
भोपाल। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन की गूंज अब मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी सुनाई देने लगी है। NEET पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राज्य के 20 जिलों में छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं धरना दिया जा रहा है तो कहीं रैली निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा रहा है। शुक्रवार को इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, धार, मऊगंज, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली, भिंड, टीकमगढ़, शाजापुर, सतना, सीधी, रतलाम, रीवा, बैतूल, उमरिया, बड़वानी और श्योपुर सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदेश में सबसे लंबा और सबसे बड़ा छात्र आंदोलन इंदौर में देखने को मिल रहा है। शहर के टंट्या भील चौराहे पर पिछले 25 दिनों से छात्र लगातार धरने पर बैठे हैं। 30 जून को केवल पांच छात्रों ने इस आंदोलन की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ यह प्रदर्शन एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। अब प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक यहां पहुंचकर अपना समर्थन दे रहे हैं। 14 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली थी और कई घंटों तक धरना दिया। लगातार बारिश के बावजूद छात्रों ने प्रदर्शन स्थल नहीं छोड़ा। आंदोलन स्थल पर पुलिस प्रशासन ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी कर रहा है और प्रदर्शन में शामिल लोगों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी पहचान कर उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है।
इंदौर के आंदोलन को कई राजनीतिक नेताओं का भी समर्थन मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधायक हीरालाल अलावा सहित कई नेताओं ने धरना स्थल पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनके आंदोलन का समर्थन किया। इस दौरान जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अरुण बड़ोले से वीडियो कॉल के माध्यम से भी बातचीत की गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल NEET पेपर लीक का मुद्दा नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है।
भोपाल में भी जारी आंदोलन
राजधानी भोपाल में भी आंदोलन लगातार जारी है। एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे पर छात्र पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार इस मामले में जवाबदेही तय नहीं करती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा ऐसा पोस्टर लेकर पहुंची, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर व्यंग्य करते हुए "कुछु-पुछु" लिखा गया था। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना। छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
ग्वालियर में छात्र आंदोलन को लेकर दो अलग-अलग पक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। एक समूह दिल्ली के जंतर-मंतर पर उठाई जा रही मांगों के समर्थन में कलेक्ट्रेट पहुंचा, जबकि दूसरा समूह आंदोलन के दौरान लगाए गए कथित देशविरोधी नारों का विरोध करने के लिए प्रदर्शन कर रहा था। दोनों पक्षों के एक ही स्थान पर पहुंचने से कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई, हालांकि प्रशासन की मौजूदगी में मामला शांत रहा। दोनों पक्षों ने प्रशासन को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे और अपनी-अपनी बात रखी।
उधर जबलपुर में छात्र आंदोलन ने एक अलग मोड़ ले लिया। यहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध में कुछ लोगों ने 'लाल हिट जनता पार्टी' नाम से एक संगठन बनाकर प्रदर्शन किया। मालवीय चौक पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अपने सीने पर पोस्टर लगाकर CJP की कार्यशैली का विरोध किया। संगठन के सदस्य अभय श्रीवास्तव ने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह उचित हैं और परीक्षा प्रणाली में सुधार होना चाहिए, लेकिन विरोध का तरीका सही नहीं है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक विरोध होना चाहिए, लेकिन किसी भी ऐसे तरीके से बचना चाहिए जिससे समाज में गलत संदेश जाए।
मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी छात्र संगठनों ने धरना, प्रदर्शन और रैलियां आयोजित कीं। कई स्थानों पर कलेक्टरों और एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की मांग उठाई। कई जिलों में स्थानीय सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में भाग लिया।
इस बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन लगातार जारी है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। इसी बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करने का निर्णय लिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। आंदोलनकारी इसे अपनी लड़ाई की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं, हालांकि उनका कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली से शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल राजधानी तक सीमित नहीं रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है। आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि छात्र संगठन लगातार नए जिलों में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर प्रशासन भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क नजर आ रहा है। फिलहाल प्रदेश में छात्र आंदोलन राजनीतिक और सामाजिक बहस का प्रमुख विषय बन चुका है।
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