
नासिक: नासिक महानगर पालिका चुनाव का बिगुल बज चुका है। वैसे तो मुख्य मुकाबला राज्य की सत्ताधारी पार्टियों—भाजपा और शिवसेना—के बीच माना जा रहा है, लेकिन शहर के करीब 15 वार्डों में जीत की चाबी दलित और मुस्लिम मतदाताओं के हाथ में है। इन वार्डों में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और यह चुनाव बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है।
गठबंधन में दरार: निर्दलीय उतरने से बिगड़े समीकरण
भाजपा द्वारा रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) को सीटें न देने और शिवसेना द्वारा रिपब्लिकन सेना (आनंदराज अंबेडकर) के प्रति अपनाए गए इसी तरह के रवैये ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। अब इस बात की पूरी संभावना है कि ये सहयोगी दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सत्ताधारी दलों का यह फैसला उन्हें भारी पड़ सकता है और वोटों का यह बंटवारा चुनाव परिणामों को प्रभावित करेगा।
चुनाव से पहले चर्चा थी कि भाजपा ने आरपीआई (आठवले गुट) को कुछ सीटें देने का आश्वासन दिया था। इसी उम्मीद में पार्टी नासिक रोड और सातपुर जैसे इलाकों में अपनी दावेदारी मानकर चल रही थी। लेकिन हकीकत में भाजपा ने आरपीआई को एक भी सीट नहीं दी। कमोबेश यही नीति शिवसेना ने रिपब्लिकन सेना के साथ अपनाई। शहर के कई इलाकों में दलित वोटों का अच्छा-खासा प्रभाव है, ऐसे में इन दलों की नाराजगी बड़े नेताओं की नींद उड़ा सकती है।
दलित राजनीति के प्रमुख चेहरे मैदान में
इस बदले हुए सियासी परिदृश्य में प्रकाश अंबेडकर की 'वंचित बहुजन आघाडी' ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 53 उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं, रिपब्लिकन सेना ने 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं, जबकि आरपीआई (आठवले) ने भी कुछ जगहों पर अपने उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है।
इस चुनावी समर में कई प्रमुख दलित चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें रिपब्लिकन सेना के अविनाश शिंदे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के संजय साबले और आरपीआई (आठवले गुट) के प्रकाश लोंढे शामिल हैं, जिनकी उम्मीदवारी ने मुकाबले को और भी कड़ा कर दिया है।
मुस्लिम वोट बैंक और 'दुबई वार्ड' का गणित
मध्य नासिक (Central Nashik) में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। अनुमान है कि कम से कम पांच वार्डों में हार-जीत का फैसला मुस्लिम वोट ही करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा और शिवसेना, दोनों ही प्रमुख दलों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने से परहेज किया है।
वार्ड नंबर 14, जिसे स्थानीय स्तर पर "दुबई वार्ड" के नाम से भी जाना जाता है, में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। यह वार्ड इस चुनाव का हॉटस्पॉट बना हुआ है। यहाँ एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट), कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। कुल मिलाकर, अकेले इस एक वार्ड में 18 मुस्लिम उम्मीदवार अपनी चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे यहाँ मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है।
जेल से चुनाव लड़ रहे हैं प्रकाश लोंढे
इस चुनाव की सबसे अनोखी कहानी सातपुर इलाके से है। आरपीआई (आठवले गुट) के कद्दावर नेता प्रकाश लोंढे, जिन्होंने पिछले पांच चुनावों में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है, इस बार जेल की सलाखों के पीछे से चुनाव लड़ रहे हैं। वे कई आपराधिक मामलों में कथित संलिप्तता के चलते फिलहाल जेल में बंद हैं।
उनकी अनुपस्थिति में चुनाव प्रचार की कमान उनकी बहू और पूर्व नगरसेविका दीक्षा लोंढे ने संभाल रखी है। वे घर-घर जाकर अपने ससुर के लिए वोट मांग रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सातपुर के मतदाता एक बार फिर प्रभावशाली लोंढे परिवार पर भरोसा जताते हैं या इस बार बदलाव की बयार बहेगी।
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