4 हत्या, 27 हत्या के प्रयास आरोपी उम्मीदवार जीते चुनाव, आपराधिक छवि वाले नेताओं की संख्या पहले से अधिक!

इस बार चार उम्मीदवारों ने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 302 के तहत अपने ऊपर हत्या से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी दी है और 27 ने आइपीसी की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास से संबंधित मामले दर्ज होने की घोषणा की है।
46 प्रतिशत नवनिर्वाचित सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले,
46 प्रतिशत नवनिर्वाचित सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले,ग्राफिक- द मूकनायक

नई दिल्ली: लोकसभा 2024 के नवनिर्वाचित 543 सदस्यों में से 251 (46 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसा चुनाव विश्वेषण करने वाली संस्था 'एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स' (एडीआर) ने अपने विश्लेषण में पाया है। यह निचले सदन में आपराधिक आरोपों का सामना करने वाले सदस्यों की पिछले कई दशकों की सबसे अधिक संख्या है।

साल 2019 में कुल 233 नवनिर्वाचित सांसदों (43 फीसद) ने अपने विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की थी, 2014 में 185 (34) फीसद), 2009 में 162 (30 फीसद) तथा 2004 में 125 (23 फीसद) ने आपराधिक मामलों की घोषणा की थी। विश्वेषण के मुताबिक 2009 के बाद से आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा करने वाले सांसदों की संख्या में 55 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। 

नवनिर्वाचित हुए 251 सदस्यों में से 170 (31) फीसद) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं जिनमें बलात्कार, हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले हैं। गंभीर अपराध के मामलों वाले सदस्यों की संख्या 2009 से 124 फीसद बढ़ गई है। इस बार चार उम्मीदवारों ने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 302 के तहत अपने ऊपर हत्त्या से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी दी है और 27 ने आइपीसी की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास से संबंधित मामले दर्ज होने की घोषणा की है।

नवनिर्वाचित हुए 15 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामले घोषित किए हैं, जिनमें दो पर आइपीसी की धारा 376 के तहत बलात्कार का आरोप है। एडीआर के अनुसार, 18वीं लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बरकरार भाजपा के 240 विजयी उम्मीदवारों में से 94 (39 फीसद) ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। 

इसके मुताबिक कांग्रेस के 99 विजयी उम्मीदवारों में से 49 (49 फीसद) ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं और समाजवादी पार्टी के 37 उम्मीदवारों में से 21 (45 फीसद) ने अपने खिलाफ आपराधिक आरोप होने की जानकारी दी है।

तृणमूल कांग्रेस के 29 में से 13 (45 फीसद), द्रमुक के 22 में से 13 (59 फीसद), तेलगू देसम पार्टी के 16 में से आठ (50 फीसद) और शिवसेना के सात विजयी उम्मीदवारों में से पांच (71 फीसद) ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं। विश्लेषण में पाया गया कि 63 (26 फीसद) भाजपा उम्मीदवार, 32 (32 फीसद) कांग्रेस उम्मीदवार और 17 (46) फीसद) समाजवादी पार्टी उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा अपने हलफनामों में की है।

इसमें कहा गया है कि नवनिर्वाचित सदस्यों में से सात (24 फीसद) तृणमूल सदस्यों, छह (27) फीसद) द्रमुक उम्मीदवार, पांच (31 फीसद) तेलगू देसम पार्टी उम्मीदवार और चार (57 फीसद) शिवसेना उम्मीदवार गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

121 निरक्षर उम्मीदवारों को मिली हार

लोकसभा चुनाव 2024 में एक और दिलचस्प बात हुई कि इस बार कुल 121 निरक्षर उम्मीदवार खड़े हुए हुए थे और सब के सब हार गए। एडीआर के एक विश्लेषण में यह बात सामने आई है। एडीआर ने बताया कि अपने चुनावी हलफनामों में खुद को 'निरक्षर' बताने वाले सभी 121 प्रत्याशी चुनाव हार गए हैं।

चुनाव विश्लेषण करने वाली इस संस्था के अनुसार इस लोकसभा चुनाव में लगभग 105 या 19 फीसद विजयी उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा 5 से 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 420 या 77 फीसद नवनिर्वाचित सदस्यों ने स्नातक या उससे ऊपर की डिग्री होने की घोषणा की है। 

एडीआर ने कहा कि 17 नवनिर्वाचित लोकसभा सदस्य डिप्लोमा धारक हैं और एक ही सदस्य 'केवल साक्षर' हैं। विश्लेषण के अनुसार दो विजयी प्रत्याशियों की शिक्षा पांचवीं कक्षा तक रही, वहीं चार नवनिर्वाचित सदस्य ने आठवीं तक पढ़ाई की है।

34 ऐसे विजयी उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में घोषणा की थी कि वे दसवीं कक्षा तक पढ़े हैं और 65 ऐसे नवनिर्वाचित सदस्य 12वीं तक की पढ़ाई कर चुके हैं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक पहली लोकसभा से लेकर 11वीं लोकसभा (1996-98) तक स्नातक डिग्री रखने वाले सांसदों का अनुपात लगातार बढ़ता रहा है।

विश्लेषण से पता चलता है कि नई लोकसभा में पांच फीसद सांसदों के पास डाक्टरेट की डिग्री है जिनमें तीन महिलाएं हैं। पीआरएस के एक अन्य विश्वेषण के अनुसार इस चुनाव में निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचने वाले 543 सांसदों में से सबसे अधिक सदस्यों ने कृषि और समाजसेवा को अपना पेशा बताया है। अठारहवीं लोकसभा के लगभग सात प्रतिशत सदस्य वकील हैं और चार फीसद चिकित्सा पेशे से जुड़े हैं।

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