यूपी: सरयू, अर्जुन नहर परियोजनाओं में 15 साल पुराने वाहनों से काम चलाने की मजबूरी!

आईएएस डॉक्टर हीरालाल ने सभी पुराने 81 वाहनों को हटाने का लिया फैसला.
आईएएस डॉक्टर हीरालाल अधिकारियों के साथ
आईएएस डॉक्टर हीरालाल अधिकारियों के साथ

उत्तर प्रदेश। सरयू नहर परियोजना एवं अर्जुन नहर परियोजना में लगाए गए 15 साल पुराने 81 वाहनों से अभी भी काम किया जा रहा है। इन वाहनों के कारण कार्य में भी शिथिलता आ रही थी। इसके साथ ही इनकी मरम्मत के लिए अतिरिक्त पैसा भी खर्चा करना पड़ रहा था। यूपी प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन की बैठक में अब इन सभी वाहनों को नीलाम करने का निर्णय लिया गया है।

लखनऊ के गोमती नगर स्थित प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड में विशेष सचिव आईएएस डा. हीरा लाल ग्रेटर शारदा सहायक समादेश क्षेत्र विकास प्राधिकारी लखनऊ की अध्यक्षता में 97वीं बोर्ड की बैठक की। इस बैठक में विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी तथा उनके नामित प्रतिनिधि व शासन के अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

डॉ. हीरा लाला ने द मूकनायक को बताया कि, मुख्य रूप से सरयू नहर परियोजना एवं अर्जुन नहर परियोजना में कराये जा रहे भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का अनुमोदन किया गया है। प्राधिकारी की वित्तीय वर्ष 2010 से 2015-16 तक की आडिडेट बैलेंस सीट का भी अनुमोदन किया गया। प्राधिकारी के पास वर्तमान में 81 वाहन जिसमें ज्यादातर 15 वर्ष पुराने हैं, प्राधिकारी द्वारा 15 वर्ष पुराने वाहनों को नियमानुसार निष्प्रयोज्य करने हेतु नीलामी व स्क्रैप कराने के आदेश दिये हैं। सरयू नहर परियोजना एवं अर्जुन नहर परियोजना में लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति न होने के कारणों को प्राधिकारी के समक्ष रखा गया है।

कच्चे कामों को मनरेगा के जरिये कराने का प्रस्ताव पारित 

डॉ. हीरा लाल ने बताया कि, प्राधिकारी द्वारा कृषकों की भूमि पर बनाये जाने वाली नालियों के निर्माण हेतु भूमि के बदले मुआवजा दिये जाने तथा कृषकों को खड़ी फसल के बदले मुआवजा दिये जाने का प्रस्तावि पारित किया गया। बैठक में कच्चे कार्य को मनरेगा के माध्यम से कराये जाने का प्रस्ताव पास भी किया गया। प्राधिकारी द्वारा कार्यो में तकनीकी सहयोग हेतु निजी संस्थान, अर्धसरकारी, सरकारी संस्थान व एनजीओ से अनुबन्ध कर कार्य को कराये जाने हेतु प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इसके अतिरिक्त माइक्रोएरिगेशन को बढ़ावा प्रदान करने, स्प्रींकल सिंचाई जिसके माध्यम से कम पानी में फसलों की अधिक पैदावार की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि, प्रदेश के किसानों को जागरूक करने पर बल दिया गया। जल, जंगल और जमीन की सेवा की जाए, ताकि जलवायु परिवर्तन को रोका जा सके।

इस बैठक में अनीता वर्मा सिंह, विशेष सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग,मुख्य वित्तीय सलाहकार अंजली सोनी, अधीक्षण अभियन्ता रजनीश प्रकाश चौधरी सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

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