नई दिल्ली: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में साल 2016 में हुए चर्चित दलित उत्पीड़न मामले में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को उन्होंने स्थानीय अदालत के उस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें इस मामले में शामिल लगभग सभी आरोपियों को बीते मार्च महीने में बरी कर दिया गया था।
बसपा प्रमुख ने इस मुद्दे को उठाते हुए पीड़ितों की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि न्याय की आस में अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे इन दलित परिवारों को भारी आर्थिक और अन्य व्यावहारिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मायावती ने इस घटनाक्रम को एक परेशान करने वाला कड़वा सच करार दिया। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले से पूरे देश में, विशेषकर बहुजन समाज के लोगों के बीच भारी चिंता और बेचैनी फैल गई है।
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले से उनकी चिंता का एक विशेष कारण यह भी है कि घटना के बाद वह खुद पीड़ितों का दर्द साझा करने वहां गई थीं। उस वक्त उन्होंने राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की थी।
गौरतलब है कि जुलाई 2016 में ऊना कस्बे के पास एक गांव में उग्र भीड़ ने एक दलित परिवार के सात सदस्यों को सरेआम पीटा था। उन पर गाय की हत्या करने का आरोप लगाते हुए उन्हें आंशिक रूप से निर्वस्त्र कर कोड़े मारे गए थे। इसी मामले में मार्च में वेरावल सत्र अदालत ने 40 में से 35 आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया।
अदालत के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने इसे सरकार की दुर्भावना का नतीजा बताया। उनका कहना है कि इस घटना को लेकर पूरे देश में भारी आक्रोश था, इसके बावजूद 35 आरोपियों का बरी हो जाना दलितों के कल्याण और सुरक्षा के प्रति सरकार की घोर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है।
पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बसपा सुप्रीमो ने गुजरात सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हाई कोर्ट में इस मामले की मजबूती से पैरवी करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दोषियों को कड़ी सजा मिले।
इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि गुजरात सरकार अपने खर्च पर पीड़ितों को योग्य वकील मुहैया कराए। मायावती ने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार के दौरान उन्होंने भी गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए विशेष कानूनी प्रावधान किए थे, और इसी तर्ज पर गुजरात में भी पीड़ितों की मदद की जानी चाहिए।
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