उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस अवसर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने देश और राज्यों की सत्ता पर काबिज राजनीतिक दलों पर तीखा प्रहार किया। मायावती ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकारों की सामंती और जातिवादी सोच के कारण ही डॉ. अम्बेडकर के मानवतावादी और बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्य आज तक पूरी तरह सफल नहीं हो सके हैं।
बसपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि भारत के आत्मनिर्भर और विकसित देश बनने के तमाम दावों के बावजूद करोड़ों बहुजन परिवार आज भी भीषण गरीबी, बेरोजगारी और लाचारी का जीवन जीने को मजबूर क्यों हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में अन्याय और शोषणकारी तत्वों के लगातार हावी रहने के कारण शोषित व पिछड़े समाज को समता और न्याय-युक्त जीवन नहीं मिल पा रहा है। मायावती ने जोर देकर कहा कि डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर बहुजन समाज की सुरक्षा, सम्मान और विकास का यथार्थ आकलन होना बेहद जरूरी है।
मंगलवार को लखनऊ के 9 माल एवेन्यू स्थित बसपा केन्द्रीय कैम्प कार्यालय में मायावती ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बाबा साहेब की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके साथ ही, गोमती नदी के तट पर बसपा सरकार द्वारा निर्मित 'डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल' पर भी बड़ी संख्या में समर्थकों ने अपने मसीहा को नमन किया। नोएडा स्थित 'राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल' पर मरम्मत कार्य चलने के कारण इस बार पश्चिमी यूपी के समर्थक भी बाबा साहेब को श्रद्धा-सुमन अर्पित करने लखनऊ ही पहुंचे।
देश भर में बसपा द्वारा जोन-स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। अपने संदेश में मायावती ने याद दिलाया कि बसपा के कड़े संघर्ष के परिणामस्वरूप ही श्री वी.पी. सिंह की सरकार में डॉ. अम्बेडकर और नेल्सन मंडेला को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। उन्होंने बताया कि मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कर ओबीसी समाज को पहली बार 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने में भी पार्टी के संघर्ष की अहम भूमिका रही।
जयंती समारोहों में बसपा कार्यकर्ताओं ने पूरे जोश के साथ 'बाबा साहेब का मिशन अधूरा- बी.एस.पी. करेगी पूरा' और 'मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन अधूरा- मा. बहनजी करेंगी पूरा' के नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने बहुजन हितैषी सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने के लिए अपना तन, मन और धन से सहयोग जारी रखने का संकल्प दोहराया, जिस पर मायावती ने उनका आभार जताते हुए मेहनत रंग लाने का यकीन दिलाया।
अंत में, मायावती ने सत्ताधारी पार्टियों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता में दुख सहने की शक्ति होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकारें उन्हें गरीबी और पिछड़ेपन से निकालने के अपने संवैधानिक उत्तरदायित्वों को न निभाएं। बसपा प्रमुख ने दावा किया कि समाज के वंचित वर्गों को रोटी-रोजी और न्याय-युक्त आत्म-सम्मान का जीवन देने का यह जरूरी कार्य केवल बहुजन समाज पार्टी के राज में ही पूरी तरह संभव है।
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