Farmers Protest: बैरिकेड्स, नुकीले तार और आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए किसानों के पास जबरदस्त तैयारियां

किसान आन्दोलन के दौरान किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस की सारी बाधाएं फेल हो सकती हैं, क्योंकि किसानों ने हर मुश्किल से निपटने का तरीका तैयार कर लिया है.
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किसान आन्दोलनग्राफिक- द मूकनायक

नई दिल्ली: अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए हरियाणा में अर्धसैनिक बलों की 64 कंपनियां और पुलिस की 50 कंपनियां तैनात हैं। लेकिन पुलिस द्वारा किसानों को रोकने की हर कोशिश को नाकाम करने के लिए किसानों के पास भी कोई कम उपाय नहीं हैं. मंगलवार रात 8 बजे तक पंजाब के किसान कहीं से भी हरियाणा में प्रवेश नहीं कर पाए तो किसानों ने एलान किया कि अब वे बुधवार को कूच करेंगे। रात को किसान जहां थे वहीं डेरा डाल दिया।

बैरिकेड हटाने के लिए जेसीबी मशीन

किसान बॉर्डर पर लगे बैरिकेड हटाने के लिए जेसीबी मशीन भी साथ लेकर निकले हैं। पुलिस द्वारा जगह-जगह लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने के लिए किसानों की जेसीबी मशीनें गरजते हुए किसानों के जत्थे के साथ चल रहीं हैं. 

आंसू गैस से बचने के लिए भीगी बोरियां

शंभू बॉर्डर पर आंसू गैस का असर खत्म करने के लिए किसानों ने गोलों पर पानी से भीगी बोरियां डाल दिया। जिससे गोले से निकलने वाला फोग लोगों के बीच नहीं फैल पा रहा है. इसके साथ आंखों व चेहरे पर जलन न हो इसके लिए पानी में भीगे कपड़े चेहरे पर डाल किसान आगे बढ़ रहे हैं।

कंटीले तारों से निपटने के लिए मिट्टी भरी ट्रालियां 

मंगलवार को शंभू बार्डर पर अमृतसर से कई किसान जेसीबी के साथ मिट्टी से भरी हुई ट्रॉलिया लेकर भी पहुंचे थे। किसान कंटीली तारों और कीलों पर मिट्टी बिछाकर दिल्ली कूच करने की येाजना बना रहे हैं। नुकीले तारों से किसान घायल न हो, किसानों के वाहनों को छति न पहुंचे इसलिए कीलों पर मिट्टियाँ डाल कर उसे ढकने के लिए किसान मिट्टी भरी ट्रालियां लेकर चल रहे हैं.

कल सुबह 11 बजे से शाम छह बजे के बीच किसानों और सुरक्षाबलों में कई बार टकराव हुआ। शंभू बॉर्डर पर 10 हजार किसान पहुंचे थे। आंसू गैस की वजह से मची भगदड़ में कुछ किसान घायल भी हुए हैं और कुछ की हालत बिगड़ गई। घायल किसानों को राजपुरा के अस्पताल, जबकि पुलिसकर्मियों को अंबाला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालात बेकाबू होते देख हरियाणा पुलिस और अधैसैनिक बलों की टुकड़ी ने शंभू बॉर्डर पर करीब कई किसानों को हिरासत में भी लिया है।

दूसरी ओर, पंजाब के खनौरी से आने वाले किसानों का जींद के दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोपहर 2.40 बजे टकराव हुआ। पंजाब के किसान सड़क पर बिछाई गई कीलें निकाले लगे तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं। लेकिन, कुछ ही घंटों में यहां काफी संख्या में हरियाणा के किसान भी पंजाब की तरफ पहुंच गए और प्रदर्शनकारियों का साथ देने लगे।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर ने सीमाओं पर बैरिकेडिंग करने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि “ऐसा नहीं लगता कि पंजाब और हरियाणा दो राज्य हैं। ऐसा लगता है कि उनकी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। हरियाणा को कश्मीर घाटी में बदल दिया गया है। हम सरकार के साथ किसी भी टकराव में शामिल नहीं होंगे। सरकार हम पर गोलियां चला सकती है या लाठीचार्ज कर सकती है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान भी हमारे भाई हैं। हमारा मार्च शांतिपूर्ण होगा।”

जवाब में हरियाणा पुलिस की एआईजी मनीषा चौधरी ने कहा कि, “प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया गया। भारी पथराव किया, जिसके जवाब में हरियाणा पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। प्रदर्शन की आड़ में किसी को भी उपद्रव फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

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