दिल्लीः सीवर सफाई के दौरान थम नहीं रहा मौत का सिलसिला, जानिए क्या है कारण?

ताज़ा मामला रोहिणी सेक्टर 10 में स्थित डी मॉल का है। यहां गत रविवार को सीवर साफ करने उतरे दो मजदूरों में से एक की मौत हो गई। जबकि दूसरी की हालत गंभीर बनी हुई है।
सांकेतिक तस्वीर- सीवर सफाई
सांकेतिक तस्वीर- सीवर सफाई फोटो साभार- indiatoday

नई दिल्ली। एक ओर देश और दुनिया में नई और आधुनिक तकनीकों के जरिए सबसे मुश्किल काम को भी आसान बनाने का दावा किया जा रहा है दूसरी ओर इसी दौर में पुराने तरीके से सीवर की सफाई करने के चलते अक्सर लोगों की जान चली जाती है। यह अपने आप में समूचे सरकारी रवैये पर एक तल्ख सवाल है कि क्या इस तरह से होने वाली मौतें सरकार की नजर में कोई अहमियत नहीं रखतीं। इस मुद्दे पर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है कि इस काम में लगे मजदूरों को लेकर समूची व्यवस्था के स्तर पर उदासीनता क्यों दिखाई देती है। ऐसे ही कितने मामले हाल ही में हुए हैं।

ताज़ा मामला रोहिणी सेक्टर 10 में स्थित डी मॉल का है। यहां गत रविवार को सीवर साफ करने उतरे दो मजदूरों में से एक की मौत हो गई। जबकि दूसरी की हालत गंभीर बनी हुई है।

पत्रिका में छपी एक खबर के अनुसार परिवार के सदस्यों का कहना है कि हरे कृष्णा प्रसाद 3 साल में इस मॉल में हाउसकीपिंग का काम करते थे। रविवार को वह उनके साथ काम करने वाले एक साथी माल परिसर में सीवर साफ करने के लिए उतरे थे। इस दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दोनों ही सीवर में बेहोश होकर गिर गए। वहां मौजूद लोगों की मदद से उन्हें बाहर निकाल गया और अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में डॉक्टर ने हरे कृष्णा प्रसाद को मृत् घोषित कर दिया। 13 मई को कृष्ण की शादी के 2 साल पूरे होने वाले थे। लेकिन परिवार को उनकी मौत की खबर मिली, इसके बाद से ही घर में अब सन्नाटा पसरा हुआ है। 

सांकेतिक तस्वीर- सीवर सफाई
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इस मामले में प्रशांत विहार थाना पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मृतक जिस कंपनी के तहत साफ-सफाई का काम कर रहे थे। उस कंपनी के राज्यपाल, गुरदीप और अमित दुबे को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 284, 337 और 304 ए के तहत मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सीवर लाइन में उतारने के दौरान जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे।

राहत दूत बनकर पहुंचे दलबीर सिंह 

सीवर साफ करने उतरे हरे कृष्णा प्रसाद और उनके साथी जब सीवर में ही बेहोश होकर गिर गए थे। उस समय अपने परिवार के साथ मॉल घूमने के लिए दलबीर सिंह पहुंचे थे। इसी दौरान वहां से निकलते हुए पता चला कि बाहर सीवर में दो व्यक्ति गिर गए हैं। वहां लोगों की भीड़ थी। लेकिन बिना अपनी जान की  परवाह किए दलबीर दूसरे लोगों की मदद से सीवर के अंदर घुस गये। दोनों मजदूरों को वहां से तत्काल निकाल लिया। रेस्क्यू टीम ने दोनों को अस्पताल पहुंचा दिया। लेकिन इसके बाद भी हरे कृष्ण की जान नहीं बच पायी।

द मूकनायक ने इस मामले से संबंधित अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, उन्होंने बताया कि अभी जांच चल रही है, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।

लखनऊ का मामला 

यूपी की राजधानी लखनऊ में अभी हाल में जलकल निगम की लापरवाही से बिना सेफ्टी के 20 फीट गहरे सीवर में उतरे दो कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों कर्मचारियों को बेसुध हालत में बाहर निकाला, जिसमे एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

चंदौली का मामला 

उत्तर प्रदेश के चंदौली में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। इस दौरान जहरीली गैस से चार लोगों का दम घुट गया। मृतकों में मकान मालिक का बेटा और तीन सफाईकर्मी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने चारों लोगों को सेप्टिक टैंक से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई थी।

सफाईकर्मियों की मौत का बढ़ता आँकड़ा

आंकड़े बताते हैं कि सीवर सफाई के दौरान पिछले दिनों में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। पिछले पांच सालों के सरकारी आंकड़ों के अनुसार सीवर सफाई के दौरान 2019 में 117 मौतें, 2020 में 22 मौतें, 2021 में 58 मौतें, 2022 में 66 मौतें, 2023 में 09 मौतें दर्ज की गईं। ज्यादातर मौतों में ठेकेदार स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर रिपोर्ट दर्ज होने ही नहीं देते। पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में सीवर के गहरे मेनहोल में घुसने से एक सफाई कर्मचारी की मौत जिस लापरवाही से हुई थी उससे साफ जाहिर है कि अन्य जगहों पर उनकी स्थिति कितनी बदतर होगी।

क्या है सीवर सफाई का कानून? 

कानून के मुताबिक, सफ़ाई एजेंसियों को सफ़ाई कर्मचारियों को मास्क, दस्ताने जैसे सुरक्षात्मक उपकरण देना ज़रूरी है। हालांकि, अक्सर एजेंसियां ऐसा नहीं करतीं और कर्मचारियों को बिना किसी सुरक्षा के सीवरों में उतरना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट की 2013 की गाइडलाइन में सीवर सफाई के लिए 45 प्रकार के सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाने की बात की गई है, लेकिन वह मात्र कागजों तक सीमित है।

हकीकत यह है कि सफाईकर्मियों के पास हैंड ग्लब्स तक नहीं होता। आक्सीजन सिलेंडर और अन्य सुरक्षा उपकरण तो दूर की बात है। वर्ष 2013 में संसद ने मैनुअल स्कैवेंजर्स और उनके पुनर्वास के रूप में रोज़गार का निषेध अधिनियम बनाया। इस अधिनियम के अंतर्गत यह प्रावधान है कि सीवर लाइनों या सेप्टिक टैंकों की सफ़ाई के लिए किसी भी व्यक्ति को सीवर में खतरनाक तरीके से उतारना या शामिल करना गैरकानूनी है।

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