ़ने-लिखनेवालों की एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया। उनका स्नेह और सान्निध्य हमेशा हमें मिलता रहा। वीरेंद्र यादव का राजकमल के साथ बहुत पुराना जुड़ाव रहा है।

उनकी पहली किताब राजकमल से ही प्रकाशित हुई थी। मेरी व्यक्तिगत रूप से भी उनसे गहरी मित्रता थी। उनके जैसी सुलझी सोच और स्पष्ट राय रखनेवाले लोग विरले ही होते हैं। उनके अचानक चले जाने से गहरा आघात पहुँचा है। वहीं कथाकार संजीव ने कहा, आज का दिन एक धक्का देकर चला गया। राजेंद्र कुमार और वीरेंद्र यादव ऐसे लेखक थे जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा, जिनके आसपास रहने से लगता था कि हाँ कोई साथ है। मुझे ऐसा लग रहा है कि आज दो कंधे हमसे दूर हो गए हैं। मैं अश्रुपूर्ण कंठ से उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर आयोजित ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम के पहले सत्र में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित कथाकार संजीव के समग्र साहित्य पर चर्चा हुई। इस दौरान लेखक ने आत्मकथा लिखने की घोषणा की। उन्होंने कहा, मैं इस वक़्त अपनी आत्मकथा लिख रहा हूँ जिसमें मैंने अपनी कमियों, आकांक्षाओं और जीवन के संघर्षों को दर्ज किया है। ‘अक्षांश-देशांतर’ नाम से यह आत्मकथा, संभवत: इसी वर्ष राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित होगी।

बातचीत के क्रम में मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा, इस आत्मकथा की घोषणा संजीव जी पाठकों, प्रशंसकों और सभी साहित्य प्रेमियों के लिए सुखद अनुभव का क्षण है। इस किताब के माध्यम से संजीव जी के जीवन को क़रीब से देखने, जानने और समझने को मिलेगा। इसी क्रम में उपन्यास फांस के बारे लेखक ने कहा, भारत के विभिन्न अंचलों में रहने वाले किसानों को मद्देनज़र मैंने यह उपन्यास लिखा था। आख़िर में कौन सी चीज़ है जो उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर करती है। इसे लिखने से पहले मैंने महाराष्ट्र के गाँवों में घूमकर वहाँ की टोपोग्राफी और अंचलों में रहने वाले लोगों की परेशानियों, संघर्षों आदि को क़रीब से देखा। मैंने वही लिखा जो हमारे समाज, राष्ट्र, देश और इंसानियत के लिए ज़रूरी था।

चर्चा के दौरान संपादक धर्मेंद्र ने कहा, संजीव जी अपनी रचनाओं में निरंतर नए-नए सीमांत खोजते रहे हैं। इन्होंने वह नहीं लिखा जो पाठक चाहते थे, इन्होंने वह लिखा जिसकी पाठकों और समाज को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

दूसरे सत्र में रामस्वरूप किसान के कविता-संग्रह ‘फ़िज़ा के समन्दर में’ पर चर्चा हुई। इस संग्रह की कविताएँ ग्रामीण जीवन के सूक्ष्म दृश्यों, आम जन की पीड़ाओं, व्यवस्था-जनित असहायताओं और मुखर राजनीतिक चेतना को एक साथ अभिव्यक्त करता है। बातचीत के क्रम में रामस्वरूप किसान ने कहा इस किताब में शामिल कविताएँ समसामयिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिखी गई है। वहीं मंच पर मौजूद संस्कृतिकर्मी रूणिचा राम ने कहा कि ये कविताएँ स्त्री-विमर्श से संबद्ध कविताएँ हैं, इनमें स्त्रियों का दर्द समाहित है। स्त्री-जीवन से जुड़े अहम सवालों को यह किताब केंद्र में रखती है। चर्चा के दौरान रामस्वरूप किसान ने संग्रह से कुछ कविताओं का पाठ भी किया।

तीसरे सत्र में चंदन पाण्डेय के कहानी-संग्रह ‘भूलना’ का लोकार्पण हुआ। यह कहानी-संग्रह उस भीषण होते समय और मानवीय संवेदनाओं के क्षरण का दस्तावेज़ है, जहाँ आँखें खुली हैं पर हम अपने सामने घटते विनाश को देखना और याद रखना भूलते जा रहे हैं। अणुशक्ति सिंह से बातचीत के क्रम में लेखक ने कहा, हम फिल्मों को देखकर बहुत प्रभावित थे उसी जीवन से निकलकर कहानी लिखने की प्रेरणा मुझे मिलती रही। अगर इस संग्रह के कहानियों की बात की जाए तो ‘भूलना’ मेरी खोज नहीं है, हमारे समय की खोज है। बड़े से बड़े दुख में भी लोग ख़ुश होने के पल खोज लेते हैं। इस दौरान लेखक ने संग्रह से एक कहानी का अंशपाठ भी किया।

चौथे सत्र में वंदना मिश्र की की किताब ‘महिला क्रिकेट की कहानी’ का लोकार्पण हुआ। यह पुस्तक भारत की महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक वर्ल्ड कप जीत के संदर्भ में भारतीय और वैश्विक महिला क्रिकेट के सफ़र, उपलब्धियों, जज़्बे और नियमों का समग्र दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है।

बातचीत के दौरान वंदना मिश्र ने कहा, मुझे खेल तब से पसंद आते हैं जब हमें पता ही नहीं था यह पुरुषों का है या औरतों का। पुरुष और महिला क्रिकेट को लेकर एक भेदभाव की प्रवृत्ति रही है। महिला क्रिकेट से जुड़े तमाम वो रिकॉर्ड्स जो लोगों की जानकारी में ही नहीं है, इस किताब के माध्यम से लोगों के सामने आयेंगे। साथ ही लेखक ने कहा, मैं चाहती हूँ कि जोख़िम उठाने का जज़्बा लड़कियों में ज़रूर आना चाहिए। अगर महिलाएँ चाहें तो ख़ुद अपने लिए राह बना सकती हैं और मंज़िल भी पा सकती हैं। आज महिलाएँ मैदान में आ चुकी हैं और अपना टैलेंट भी दिखा चुकी हैं। इस क्षेत्र में आने वाली नई लड़कियों को अब पुरुषों से नहीं बल्कि महिला क्रिकेटरों से सामना करना होगा क्योंकि उन्होंने महिला क्रिकेट को इस्टैबलिश कर दिया है।

अगले सत्र में सोनी पांडेय के उपन्यास ‘बंसवा फूले उजियार’ का लोकार्पण हुआ। यह उपन्यास संघर्षरत स्त्रियों की चेतना को हाशिए के समाज की शक्ति के रूप में रेखांकित करता है, जहाँ गाँव और कस्बाई जीवन में स्त्री अवहेलना और दमन की यथार्थपरक कथाएँ सामने आती हैं। चर्चा के दौरान लेखक ने कहा, इस किताब का शीर्षक एक लोकगीत से प्रेरित है। इस गीत को गाते हुए स्त्रियाँ समाज से प्रश्न करती हैं। जब चरित्र आपके पास ही घूमते-फिरते होते हैं तब उन्हें ढूँढना नहीं पड़ता। हमारे यहाँ के चरित्रों के सुख-दुख साझे होते हैं। महानगरों में लोग नजदीक रहकर भी बहुत दूर हैं। मैं ग्रामीण स्त्री रही, मैंने वहाँ जो देखा वही लिखा है। मेरे उपन्यास में लंबी यात्रा करती हुई, बहुत ही आम स्त्री है लेकिन सीधे सवाल करती हैं, और सशक्त हैं।

छठे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन की दो किताबों―‘यह जो बिहार है’ और ‘हमर चम्पारण’ का लोकार्पण हुआ। ये किताबें बिहार और चंपारण के स्वभाव, इतिहास, सामाजिक-आर्थिक यथार्थ और सांस्कृतिक चेतना को सामने रखते हुए उनके वास्तविक स्वरूप और उस पर गर्व करने के कारणों को रेखांकित करती हैं। चर्चा के दौरान लेखक ने कहा कि चंपारण को लेकर दो बातें सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं—एक गांधी और दूसरा मटन। बिहार के भोजन में मटन ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। चंपारण में तीन लौह स्तंभ हैं और वहाँ एक विलक्षण मंदिर भी है, जिसकी स्थिति फिलहाल अच्छी नहीं है। इसके अलावा वहाँ की ध्रुपद गायकी भी प्रसिद्ध है। इन सभी कारणों से चंपारण का विशेष महत्व है। मेरी योजना थी कि इस विषय पर गहराई से शोध करूँ और मैं चाहूँगा कि अन्य लोग भी चंपारण पर काम करें। चंपारण पर अध्ययन के दौरान मैंने पाया कि लगभग सभी महान रचनाकारों की लेखनी में चंपारण का उल्लेख मिलता है।

अंतिम सत्र में कथाकार कविता के नए कहानी-संग्रह ‘वो रैन लिली खिलने के दिन थे’ का लोकार्पण हुआ। इस दौरान वरिष्ठ लेखक ममता कालिया, वंदना राग व मनोज कुमार पाण्डेय लेखक मंच पर उपस्थित रहे। इस संग्रह की कहानियों में लेखक ने बाहरी घटनाओं की बजाय स्त्री के उस भीतरी भूगोल को उभारा है, जहाँ मन, स्मृति और विवेक सामाजिक संरचनाओं से सतत संवाद और संघर्ष में रहते हुए नई अर्थवत्ताओं और नए रास्तों की तलाश करते हैं। चर्चा के दौरान कविता ने कहा कि लिखना स्वयं को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम हैं। मुझे ख़ुशी है कि मैं इस किताब के माध्यम से अपने आपको अभिव्यक्त कर पा रही हूँ। इस कहानी-संग्रह में मैंने काफ़ी विषयों को समेटने की कोशिश की है। जहाँ संभावना है, मुक्ति है। मुझे लगता है यह किताब आपको नए और संभावनाशील समाज की ओर लेकर जाएगी। स्त्रियों का समाज बराबरी का होना चाहिए मेरी कहानी यही प्रतिमान गढ़ती है।

World Book Fair New Delhi, Rajkamal Prakashan
इतिहास के पन्नों से 'मांडवी' और 'थेरियों' की वापसी: विश्व पुस्तक मेले में गूंजे स्त्री-प्रतिरोध और हाशिए के सवाल
World Book Fair New Delhi, Rajkamal Prakashan
न्यू दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2026 में पत्रकार अंकित पचौरी की पुस्तक ‘आदिवासी रिपोर्टिंग’ प्रदर्शित
World Book Fair New Delhi, Rajkamal Prakashan
विश्व पुस्तक मेला: कैलाश सत्यार्थी की 'दियासलाई' और युवा कवियों का 'आगाज़', साहित्य प्रेमियों के लिए यादगार दिन

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com