
नई दिल्ली- शनिवार दोपहर को शुरू किये प्रदर्शन की समय सीमा खत्म होने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर मंतर पर अपना धरना जारी रखने की घोषणा की है और संघर्षरत प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। पार्टी ने प्रदर्शन की अवधि बढ़ाने की औपचारिक मांग की थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने अस्वीकार कर दिया। दिल्ली पुलिस ने लाउड स्पीकर पर अनाउंस करवाया कि शाम 5 बजे प्रदर्शन का समय ख़त्म हो चुका है और इसके बाद विरोध करना अवैध है।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और देशभर के चिंतित नागरिकों से अपील की है कि वे शाम 6 बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर इस आंदोलन में शामिल हों। शाम होते होते धरना स्थल पर भरी भरकम पुलिस बल तैनात किया गया, लोगों को अंदर आने से रोक दिया गया।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, छात्रों और युवाओं की समस्याओं तथा राजनीतिक नेतृत्व की कथित नाकामी को लेकर बढ़ती जन नाराजगी के बीच कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य और बिना शर्त मांग है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। प्रदर्शनकारियों ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को घेर लिया है ताकि पुलिस द्वारा उनकी संभावित गैरकानूनी हिरासत को रोका जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने थालियाँ पीट पीट कर ' गो प्रधान गो ' के नारे लगाये. अभिजीत दीपके ने चुटकी ली कि वे विज्ञान समझते हैं लेकिन "जिस तरह से कोरोना में लोगों ने ताली और थाली पीट कर कोरोना वायरस को भगाया था वैसे ही हम भी शिक्षा मंत्री को जाने को कहेंगे क्योंकि वे भी एजुकेशन सिस्टम में एक वायरस हैं।"
दीपके ने दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की आशंका के मद्देनजर सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया और युवाओं से अपील की कि सभी अपने अपने जिलों में शांतिपूर्ण 'जेल भरो आन्दोलन' शुरू कर दें.
समर्थकों को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा, “हम लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं और शांतिपूर्ण एवं अहिंसक प्रदर्शन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। फिर भी, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, हम जंतर मंतर से नहीं हटेंगे।”
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दिल्ली धरना स्थल पर 'द मूकनायक' की आकृति धवन से बात करते हुए कहा," NEET की तैयारी करने वाले 13 बच्चे सुसाइड कर चुके हैं, क्या उनके जान की कोई कीमत नहीं?
पार्टी ने कहा कि यह आंदोलन अब एक संगठन से आगे बढ़कर देश के लाखों युवाओं की सामूहिक निराशा और आकांक्षाओं का प्रतीक बन गया है। साथ ही, दिल्ली पुलिस से सरकार से संवाद स्थापित करने के लिए संचार चैनल बनाने की अपील की गई है।
अभिजीत दीपके ने कहा, “पुलिस मुझे गिरफ्तार करने वाली है। मैं आप सबसे अपील करता हूं , अगर मैं गिरफ्तार भी हो जाऊं तो भी इस शांतिपूर्ण राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन को मत रोकें!”
कॉकरोच जनता पार्टी ने जोर दिया कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा तथा सरकार से छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और नागरिकों की चिंताओं पर संवाद करने की मांग की। पार्टी ने सभी समर्थकों, छात्रों, बेरोजगार युवाओं और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।
वहीं, राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने भी नीट परीक्षा से पहले NTA की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा:
“21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम से पहले ही NTA की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां यह साबित करती हैं कि NTA परीक्षा कराने में असफल है। नागपुर के एक छात्र ने पिछले एक महीने से NEET Re-Exam की तैयारी की थी। लेकिन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले जब उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो उसका परीक्षा केंद्र अबू धाबी आवंटित पाया गया। आखिर ऐसी गंभीर गलती कैसे हो सकती है? कल किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र तक न पहुंच पाने की समस्या का सामना नहीं करना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि NTA देश के छात्रों और उनके अभिभावकों के धैर्य की परीक्षा ले रही है। जो व्यवस्था एक छात्र को उसके अपने शहर या राज्य में परीक्षा केंद्र देने में सक्षम नहीं है और उसे विदेश का केंद्र आवंटित कर देती है, उसे परीक्षा आयोजित करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”
जाखड़ ने आगे कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुरुआत से ही छात्रों के साथ खड़े रहे हैं। कोटा में छात्र आंदोलन के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि आज की शिक्षा व्यवस्था युवाओं के पैसे, समय और मानसिक शांति की कीमत वसूलने वाली व्यवस्था बन गई है।
NSUI अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा, “NSUI छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय या खिलवाड़ नहीं होने देगी। जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और NTA जैसी विफल संस्था को बैन नहीं करते, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
नीट परीक्षा से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी और NSUI दोनों ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NTA की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इससे शिक्षा मंत्रालय पर दबाव और बढ़ गया है।
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