
दिल्ली। मजदूर दिवस के अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मंडी हाऊस से जंतर मंतर तक पैदल मार्च का आयोजन किया था। मंडी हाऊस पर पहुंची आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पुलिसकर्मियों ने वहां मार्च न करने की इजाजत का हवाला देते हुए उन्हें जबरदस्ती बसों में बैठाकर कर जंतर मंतर लाया गया।
इस घटना के बाद, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में काफ़ी रोष था। संघ की अध्यक्षा शिवानी द मूकनायक से बताती हैं, "आज का दिन मजदूरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज हमे अपने इतिहास से सबक सीखना होता है। यह कैसा लोकतन्त्र है जहां बिना इजाजत धार्मिक यात्रा निकाली जा सकती है, उन्माद फैलाया जा सकता है, लेकिन मजदूर दिवस पर हम अपना मार्च नही निकाल सकते?"
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि, महिलाओं के साथ बदतमीजी की गई और उन्हे जबरदस्ती बस में बैठाया गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पुलिसबल में काफी नोक झोंक भी हुई।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने बात पर डटी रहीं। थोड़ी दूर ही सही लेकिन उन्होंने अपने मार्च का आयोजन किया। इस मार्च में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा, करावल नगर मजदूर संगठन, घरेलू कामगार संगठन, दिल्ली इस्पात उद्योग, बवाना औद्योगिक एरिया जैसे संगठन भी सामिल हुए। हालाकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना था कि, पुलिस की वजह से वहां अन्य संगठन के लोग नही पहुंच पाए।
मजदूर दिवस के आयोजन को लेकर कार्यकर्ताओं में काफ़ी उत्साह था। इस अवसर पर शिकागो के शहीदों और उनके योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में संकल्प लिया गया और दुनिया के मजदूरों के एक होने का आह्वान भी किया गया।
क्या था पूरा मामला?
बीते महीनों में, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन 38 दिनों तक मुख्यमंत्री आवास के बाहर अपनी मांगों को लेकर चला था। लेकिन इस मामले पर न केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने संज्ञान लिया। मांगों में शामिल वेतन में मामूली सी वृद्धि की गई थी, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इससे इंकार कर दिया था।
महिला दिवस के अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने राजघाट पर विशाल रैली का आयोजन किया था जिसके बाद सरकार ने ऐस्मा लगा दिया। संघ की अध्यक्षा शिवानी का कहना था कि, "एक तरफ ये बहनों को कर्मचारी नहीं मानते, दूसरी तरफ ऐस्मा जैसा कानून लगाते हैं। हम इसके खिलाफ़ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।"
ऐस्मा लगाने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं जब काम पर लौटी तो उनसे माफी नामा लिखवाया गया, कि वह भविष्य में ऐसे आंदोलन में भाग न लें। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मना किया तो, 881 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निष्काषित कर दिया गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रजनी ने कहा, सरकार हमे हर तरह से प्रताड़ित कर रही है। संघ की अध्यक्षा शिवानी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लड़ाई अदालत और सड़क दोनों पर मजबूती के साथ लड़ रही हैं, साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का केस कोर्ट में भी चल रहा है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने हक की लड़ाई जारी रखी
अदालत के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सड़क पर भी अपनी लड़ाई लड़ रही हैं। हर दिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं एक नए एरिया में भाजपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं के घर और कार्यालय पर जाकर प्रदर्शन करती हैं, उनके बायकॉट का आह्वान कर रही हैं, मोदी और केजरीवाल के खिलाफ़ नारेबाजी करती हैं।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूनम ने कहा, आंगनवाड़ी में बहुत सारी ऐसी महिलाएं हैं जिनके पति नही हैं। उनकी जीविका का मात्र एक सहारा यही है, मांगे पूरी न होने से वह अपना परिवार चला पाने में असमर्थ हैं। एक अन्य कार्यकर्ता ने बताया, "मां भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और दोनो के पति नही हैं। घर में 4 बच्चे हैं, हम दोनों को आंगनवाड़ी से निष्कासित कर दिया गया है। अब अपना घर कैसे चलाएं, कब तक मांग-मांग कर घर चलाएं, अब तो लोग कर्ज भी नही दे रहे।"
इस तरह आंदोलन में आने वाली हर महिला की अपनी दुख भरी कहनी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम यें लड़ाई जीत कर रहेंगे।
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