
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों के बीच अब एक नया नाम तेजी से चर्चा में है। “कॉकरोच जनता पार्टी” यानी CJP ने भोपाल में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य में औपचारिक एंट्री की घोषणा की। राजधानी भोपाल में आयोजित इस प्रेस वार्ता में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा कार्यकर्ता मयंक ने पार्टी और आंदोलन की विचारधारा सामने रखी। कार्यक्रम में NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्र, नर्सिंग परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का सामना कर चुकी छात्राएं भी मौजूद रहीं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान युवाओं ने मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और संस्थागत जवाबदेही की कमी ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है। मयंक ने कहा कि CJP खुद को पारंपरिक राजनीतिक दल के रूप में पेश नहीं कर रही, बल्कि यह “Gen-Z की प्राथमिकताओं और असंतोष” से पैदा हुआ एक युवा आंदोलन है। उनका कहना था कि यह किसी एक पार्टी, नेता या विचारधारा के विरोध का मंच नहीं, बल्कि उस “शिथिल सिस्टम” के खिलाफ आवाज है जिसने युवाओं को निराश किया है।
युवा सवाल पूछते हैं तो आवाज दबाने की कोशिश होती है
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मयंक ने आरोप लगाया कि जब युवा पेपर लीक और भर्ती घोटालों जैसे मामलों पर सवाल उठाते हैं तो उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार सोशल मीडिया अकाउंट्स तक बैन कर दिए जाते हैं और आंदोलनकारी युवाओं को ट्रोलिंग तथा दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब सरकारी संस्थाएं अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से बच नहीं सकतीं और युवाओं को जवाब देना होगा।
मयंक ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही पार्टी की कोर कमेटी घोषित की जाएगी। उन्होंने CJP पर विदेशी फॉलोअर्स और पाकिस्तानी अकाउंट्स से जुड़े आरोपों को सरकारी दुष्प्रचार बताया। उनके अनुसार यह आंदोलन युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष और व्यवस्था से मोहभंग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश में अभियान शुरू किया गया है।
“हम सत्ता नहीं, पूरी व्यवस्था की खामियों से लड़ रहे”
पत्रकारों से बातचीत में मयंक ने कहा कि वह स्वयं सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी हैं और NEET जैसी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य अधर में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि जांच एजेंसियां गिरफ्तारियां कर रही हैं, परीक्षाएं स्थगित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग गड़बड़ियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि CJP का संघर्ष किसी एक सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की खामियों के खिलाफ है। इसमें कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और विपक्ष सभी की जवाबदेही तय करने की बात कही जा रही है। उनका दावा था कि आने वाले समय में आंदोलन अपना विस्तृत विजन और संगठनात्मक ढांचा सार्वजनिक करेगा।
उपस्थिति दर्ज कराने के लिए की प्रेस कॉन्फ्रेंस
जब उनसे पूछा गया कि पार्टी का विजन और मिशन अभी स्पष्ट नहीं है, फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की गई, तो मयंक ने कहा कि उनका उद्देश्य आंदोलन की उपस्थिति दर्ज कराना और युवाओं को सक्रिय करना था। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा व्यवस्था से नाराज़ तो हैं, लेकिन सक्रिय रूप से जुड़ नहीं रहे। CJP ऐसे युवाओं को संगठित करना चाहती है।
मयंक ने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी बात रखेगा और संविधान पर विश्वास करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में चुनाव लड़ने का निर्णय कोर कमेटी करेगी, लेकिन संविधान हर सक्षम युवा को राजनीति में आने का अधिकार देता है, केवल राजनीतिक परिवारों को नहीं।
महात्मा गांधी ने भी विदेश से आंदोलन की वैचारिक शुरुआत की थी
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं। इस पर सवाल पूछे जाने पर मयंक ने कहा कि किसी आंदोलन का उद्देश्य अधिक महत्वपूर्ण होता है, स्थान नहीं। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी ने भी अपने आंदोलन की वैचारिक नींव दक्षिण अफ्रीका में रखी थी।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में आंदोलन सीमाओं से बंधे नहीं हैं और दुनिया के किसी भी हिस्से से वैचारिक नेतृत्व संभव है।
‘मेलोडी’ चॉकलेट का क्या था संदेश?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान “मेलोडी” चॉकलेट भी चर्चा का विषय बनी रही। इस पर मयंक ने कहा कि इसका प्रतीकात्मक अर्थ था- “मेलोडी खाइए और स्वयं जान जाइए।” उनका कहना था कि जब तक कोई व्यक्ति खुद व्यवस्था का हिस्सा बनकर उसे करीब से नहीं देखता, तब तक उसकी सच्चाई और कड़वाहट समझ नहीं सकता।
CJI की टिप्पणी के बाद शुरू हुई पहल
कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा तब शुरू हुई जब 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा था कि कुछ युवा “कॉकरोच की तरह भटक रहे हैं”, जिन्हें रोजगार नहीं मिल रहा और वे सोशल मीडिया या एक्टिविज्म के जरिए हर किसी पर हमला कर रहे हैं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और अगले ही दिन “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से डिजिटल पहल शुरू हुई। बाद में CJI ने बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और फिलहाल अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन में मास्टर्स कर रहे हैं।
अभिजीत 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट भी रह चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने मीम आधारित डिजिटल कैंपेन पर काम किया था। बाद में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। सोशल मीडिया पर वे किसान आंदोलन, महंगाई और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं।
वेबसाइट पर खुद को “आलसी और बेरोजगारों की आवाज” बताती है CJP
CJP की वेबसाइट पर खुद को उन लोगों की राजनीतिक पार्टी बताया गया है जिन्हें व्यवस्था ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। वेबसाइट पर लिखा गया है- “पांच मांगें, कोई स्पॉन्सर नहीं, लेकिन बड़ा और जिद्दी झुंड।”
पार्टी का नारा है- “सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी।” वेबसाइट पर मैनिफेस्टो, विजन और सदस्यता से जुड़े सेक्शन भी मौजूद हैं। पार्टी ने सदस्य बनने के लिए चार योग्यताएं भी बताई हैं- बेरोजगार होना, आलसी होना, हमेशा ऑनलाइन रहना और प्रोफेशनली शिकायत करने की क्षमता।
मैनिफेस्टो में बड़े राजनीतिक वादे
CJP ने अपने मैनिफेस्टो में कई विवादित और चर्चित वादे किए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि वह सत्ता में आती है तो रिटायर्ड चीफ जस्टिस को राज्यसभा भेजने जैसी “इनाम वाली राजनीति” खत्म की जाएगी।
इसके अलावा किसी वैध वोट को डिलीट करने पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई की बात कही गई है। पार्टी ने महिलाओं को संसद और कैबिनेट सहित सभी स्तरों पर 50 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा भी किया है।
मैनिफेस्टो में अंबानी और अडाणी समूह से जुड़े मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने तथा कथित “गोदी मीडिया” एंकरों के बैंक खातों की जांच कराने की बात भी कही गई है। वहीं दलबदल करने वाले विधायकों और सांसदों को 20 वर्षों तक किसी सार्वजनिक पद से दूर रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
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