लखनऊ में बाबा साहब की अस्थि कलश हटाने का विवाद गरम; आजाद ने हजरतगंज पहुंचकर खोला मोर्चा

बहुजन समाज का मानना है कि विधानसभा के ठीक सामने स्थित इस स्थल को हटाना उनकी आस्था पर सीधा हमला होगा। 6 दिसंबर बाबा साहब के महापरिनिर्वाण दिवस पर यहां लाखों अनुयायी पहुंचते हैं।
आजाद ने कहा कि उन्हें कई पत्रों और सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार लोक भवन और विधानसभा के सामने स्थित इस स्थल को हटाकर अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह षड्यंत्र लोक भवन को विस्तार देने के लिए रचा जा रहा है।
आजाद ने कहा कि उन्हें कई पत्रों और सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार लोक भवन और विधानसभा के सामने स्थित इस स्थल को हटाकर अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह षड्यंत्र लोक भवन को विस्तार देने के लिए रचा जा रहा है।
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लखनऊ: आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बीते दिनों लखनऊ के हजरतगंज स्थित 10 विधानसभा मार्ग पर बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा एवं अस्थि कलश स्थल का दौरा किया। यहां उन्होंने बाबा साहब की अस्थियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और किसी भी कीमत पर स्थल को स्थानांतरित करने के प्रयास का विरोध किया। आजाद ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस पवित्र स्थल को हटाने की कोशिश की तो उनकी पार्टी सड़कों से लेकर संसद तक पुरजोर आंदोलन करेगी।

चंद्रशेखर आजाद ने इस स्थल को “तीर्थ” बताते हुए कहा, “डॉ. सविता अंबेडकर जी ने यहां बाबा साहब की अस्थियां स्थापित की हैं। बाबा साहब संविधान के निर्माता, लोकतंत्र के जनक और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के रक्षक हैं। यहां पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं।”

आजाद ने कहा कि उन्हें कई पत्रों और सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार लोक भवन और विधानसभा के सामने स्थित इस स्थल को हटाकर अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह षड्यंत्र लोक भवन को विस्तार देने के लिए रचा जा रहा है।

उन्होंने कहा, “यह बोधि वृक्ष और धम्मचक्र का स्थल है। यहां करोड़ों बाबा साहब और तथागत बुद्ध के अनुयायियों की आस्था जुड़ी हुई है। सरकार भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। हम सत्ता परिवर्तन यात्रा की तैयारी में हैं, लेकिन इस मुद्दे पर चुप नहीं रह सकते।”

आजाद ने याद दिलाया कि पहले भी बोधि वृक्ष को हटाने और उसके चबूतरे को तोड़ने का प्रयास हुआ था, जिसका उनके साथियों ने मजबूत विरोध किया था। उन्होंने कहा, “सरकार को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। हम अंबेडकरवादी लोग इस स्थल को किसी भी कीमत पर छीनने नहीं देंगे। विकास के नाम पर आस्था को कुचलने की कोशिश स्वीकार नहीं होगी।”

आजाद ने याद दिलाया कि पहले भी बोधि वृक्ष को हटाने और उसके चबूतरे को तोड़ने का प्रयास हुआ था, जिसका उनके साथियों ने मजबूत विरोध किया था।
आजाद ने याद दिलाया कि पहले भी बोधि वृक्ष को हटाने और उसके चबूतरे को तोड़ने का प्रयास हुआ था, जिसका उनके साथियों ने मजबूत विरोध किया था।

चंद्रशेखर आजाद ने राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा, “अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, तो क्या पूरे उत्तर प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों की मूर्तियां और पवित्र वस्तुएं एक जगह शिफ्ट कर दी जाएं? हर जगह की अपनी महत्ता है। बाबा साहब की अस्थियों का यह स्थल ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार अगर यहां नवीनीकरण या विकास कार्य करना चाहती है तो करे, लेकिन अस्थि कलश और बोधि वृक्ष को हटाने की कोशिश न करे। हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आस्था के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी।”

बहुजन समाज इस मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील है क्योंकि बाबा साहब की अस्थियां उनके लिए केवल प्रतीक नहीं, बल्कि पवित्र अवशेष हैं। 1956 में महापरिनिर्वाण के बाद उनके अस्थि कलश के कुछ हिस्से देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित किए गए थे, जिनमें लखनऊ के दो प्रमुख स्थल शामिल हैं।

  1. डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल (गोमती नगर): यहां मुख्य गुंबद के नीचे अस्थि कलश संरक्षित है। पूरी संरचना लाल बलुआ पत्थर से बनी है।

  2. 10 विधानसभा मार्ग (हजरतगंज) स्थित बोधिसत्व अंबेडकर महासभा: यहां डॉ. सविता अंबेडकर द्वारा स्थापित अस्थि कलश, के.आर. नारायणन द्वारा रोपित बोधि वृक्ष और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं हैं।

बहुजन समाज का मानना है कि विधानसभा के ठीक सामने स्थित इस स्थल को हटाना उनकी आस्था पर सीधा हमला होगा। महापरिनिर्वाण दिवस (6 दिसंबर) पर यहां लाखों अनुयायी पहुंचते हैं।

चंद्रशेखर आजाद ने सभी अंबेडकरवादी संगठनों, चाहे किसी भी पार्टी से जुड़े हों, से अपील की कि वे पार्टी से ऊपर उठकर इस आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने कहा, “बाबा साहब की विरासत बचाने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। अगर सरकार ने हस्तक्षेप किया तो पूरा उत्तर प्रदेश गूंज उठेगा।”

वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस स्थल को शिफ्ट करने संबंधी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन चंद्रशेखर आजाद का दौरा और उनका सख्त रुख मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी से जुड़ी अंबेडकर वाहिनी के महासचिव राम बाबू सुदर्शन ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार के इस कदम को "बहुजन समाज के सम्मान, आत्म-सम्मान और आस्था पर सीधा हमला" बताया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा जगह, जो सीधे UP विधानसभा के सामने स्थित है, लाखों दलितों, पिछड़े वर्गों और संविधान समर्थकों के लिए गहरा भावनात्मक महत्व रखती है।

सुदर्शन ने कहा, "अंबेडकर महासभा परिसर में बाबासाहेब के अवशेष महज़ एक स्मारक नहीं हैं, बल्कि उन करोड़ों लोगों के लिए भावनात्मक केंद्र हैं जो उनके संघर्षों से प्रेरणा लेते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "इस ऐतिहासिक जगह को हटाने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

सुदर्शन ने BJP की "डबल-इंजन" सरकार पर "सोची-समझी साज़िश" के तहत काम करने का आरोप लगाया, जिसका मकसद बाबासाहेब की विरासत को कमज़ोर करना है, जबकि वे सिर्फ़ उनकी जयंती पर ही उन्हें चुनिंदा तौर पर श्रद्धांजलि देते हैं। उन्होंने ऐशबाग में प्रस्तावित बदलाव को "सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और बहुजन समुदाय की भावनाओं की घोर उपेक्षा" करार दिया।

आजाद ने कहा कि उन्हें कई पत्रों और सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार लोक भवन और विधानसभा के सामने स्थित इस स्थल को हटाकर अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह षड्यंत्र लोक भवन को विस्तार देने के लिए रचा जा रहा है।
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आजाद ने कहा कि उन्हें कई पत्रों और सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार लोक भवन और विधानसभा के सामने स्थित इस स्थल को हटाकर अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह षड्यंत्र लोक भवन को विस्तार देने के लिए रचा जा रहा है।
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आजाद ने कहा कि उन्हें कई पत्रों और सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार लोक भवन और विधानसभा के सामने स्थित इस स्थल को हटाकर अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह षड्यंत्र लोक भवन को विस्तार देने के लिए रचा जा रहा है।
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