मध्य प्रदेश: सरकार के एक कदम से आदिवासी कल्याण सहित दो दर्जन योजनाएं अटकी!

मध्य प्रदेश: सरकार के एक कदम से आदिवासी कल्याण सहित दो दर्जन योजनाएं अटकी!

सरकार के नए सर्कुलर में वित्त विभाग की परमिशन जरूरी, बिना अनुमति नहीं खर्च कर सकेंगे आवंटित राशि।

भोपाल। मध्य प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मौजूदा खजाने को देखते हुए नई सरकार के गठन से लेकर हर दूसरे दिन वित्त विभाग को रिव्यू करना पड़ रहा है। हाल ही में विभाग ने एक सर्कुलर भी जारी कर दिया, जिसमें प्रमुख योजनाओं पर कटौती की तलवार लटका दी है। इस सर्कुलर के बाद आदिवासियों के लिए प्रदेश में संचालित योजनाएं सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं।

वित्त विभाग की बंदिश के बाद जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आदिवासियों के लिए चलाई जा रही राजा संग्राम सिंह पुरस्कार योजना, टंट्या भील मंदिर जीर्णोद्धार, आदिवासी पंचायतों के लिए बर्तन प्रदाय योजना का काम प्रभावित होगा। सामाजिक न्याय विभाग कृत्रिम अंग उपकरण वितरण योजना और खाद्य विभाग खाद्यान्न भंडारण गारंटी योजना के लिए वित्त विभाग को अनुमति प्रस्ताव भेजने के बाद ही निर्णय कर सकेगा।

वहीं आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित तीनों ऋण योजनाओं में स्वीकृत लाभार्थियों का पैसा भी अटक जाएगा। आदिवासी छात्रों के लिए संचालित छात्रावास भी प्रभावित होंगे। इनमें स्थापना, मरम्मत, निर्माण और नवीन छात्रावास खोले जाने के प्रस्ताव अटक सकते हैं। बता दें कि वित्त विभाग के इस नए सर्कुलर के बाद 38 विभागों को स्वीकृत पैसे को योजनाओं में खर्च करने से पहले वित्त विभाग को प्रस्ताव देना होगा। यदि वित्त विभाग प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लेता है तो वह भुगतान नहीं हो सकेगा। द मूकनायक से बातचीत करते हुए जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त संजीव सिंह ने कहा कि हमने अभी वित्त विभाग का सर्कुलर नहीं देखा है। स्टडी करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

इसी साल मार्च 2023 में विधानसभा में शिवराज सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट पेश किया था। बजट में कुल ₹3.14 लाख करोड़ का विनियोग है और कुल खर्च ₹2022-23 में 2.47 लाख करोड़, ₹2023 में 2.81 लाख करोड़- 14% की वृद्धि। बजट में राजस्व अधिशेष और राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 4% राजकोषीय घाटा दर्शाया गया था। कुल बजट में राज्य सरकार ने आदिवासी विकास के लिए ₹36,950 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। दलित कल्याण के लिए 26,087 करोड़ आवंटित किए थे।

प्रदेश में डॉ. मोहन यादव की सरकार बनने के साथ ही वित्त विभाग ने यह फैसला लिया है। इसके लिए वित्त विभाग ने 38 विभागों की अलग-अलग योजनाओं पर वित्त विभाग की अनुमति लिए बिना किसी तरह का खर्च करने या भुगतान करने पर रोक लगा दी है। ऐसा करना प्रदेश के खजाने पर बड़ा संकट माना जा रहा है।

यह योजनाएं होंगी प्रभावित

इन योजनाओं में आदिवासियों से संबंधित योजनाएं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, महाकाल परिसर विस्तार योजना, खेलों को प्रोत्साहित करने संबंधी सभी योजनाएं, आधा दर्जन से अधिक पुरस्कार योजनाएं, मंत्रियों अफसरों के बंगलों की मरम्मत, पीएम सड़क योजना, हवाई पट्टी विस्तार, किसानों के लिए संचालित मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना समेत कई योजनाओं पर काम के लिए पहले वित्त विभाग की परमिशन लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

स्कूल संबंधित इन स्कीम पर असर

स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आरटीई के अंतर्गत शासकीय विद्यालयो को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति, निशुल्क पाठ्य सामग्री का वितरण, छात्रावासों की स्थापना, निर्माण और संचालन, माडल स्कूलों की स्थापना और संचालन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षण और आवास व्यवस्था का काम प्रभावित होना तय है। साथ ही प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटाप दिए जाने, व्यवसायिक महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए स्पेशल ट्रेनिंग, खेलकूद परिसर का निर्माण, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक गतिविधियां, प्राथमिक स्तर पर मानिटरिंग के लिए फंड, एक्रिडेशन आफ स्कूल, स्काउट गाइड एक्टिविटी, योग आयोग की स्थापना, शैक्षिक अभ्युत्थान, राष्ट्रीय शैक्षिक कल्याण प्रतिष्ठान एमपी, समरसता छात्रावास, बीएड कालेज और डाइट के भवनों में अतिरिक्त निर्माण, एनसीसी विकास और सुदृढ़ीकरण, अंग्रेजी शिक्षा पढ़ाई संस्थान भोपाल, जबलपुर में विस्थापित भवन निर्माण (पीएसएम परिसर) के काम के लिए वित्त विभाग की सहमति लेना अनिवार्य किया गया है।

फिर कर्ज लेने की तैयारी

चुनावी साल में हुई घोषणाओं को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को अगले तीन महीने में 25 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेना पड़ेगा। इससे लाड़ली बहना के 4200 करोड़ और संविदा कर्मियों के बढ़ाए गए मानदेय को देने के लिए 1500 से 2000 करोड़ रुपए के साथ अन्य स्कीमों को पूरा करने पर लगने वाली राशि की भरपाई होगी। राज्य सरकार के जो पुराने लोन चल रहे हैं, उसका मूलधन भी नए कर्ज से जमा कराया जाएगा। अब यब साफ है कि इतना भारी भरकम लोन लेने के बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 के खत्म होते-होते तक एमपी पर लगभग 4.30 लाख करोड़ रुपए तक का कर्ज होगा। वर्तमान में करीब 3.90 लाख करोड़ रुपए का कर्ज मध्य प्रदेश पर है।

आईआईएम इंदौर के स्ट्रेटेजी एंड इंटरनेशनल बिजनेस डिपार्टमेंट के प्रो. प्रशांत सल्वान ने कहा की सरकार का खर्च तो कम नहीं हो सकता, आय के लिए नई प्लानिंग करना होगा स्थापना व्यय तो कम हो नहीं सकता है, ऐसे में सरकार के पास विकास कार्यों के लिए अधिक राशि की व्यवस्था करने का एक ही रास्ता है कि स्वयं की आय बढ़ाई जाए। सरकार को इंटरनल और एक्टर्नल एजेंसियों से प्लानिंग और रिसर्च कराना चाहिए। इससे कस्टमर बिहेवियर का पता चल सकेगा। वहीं ग्राउंड रियालिटी के आधार पर नई प्लानिंग करना चाहिए। बिजली कंपनियों का भुगतान भी इस कर्ज का एक बड़ा कारण है। बिजली कंपनियों को आय के स्रोत और क्लाइंट बेस बढ़ाने की जरूरत है।

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