
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से 11 दिसंबर 2026 तक चलेगा। पांच दिवसीय सत्र की अवधि को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इतने छोटे सत्र को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच दिन के सत्र में प्रदेश की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करना और उनके सवालों के जवाब मिलना संभव नहीं है। सरकार जनता के सवालों का सामना करने से बच रही है।
उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश के विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों, जनता, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना चाहते हैं। लेकिन सत्र की अवधि इतनी कम रखी गई है कि जनहित के कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा ही नहीं हो पाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अनुपूरक बजट पारित कराने के लिए विधानसभा का समय निकाल रही है, जबकि जनता से जुड़े सवालों के जवाब देने में उसकी रुचि नहीं है।
अनुपूरक बजट के लिए समय, जनता के सवालों की अनदेखी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा का सत्र केवल बजट संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने का मंच नहीं है। यह लोकतंत्र का महत्वपूर्ण सदन है, जहां प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है और सरकार को अपने फैसलों तथा नीतियों का जवाब देना पड़ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अनुपूरक बजट पारित कराने के लिए तो समय निकाल रही है, लेकिन जनता की समस्याओं पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय देने से बच रही है। ऐसे में पांच दिन के सत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने और सरकार से जवाब मांगने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाएंगे।
कर्मचारियों, किसानों और कानून व्यवस्था पर चर्चा चाहता है विपक्ष
उमंग सिंघार ने कहा कि विपक्ष विधानसभा में प्रदेश के कर्मचारियों की समस्याओं, किसानों की स्थिति, शराब कांड और कानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है। इन सभी विषयों का सीधा संबंध आम लोगों की जिंदगी से है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कर्मचारी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर परेशान हैं। किसानों के सामने भी कई चुनौतियां हैं। वहीं, शराब कांड और प्रदेश की कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और जनता की अपेक्षाओं को लेकर विधानसभा पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बात रखने और सरकार से जवाब मांगने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
लोकतंत्र की बात करने वाली सरकार सदन में चर्चा से बच रही
उमंग सिंघार ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ लोकतंत्र को बचाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात की जाती है, लेकिन दूसरी तरफ विधानसभा में जनता के मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों का सामना नहीं करना चाहती। पांच दिन का सत्र रखकर जनता से जुड़े गंभीर विषयों पर चर्चा के अवसर सीमित किए जा रहे हैं।
7 से 11 दिसंबर तक चलेगा विधानसभा का सत्र
मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान सदन में अनुपूरक बजट समेत विभिन्न विधायी और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
हालांकि, सत्र की अवधि को लेकर विपक्ष ने अभी से सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान से साफ है कि कांग्रेस सदन में कर्मचारियों, किसानों, युवाओं, शराब कांड और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
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