एमपी उप चुनाव: क्या पूर्व सीएम शिवराज सिंह के बेटे को भाजपा बुधनी सीट से बनाएगी उम्मीदवार?

कार्तिकेय चौहान ने विधानसभा और लोकसभा दोनों ही चुनावों में अपने पिता शिवराज सिंह चौहान के लिए प्रचार किया था। बुधनी विधानसभा के ग्रामीण इलाकों में कई सभाएं की और रैलियां भी की थीं।
एमपी उप चुनाव: क्या पूर्व सीएम शिवराज सिंह के बेटे को भाजपा बुधनी सीट से बनाएगी उम्मीदवार?
The Mooknayak

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान लोकसभा सांसद बन चुके हैं और उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया है। सोमवार को विधायक पद से इस्तीफा देने के साथ ही शिवराज सिंह चौहान भावुक हो गए थे।

बुधनी विधानसभा सीट से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के इस्तीफे के बाद रिक्त सीट पर अब भाजपा की ओर से प्रत्याशी के लिए पार्टी में मंथन शुरू हो चुका है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर बुधनी सीट की दावेदारी भाजपा की ओर से किसे कराई जाएगी ? हालांकि, भाजपा के गढ़ वाली इस सीट से उपचुनाव लड़ने के लिए कई उम्मीदवार भाजपा में मौजूद हैं, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम इन दिनों यहां खासा चर्चा में है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो खुद शिवराज सिंह चौहान भी लंबे समय से अपने बड़े बेटे कार्तिकेय चौहान को इस सीट की राजनीति पर सक्रिय रखे हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें या हालिया लोकसभा की, दोनों ही मौकों पर कार्तिकेय पिता के प्रचार के लिए सबसे ज्यादा सक्रिय बुधनी में ही नजर आए। इन्हीं कारणों के चलते बुधनी सीट से कार्तिकेय के चुनाव लड़ने की चर्चा खासा गर्म हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कार्तिकेय चौहान इस सीट से टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। हालांकि, फैसला भाजपा हाईकमान के हाथ में रहता है कि किसे मौका देना है और किसे नहीं। दूसरी ओर कार्तिकेय के अलावा विदिशा लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव भी बुधनी से चुनाव लड़ सकते हैं। इस बार भाजपा ने रमाकांत भार्गव का टिकट विदिशा सीट से काटकर शिवराज सिंह को मैदान में उतारा था। इस लिहाज से रमाकांत को भी पार्टी बुधनी से प्रत्याशी बना सकती है।

पिता के लिए नहीं पार्टी के लिए कर रहा हूँ प्रचार: कार्तिकेय

लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान, कार्तिकेय सिंह चौहान एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए पिता शिवराज सिंह चौहान के प्रचार के सवाल पर उन्होंने कहा था, 'मैं पिताजी के लिए नहीं, पार्टी की विचारधारा के लिए प्रचार कर रहा हूं, पहले पार्टी की विचारधारा उसके बाद कोई रिश्ते होते हैं। हमारी पार्टी की यही संस्कृति है। मैं विदिशा लोकसभा के लिए प्रचार कर रहा हूं, मैं चाहता हूं कि हमारी सरकार बने और हमारे विचार, संस्कृति के माध्यम से हम देश के विकास में योगदान दें।'

विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अंतर पर कार्तिकेय सिंह चौहान ने कहा, "मैंने 6 महीने पहले ही अपने पिता के लिए विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार किया था। जो कसर विधानसभा चुनाव में बची थी, वह लोकसभा चुनाव में पूरी हो जाएगी।"

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का परिवार.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का परिवार. इंटरनेट

पिता के लिए सभाएं

कार्तिकेय चौहान ने विधानसभा और लोकसभा दोनों ही चुनावों में अपने पिता शिवराज सिंह चौहान के लिए प्रचार किया था। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में कई सभाएं की और रैलियां भी की थी। पिछले पांच सालों से वह लगातार पार्टी के काम के लिए सक्रिय रहे। चुनाव के बाद भी वह पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलते-जुलते रहे। यहां तक कि ग्रामीणों की समस्या भी सुनते थे। शिवराज सिंह की व्यस्तताएं मुख्यमंत्री होने के कारण अधिक रहती थी, इसलिए विधानसभा क्षेत्र के सभी काम कार्तिकेय ही देख रहे थे। इसलिए उनकी क्षेत्र में पकड़ भी बेहतर बन गई थी। यदि बुधनी विधानसभा से उनके नाम पर विचार किया जाता है, तो उन्हें पिछले पांच साल में किए जमीनी काम का फायदा मिल सकता है।

कार्तिकेय चौहान
कार्तिकेय चौहानइंटरनेट

विजयपुर और बीना उप चुनाव पर संशय

मध्य प्रदेश में अमरवाड़ा के बाद कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि विजयपुर और बीना में भी कांग्रेस विधायकों की स्थिति के बाद उपचुनाव होंगे। इसी के चलते अभी से नए प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी गई है। अभी विजयपुर और बिना में कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफे तक नहीं दिए हैं, इसलिए यहां के उप चुनाव पर अभी स्थिति साफ नहीं है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के तीन विधायकों ने जनता के बीच भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इनमें अमरवाड़ा विधानसभा से विधायक कमलेश प्रताप शाह पहले नंबर पर थे। उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके बाद विजयपुर के कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने भी कांग्रेस छोड़ दी।

तीसरा नंबर पर बीना की विधायक निर्मला सप्रे ने भी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के समक्ष भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता ग्रहण कर ली। अभी अमरवाड़ा के विधायक के इस्तीफे के बाद 10 जुलाई को उपचुनाव हो रहे हैं, जबकि विजयपुर और बीना में इस्तीफे नहीं हुए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस में प्रत्याशियों की तलाश कर रही है। कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के कुताबिक जुलाई में कांग्रेस दल बदल करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

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