उत्तर प्रदेश: लखनऊ स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए एक अहम पहल की है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस नए प्रोजेक्ट का मकसद भारत के औषधीय पौधों की विविधता को संरक्षित करना और इसके जरिए जनजातीय इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
यह महत्वाकांक्षी योजना देश के 13 राज्यों में चिन्हित 16 ट्राइबल हॉटस्पॉट (आदिवासी बहुल क्षेत्रों) में लागू की जाएगी। इस पहल के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान, आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान और खेती की आधुनिक तकनीकों का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
इस परियोजना को 'एक्शन प्लान फॉर इंटीग्रेटेड कंजर्वेशन, एग्रो-टेक्नोलॉजी एंड बायो-रिसोर्स एंटरप्राइज डेवलपमेंट फॉर सस्टेनेबल ट्राइबल लाइवलीहुड्स इन ट्राइबल हॉटस्पॉट्स' नाम दिया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य औषधीय पौधों के संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि करना है।
कार्यक्रम के पहले चरण में एनबीआरआई इन हॉटस्पॉट क्षेत्रों से औषधीय पौधों की विभिन्न प्रजातियों का दस्तावेजीकरण करेगा। इसके बाद इन दुर्लभ वनस्पति नमूनों को लखनऊ स्थित संस्थान के 'नेशनल हर्बेरियम' में सुरक्षित रखा जाएगा।
संस्थान महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के लिए एक समर्पित 'लाइव कंज़र्वेटरी' (जीवित संरक्षण गृह) भी स्थापित करने जा रहा है। इसके अलावा दुर्लभ, लुप्तप्राय और खतरे में पड़ी प्रजातियों सहित उच्च बाजार मूल्य वाले अन्य औषधीय पौधों के विकास के लिए विशेष प्रोपगेशन (प्रसार) प्रोटोकॉल तैयार किए जाएंगे।
इस पूरी कवायद का एक प्रमुख हिस्सा औषधीय पौधों से जुड़े उस पारंपरिक ज्ञान को सहेजना है जो पीढ़ियों से आदिवासियों के पास है। जहां भी प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध होगी, वहां पारंपरिक औषधीय नुस्खों और वनस्पतिक प्रथाओं को रिकॉर्ड करने के लिए छोटी वीडियो डॉक्यूमेंट्री बनाई जाएंगी।
एनबीआरआई के निदेशक ज़बीर अहमद ने बताया कि संस्थान सामुदायिक स्तर पर संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर पर कई संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा। इनमें कृषि विज्ञान केंद्र, वन धन विकास केंद्र, राज्य जनजातीय कल्याण और वन विभाग सहित अन्य हितधारक शामिल होंगे।
योजना के तहत प्रभावित इलाकों में सामुदायिक नर्सरी और सीड बैंक (बीज बैंक) स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। साथ ही आदिवासी किसानों, युवाओं, पारंपरिक चिकित्सकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए खेतों में व्यावहारिक प्रदर्शन और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
निदेशक ज़बीर अहमद के अनुसार, बाद के चरणों में इस परियोजना के तहत 'मास्टर ट्रेनर्स' को प्रशिक्षित करने का भी प्रस्ताव है। आदिवासी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री भी वितरित की जाएगी।
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर शरद श्रीवास्तव ने बताया कि इस पूरे प्रयास का मुख्य फोकस औषधीय पौधों की प्राकृतिक विविधता को बचाने पर होगा। इसके साथ ही वैज्ञानिक तकनीकों को विकसित करने और बेहतर खेती के तरीकों को अपनाने के लिए स्थानीय समुदायों को पूरी तरह सक्षम बनाया जाएगा।
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