
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में मंगलवार, को छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। यह विवाद एक हॉस्टल वार्डन द्वारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर हटाए जाने के आरोपों के बाद शुरू हुआ। आक्रोशित छात्रों का कहना है कि यह तस्वीर 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के विशेष अवसर पर लगाई गई थी।
इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान ताप्ती हॉस्टल कमेटी द्वारा किया गया था। कमेटी ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे बेहद शर्मनाक करार दिया है। अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल वार्डन ने जबरन दो बार डॉ. अंबेडकर की तस्वीर को वहां से हटाया और फिर उसे अपने कार्यालय में ताले में बंद कर दिया।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि मेस में डॉ. अंबेडकर की तस्वीर को तुरंत वापस लौटाकर ससम्मान स्थापित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस कृत्य के लिए वार्डन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग उठाई है।
दूसरी तरफ, हॉस्टल की तीन वार्डनों में से एक, वानिकी जोशी लोहानी ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंपस में किसी भी तरह के हंगामे या विवाद से बचने के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया था। उनके अनुसार, डॉ. अंबेडकर की तस्वीर के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, वर्तमान प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की तस्वीरों को भी वहां से हटाकर वार्डन के कार्यालय में सुरक्षित रख दिया गया है।
इस पूरे विवाद पर जेएनयू के एक अधिकारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल जैसी खुली और सार्वजनिक जगहों पर अक्सर तस्वीरों या संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं होती रहती हैं। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की घटनाओं के कारण अक्सर कैंपस में अव्यवस्था और बेवजह का तनाव पैदा हो जाता है।
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